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फर्नीचर घोटाले में मेयर रेनू डाबला पर कार्रवाई की सिफारिश
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 06 May 2017 02:03 AM IST
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नगर निगम के फर्नीचर घोटाले की जांच
- फोटो : demo pic
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नगर निगम के फर्नीचर घोटाले की जांच निर्णायक दौर में पहुंच गई है। प्रदेश की केबिनेट एवं शहरी निकाय मंत्री कविता जैन ने दो दिन पहले फर्नीचर घोटाले में रोहतक नगर निगम की मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एमई जगदीश और अकाउंटेंट विकास के खिलाफ निगम एक्ट के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। फिलहाल फाइल शहरी निकाय विभाग के मुख्य सचिव राकेश गुप्ता के पास है। उन्हें सीएम ऑफिस से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। वहां से कार्रवाई होने पर निगम के पदाधिकारियों और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। मेयर सहित दूसरे पदाधिकारियों पर कार्रवाई होने पर शहर की राजनीति में बड़ा उठा-पठक होना तय है।
विजिलेंस जांच रिपोर्ट के मुताबिक 19 फरवरी 2014 को नगर निगम हाउस ने वार्डों के अंदर जन सुविधा केंद्र खोलने का निर्णय लिया था। इसके लिए फर्नीचर की खरीद की जानी थी। इसके लिए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर के साथ एमई जगदीश चंद्र और अकाउंटेंट विकास को जिम्मेदारी सौंपी गई। निगम की कागजी कार्रवाई पूरी होने पर 18 लाख से ज्यादा का फर्नीचर खरीदा गया। जनवरी 2015 में सवाल उठने लगे कि निगम ने मार्केट से ज्यादा रेट में फर्नीचर खरीदा है।
मामले ने तूल पकड़ा तो संबंधित फर्म ने एक लाख 43 हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट निगम में जमा करवा दिया। यह बात और है कि निगम ने इसे कैश ही नहीं कराया। मामले की निगम प्रशासन की ओर से उस समय के ट्रेनी आईएएस विक्रम सिंह से जांच करवाई गई। जांच में आईएएस ने फर्नीचर की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी के लिए निगम पदाधिकारियों और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद विजिलेंस जांच कराई गई। अक्तूबर 2016 में विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट चंडीगढ़ भेजी। जांच रिपोर्ट में आर्थिक अनियमितता के लिए निगम पदाधिकारियों और अधिकारियों को जिम्मेदार माना। रिपोर्ट में विजिलेंस ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के आचरण पर सरकार द्वारा फैसला लेने और निगम एमई जगदीश चंद्र और अकाउंटेंट विकास के खिलाफ निगम 1994 की धारा आठ के तहत विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
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एक सप्ताह पहले मंत्री कार्यालय पहुंची फाइल
विजिलेंस के निगम के तीनों पदाधिकारियों और अधिकारियों को उत्तरदायी ठहराए जाने के बाद से विभाग पर कार्रवाई के लिए दबाव बढ़ रहा था। भाजपा के अंदर ही आवाज उठने लगी थी। विजिलेंस जांच के पांच माह बाद भी फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी रहने पर मंशा पर ही सवाल उठाए जाने लगे थे। एक सप्ताह पहले फाइल शहरी निकाय मंत्री कविता जैन के कार्यालय पहुंची। दो दिन पहले मंत्री ने कार्रवाई के लिए फाइल आगे भेज दी।
सीएम ऑफिस से हरी झंडी मिलते ही कार्रवाई
कहा जा रहा है कि फाइल फिलहाल शहरी निकाय विभाग के मुख्य सचिव राकेश गुप्ता के पास है। वहां से फाइल सीएम ऑफिस जाएगी। मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद कार्रवाई के आदेश जारी होंगे। संभावना है कि एक सप्ताह के अंदर ही उठा-पठक हो सकती है।
गाज गिरी तो कांग्रेस को लगेगा झटका
फर्नीचर घोटाले में निगम मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के खिलाफ कार्रवाई होती है तो न केवल निगम, बल्कि शहर की राजनीति में कांग्रेस को नुकसान होगा। तीनों पदाधिकारी न केवल कांग्रेस से जुड़े हैं, बल्कि मेयर रेनू डाबला तो महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष भी हैं। इतना ही नहीं, राजनीति से जुड़े लोग उन्हें कलानौर से आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट के दावेदारों में से एक मानते हैं।
एक साल का कार्यकाल बचा, हाउस में पार्षदों दलगत स्थिति
नगर निगम हाउस में 20 पार्षद हैं, जिनका एक साल से ज्यादा कार्यकाल बचा हुआ है। दलों से संबंधित देखा जाएगा तो कांग्रेस पार्षदों का दबदबा है।
कांग्रेस समर्थक : वार्ड नंबर एक से राजबीर सैनी, 4 से मेयर रेनू डाबला, 6 से मंजू हुड्डा, 7 से सरिता देवी, 8 से उपासना देवी, 11 से अनिता मिगलानी, 12 से गुलशन ईशपुनियानी, 13 से संजय सैनी, 16 से अशोक भाटी, 19 से अनिल कुमार व 20 से लक्ष्मी देवी को कांग्रेस समर्थक माना जाता है।
भाजपा समर्थक : वार्ड 2 पार्षद ममता रानी, वार्ड 3 पार्षद सुशीला इंदौरा, वार्ड 10 पार्षद अशोक खुराना, वार्ड 15 पार्षद अजय जैन उर्फ टाटू, वार्ड 17 पार्षद जयकिशन और वार्ड 18 पूनम किलोई।
इनेलो समर्थक : बलराज उर्फ बल्लू
निर्दलीय पार्षद : सूरजमल और नीरा भटनागर
नोट : पार्षद ममता व सुशीला इंदौरा कभी खुद को भाजपाई तो कभी निर्दलीय पार्षद बताती रही हैं
...तो कांग्रेस व भाजपा में होगी बराबर की टक्कर
अगर फर्नीचर घोटाले में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर पर गाज गिरती है तो कांग्रेस समर्थित पार्षदों की संख्या 11 से 8 रह जाएगी। जबकि फर्नीचर घोटाले की जांच का मांग पत्र सौंपते समय भाजपा पार्षद अशोक, अजय, पूनम और जयकिशन के साथ सुशीला व ममता भी थीं। ऐसे में सत्ता को देखते हुए निदर्लीय पार्षद भी भाजपा के साथ आ सकते हैं। इस तरह अगर सत्ता बदली तो दोनों दलों में कांटे की टक्कर रहेगी। हालांकि अभी कुछ कहना जल्दबाजी है।
दो दिन पहले फाइल मेरे कार्यालय में आई थी। विजिलेंस जांच में रोहतक नगर निगम के तीनों पदाधिकारियों व निगम के एमई व अकाउंटेंट को उत्तरदायी माना गया है। भाजपा भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में सहन नहीं कर सकती। मामले में कार्रवाई की सिफारिश कर फाइल आगे भेजी गई है।
कविता जैन, शहरी निकाय मंत्री।
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विजिलेंस जांच रिपोर्ट के मुताबिक 19 फरवरी 2014 को नगर निगम हाउस ने वार्डों के अंदर जन सुविधा केंद्र खोलने का निर्णय लिया था। इसके लिए फर्नीचर की खरीद की जानी थी। इसके लिए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर के साथ एमई जगदीश चंद्र और अकाउंटेंट विकास को जिम्मेदारी सौंपी गई। निगम की कागजी कार्रवाई पूरी होने पर 18 लाख से ज्यादा का फर्नीचर खरीदा गया। जनवरी 2015 में सवाल उठने लगे कि निगम ने मार्केट से ज्यादा रेट में फर्नीचर खरीदा है।
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मामले ने तूल पकड़ा तो संबंधित फर्म ने एक लाख 43 हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट निगम में जमा करवा दिया। यह बात और है कि निगम ने इसे कैश ही नहीं कराया। मामले की निगम प्रशासन की ओर से उस समय के ट्रेनी आईएएस विक्रम सिंह से जांच करवाई गई। जांच में आईएएस ने फर्नीचर की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी के लिए निगम पदाधिकारियों और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद विजिलेंस जांच कराई गई। अक्तूबर 2016 में विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट चंडीगढ़ भेजी। जांच रिपोर्ट में आर्थिक अनियमितता के लिए निगम पदाधिकारियों और अधिकारियों को जिम्मेदार माना। रिपोर्ट में विजिलेंस ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के आचरण पर सरकार द्वारा फैसला लेने और निगम एमई जगदीश चंद्र और अकाउंटेंट विकास के खिलाफ निगम 1994 की धारा आठ के तहत विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
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एक सप्ताह पहले मंत्री कार्यालय पहुंची फाइल
विजिलेंस के निगम के तीनों पदाधिकारियों और अधिकारियों को उत्तरदायी ठहराए जाने के बाद से विभाग पर कार्रवाई के लिए दबाव बढ़ रहा था। भाजपा के अंदर ही आवाज उठने लगी थी। विजिलेंस जांच के पांच माह बाद भी फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी रहने पर मंशा पर ही सवाल उठाए जाने लगे थे। एक सप्ताह पहले फाइल शहरी निकाय मंत्री कविता जैन के कार्यालय पहुंची। दो दिन पहले मंत्री ने कार्रवाई के लिए फाइल आगे भेज दी।
सीएम ऑफिस से हरी झंडी मिलते ही कार्रवाई
कहा जा रहा है कि फाइल फिलहाल शहरी निकाय विभाग के मुख्य सचिव राकेश गुप्ता के पास है। वहां से फाइल सीएम ऑफिस जाएगी। मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद कार्रवाई के आदेश जारी होंगे। संभावना है कि एक सप्ताह के अंदर ही उठा-पठक हो सकती है।
गाज गिरी तो कांग्रेस को लगेगा झटका
फर्नीचर घोटाले में निगम मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के खिलाफ कार्रवाई होती है तो न केवल निगम, बल्कि शहर की राजनीति में कांग्रेस को नुकसान होगा। तीनों पदाधिकारी न केवल कांग्रेस से जुड़े हैं, बल्कि मेयर रेनू डाबला तो महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष भी हैं। इतना ही नहीं, राजनीति से जुड़े लोग उन्हें कलानौर से आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट के दावेदारों में से एक मानते हैं।
एक साल का कार्यकाल बचा, हाउस में पार्षदों दलगत स्थिति
नगर निगम हाउस में 20 पार्षद हैं, जिनका एक साल से ज्यादा कार्यकाल बचा हुआ है। दलों से संबंधित देखा जाएगा तो कांग्रेस पार्षदों का दबदबा है।
कांग्रेस समर्थक : वार्ड नंबर एक से राजबीर सैनी, 4 से मेयर रेनू डाबला, 6 से मंजू हुड्डा, 7 से सरिता देवी, 8 से उपासना देवी, 11 से अनिता मिगलानी, 12 से गुलशन ईशपुनियानी, 13 से संजय सैनी, 16 से अशोक भाटी, 19 से अनिल कुमार व 20 से लक्ष्मी देवी को कांग्रेस समर्थक माना जाता है।
भाजपा समर्थक : वार्ड 2 पार्षद ममता रानी, वार्ड 3 पार्षद सुशीला इंदौरा, वार्ड 10 पार्षद अशोक खुराना, वार्ड 15 पार्षद अजय जैन उर्फ टाटू, वार्ड 17 पार्षद जयकिशन और वार्ड 18 पूनम किलोई।
इनेलो समर्थक : बलराज उर्फ बल्लू
निर्दलीय पार्षद : सूरजमल और नीरा भटनागर
नोट : पार्षद ममता व सुशीला इंदौरा कभी खुद को भाजपाई तो कभी निर्दलीय पार्षद बताती रही हैं
...तो कांग्रेस व भाजपा में होगी बराबर की टक्कर
अगर फर्नीचर घोटाले में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर पर गाज गिरती है तो कांग्रेस समर्थित पार्षदों की संख्या 11 से 8 रह जाएगी। जबकि फर्नीचर घोटाले की जांच का मांग पत्र सौंपते समय भाजपा पार्षद अशोक, अजय, पूनम और जयकिशन के साथ सुशीला व ममता भी थीं। ऐसे में सत्ता को देखते हुए निदर्लीय पार्षद भी भाजपा के साथ आ सकते हैं। इस तरह अगर सत्ता बदली तो दोनों दलों में कांटे की टक्कर रहेगी। हालांकि अभी कुछ कहना जल्दबाजी है।
दो दिन पहले फाइल मेरे कार्यालय में आई थी। विजिलेंस जांच में रोहतक नगर निगम के तीनों पदाधिकारियों व निगम के एमई व अकाउंटेंट को उत्तरदायी माना गया है। भाजपा भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में सहन नहीं कर सकती। मामले में कार्रवाई की सिफारिश कर फाइल आगे भेजी गई है।
कविता जैन, शहरी निकाय मंत्री।