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फर्नीचर घोटाले की जांच करने पहुंची विजिलेंस, रिकार्ड तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 30 Aug 2016 02:34 AM IST
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फर्नीचर
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नगर निगम के फर्नीचर घोटाले की जांच करने विजिलेंस की टीम सोमवार को नगर निगम कार्यालय पहुंची। यहां से फर्नीचर खरीद से जुड़ा पूरा रिकार्ड तलब किया गया है। सीएम खट्टर ने खुद डेढ़ महीने पहले मामले में विजिलेंस जांच कराने के आदेश दिए थे। इस जांच में उस समय तैनात रहे अफसरों को भी शामिल किया जा सकता है। टीम को जांच रिपोर्ट एक महीने में देनी होगी और यदि विजिलेंस को घपला मिलता है तो इसमें मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
नगर निगम हाउस की बैठक में 19 फरवरी 2014 को एक प्रस्ताव पास किया गया। इसमें पार्षदों को अपने वार्ड में कार्यालय खोलने के लिए कहा गया था। कार्यालयों के लिए फर्नीचर खरीदने को एक कमेटी बनाई गई। इसमें मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एकाउंट ऑफिसर व एमई को रखा गया था। उस समय तीन दुकानदारों से कुटेशन मंगवाई गई, जिनमें से एक फर्नीचर हाउस से सामान मंगवा लिया गया और 19 लाख 63 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान अगस्त से दिसंबर 2014 तक अलग-अलग किस्तों में किया गया। पार्षद अशोक खुराना, जयकिशन शर्मा, पूनम किलोई, अजय जैन, ममता रानी, सुशीला इंदौरा ने फर्नीचर खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर अनु श्योकंद को शिकायत दी। उस समय जांच में खानापूर्ति की गई और जांच ट्रेनी आईएएस विक्रम को दी गई। उनकी जांच में आरोप सही पाए गये। यह फाइल दिसंबर 2015 में शासन को भेज दी गई। इस पर ही संज्ञान लेते हुए सीएम खट्टर ने 6 जुलाई 2016 को विजिलेंस जांच के आदेश दिए और मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी को नोटिस करने के आदेश हुए। उस समय निगम में एमई व एकाउंट ऑफिसर रहने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए गए। सीएम के आदेश के बाद शासन से पत्र मिलते ही विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी। सोमवार को विजिलेंस की टीम नगर निगम पहुंची और वहां से फर्नीचर खरीद मामले का पूरा रिकार्ड तलब किया। उस रिकार्ड के आधार पर जांच की जाएगी। विजिलेंस ने जांच में तेजी पकड़ी है, क्योंकि सीएम ने एक महीने में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता पार्षद अशोक खुराना से भी विजिलेंस ने संपर्क साधा है और उनसे भी जरूरी कागजात मांगे हैं।
इस तरह पकड़ा गया था घोटाला
ट्रेनी आईएएस विक्रम ने बाजार से कई दुकानों से सामान के रेट मंगवाए। इसमें पता चला कि जिन कुर्सियों को 850 रुपये में खरीदा गया है, उनका बाजार में रेट 525-530 रुपये है। कोई भी चीज ब्रांडेड नहीं है। अन्य सामान भी ज्यादा दाम पर खरीदा गया है। एक कुटेशन फर्जी लगाई गई थी, जिसमें रेट ज्यादा दिखाए गए थे। आईएएस विक्रम की जांच रिपोर्ट पूरी होने पर शासन को फाइल भेजी गई। हालांकि जब मामले ने तूल पकड़ा तो दुकानदार ने गुपचुप तरीके से एक लाख रुपये का चेक लौटा दिया था और उसे निगम में जमा कराया गया था। उससे भी शक बढ़ गया था।
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नगर निगम हाउस की बैठक में 19 फरवरी 2014 को एक प्रस्ताव पास किया गया। इसमें पार्षदों को अपने वार्ड में कार्यालय खोलने के लिए कहा गया था। कार्यालयों के लिए फर्नीचर खरीदने को एक कमेटी बनाई गई। इसमें मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एकाउंट ऑफिसर व एमई को रखा गया था। उस समय तीन दुकानदारों से कुटेशन मंगवाई गई, जिनमें से एक फर्नीचर हाउस से सामान मंगवा लिया गया और 19 लाख 63 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान अगस्त से दिसंबर 2014 तक अलग-अलग किस्तों में किया गया। पार्षद अशोक खुराना, जयकिशन शर्मा, पूनम किलोई, अजय जैन, ममता रानी, सुशीला इंदौरा ने फर्नीचर खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर अनु श्योकंद को शिकायत दी। उस समय जांच में खानापूर्ति की गई और जांच ट्रेनी आईएएस विक्रम को दी गई। उनकी जांच में आरोप सही पाए गये। यह फाइल दिसंबर 2015 में शासन को भेज दी गई। इस पर ही संज्ञान लेते हुए सीएम खट्टर ने 6 जुलाई 2016 को विजिलेंस जांच के आदेश दिए और मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी को नोटिस करने के आदेश हुए। उस समय निगम में एमई व एकाउंट ऑफिसर रहने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए गए। सीएम के आदेश के बाद शासन से पत्र मिलते ही विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी। सोमवार को विजिलेंस की टीम नगर निगम पहुंची और वहां से फर्नीचर खरीद मामले का पूरा रिकार्ड तलब किया। उस रिकार्ड के आधार पर जांच की जाएगी। विजिलेंस ने जांच में तेजी पकड़ी है, क्योंकि सीएम ने एक महीने में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता पार्षद अशोक खुराना से भी विजिलेंस ने संपर्क साधा है और उनसे भी जरूरी कागजात मांगे हैं।
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इस तरह पकड़ा गया था घोटाला
ट्रेनी आईएएस विक्रम ने बाजार से कई दुकानों से सामान के रेट मंगवाए। इसमें पता चला कि जिन कुर्सियों को 850 रुपये में खरीदा गया है, उनका बाजार में रेट 525-530 रुपये है। कोई भी चीज ब्रांडेड नहीं है। अन्य सामान भी ज्यादा दाम पर खरीदा गया है। एक कुटेशन फर्जी लगाई गई थी, जिसमें रेट ज्यादा दिखाए गए थे। आईएएस विक्रम की जांच रिपोर्ट पूरी होने पर शासन को फाइल भेजी गई। हालांकि जब मामले ने तूल पकड़ा तो दुकानदार ने गुपचुप तरीके से एक लाख रुपये का चेक लौटा दिया था और उसे निगम में जमा कराया गया था। उससे भी शक बढ़ गया था।
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