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बिना आपरेशन अंतड़ियों से निकाला ‘नेल’
रोहतक/ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2013 11:31 PM IST
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पीजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने एंडोस्कॉपी की मदद से अंतड़ियों से एक नेल को बाहर निकालने में सफलता प्रदान की है।
उन्होंने रोहतक के ही एक वरिष्ठ दंत चिकित्सक की माता की आंतड़ियों में फंसे तीन सेंटीमीटर लंबे नेल को बगैर आपरेशन के एंडोस्कॉपी द्वारा सफलतापूर्वक निकालकर उन्हें राहत प्रदान की।
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि गत दिनों मरीज रोहतक में किसी प्राइवेट दंत अस्पताल में दांतों का इलाज करवा रही थी। इसमें उनके दांतों को स्थिर करने के लिए उन्हें तीन सेंटीमीटर लंबा नेल लगाया गया, जो उसी दौरान फिसल गया और मरीज के पेट से होता हुआ अंतड़ियों में फंस गया।
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मरीज की दूरबीन से जांच की गई तो पता चला कि यह छोटी और बड़ी आंत जहां मिलती है, वहां धंसा हुआ था। इससे मरीज की जान को खतरा पैदा हो गया। उन्होंने बताया कि एंडोस्कॉपी से इसे निकालते वक्त भी आंतड़ियां फट सकती थीं। इसे बड़ी मुश्किल से सफलतापूर्वक निकाला गया।
हर माह होते हैं 700 टेस्ट
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि विभाग में खून की उल्टी का इलाज, सिकुड़ी हुई खाने की नलकी को खोलना, किसी प्रकार के सिक्के, सेल, सुई इत्यादि को पेट से निकालना, गेहूं की एलर्जी का टेस्ट आदि किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि औसतन हर महीने 600-700 एंडोस्कॉपी टेस्ट किए जाते हैं, जिसके लिए पहले मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने कहा कि उनके विभाग को काला पीलिया के लिए हरियाणा सरकार द्वारा नोडल सेंटर बनाया गया है। अब तक उन्होंने हेपेटाइटिस सी के 250 मरीजों का सफल इलाज किया है। हर शुक्रवार को सिल्यिक क्लीनिक भी शुरू किया गया है, जिसमें प्रत्येक ओपीडी में गेहूं से एलर्जी के करीब 100 मरीज सलाह लेने के लिए आ रहे हैं। कुलपति डॉ. एसएस सांगवान, प्रतिकुलपति डॉ. एसएन चुघ, निदेशक डॉ. चांद सिंह ढुल और कुलसचिव डॉ. सरला हुड्डा ने डॉ. प्रवीण मल्होत्रा को उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
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उन्होंने रोहतक के ही एक वरिष्ठ दंत चिकित्सक की माता की आंतड़ियों में फंसे तीन सेंटीमीटर लंबे नेल को बगैर आपरेशन के एंडोस्कॉपी द्वारा सफलतापूर्वक निकालकर उन्हें राहत प्रदान की।
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डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि गत दिनों मरीज रोहतक में किसी प्राइवेट दंत अस्पताल में दांतों का इलाज करवा रही थी। इसमें उनके दांतों को स्थिर करने के लिए उन्हें तीन सेंटीमीटर लंबा नेल लगाया गया, जो उसी दौरान फिसल गया और मरीज के पेट से होता हुआ अंतड़ियों में फंस गया।
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मरीज की दूरबीन से जांच की गई तो पता चला कि यह छोटी और बड़ी आंत जहां मिलती है, वहां धंसा हुआ था। इससे मरीज की जान को खतरा पैदा हो गया। उन्होंने बताया कि एंडोस्कॉपी से इसे निकालते वक्त भी आंतड़ियां फट सकती थीं। इसे बड़ी मुश्किल से सफलतापूर्वक निकाला गया।
हर माह होते हैं 700 टेस्ट
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि विभाग में खून की उल्टी का इलाज, सिकुड़ी हुई खाने की नलकी को खोलना, किसी प्रकार के सिक्के, सेल, सुई इत्यादि को पेट से निकालना, गेहूं की एलर्जी का टेस्ट आदि किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि औसतन हर महीने 600-700 एंडोस्कॉपी टेस्ट किए जाते हैं, जिसके लिए पहले मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने कहा कि उनके विभाग को काला पीलिया के लिए हरियाणा सरकार द्वारा नोडल सेंटर बनाया गया है। अब तक उन्होंने हेपेटाइटिस सी के 250 मरीजों का सफल इलाज किया है। हर शुक्रवार को सिल्यिक क्लीनिक भी शुरू किया गया है, जिसमें प्रत्येक ओपीडी में गेहूं से एलर्जी के करीब 100 मरीज सलाह लेने के लिए आ रहे हैं। कुलपति डॉ. एसएस सांगवान, प्रतिकुलपति डॉ. एसएन चुघ, निदेशक डॉ. चांद सिंह ढुल और कुलसचिव डॉ. सरला हुड्डा ने डॉ. प्रवीण मल्होत्रा को उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।