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मेरा पानी, मेरी विरासत योजना के प्रति बढ़ा रुझान
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मानव जीवन के लिए जल अमूल्य है, इसका कोई विकल्प नहीं है। भावी पीढ़ी के लिए जल का संरक्षण करना और भूजल स्तर में सुधार बहुत जरूरी है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को राज्य सरकार की मेरा पानी, मेरी विरासत योजना से जुड़ना चाहिए। जिले में अब तक 3572 किसानों ने योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाकर 8810 एकड़ रकबे में धान के बजाय दूसरी वैकल्पिक फसलें बोई हैं।
डीसी आरएस वर्मा ने बताया कि मेरा पानी, मेरी विरासत योजना बहुत प्रभावशाली है। इससे भूजल में सुधार के साथ-साथ किसान फसल में सुधार कर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। योजना के तहत प्रति एकड़ धान छोड़ने वाले किसानों को सरकार की ओर से सात हजार रुपये दिए जाएंगे। जिसमें दो हजार रुपये अभी और पांच हजार फसल तैयार होने पर दिए जाएंगे। इसके साथ ही जो वैकल्पिक फसलें वे धान की जगह लगाएंगे, उनका बीमा भी सरकारी खर्च पर होगा। योजना को अपनाने वाले किसान धान के स्थान पर कपास, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जी, बागवानी लगा रहे हैं।
कृषि व किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. रोहताश सिंह ने बताया कि जिन किसानों नेे भी अब तक मेरा पानी, मेरी विरासत योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है, उनका वैरिफिकेशन किया जा रहा है। खेतीबाड़ी और राजस्व विभागों की टीमें गांव-गांव जाकर इस बात की तसदीक कर रही हैं कि किसानों ने वाकई बताए गए रकबे में धान के बजाय दूसरी फसलें लगाई हैं। जैसे ही उनकी रिपोर्ट अपलोड हो जाएगी, किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। अन्य किसानों को भी यह योजना अपनाने को प्रेरित किया जा रहा है।
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डीसी आरएस वर्मा ने बताया कि मेरा पानी, मेरी विरासत योजना बहुत प्रभावशाली है। इससे भूजल में सुधार के साथ-साथ किसान फसल में सुधार कर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। योजना के तहत प्रति एकड़ धान छोड़ने वाले किसानों को सरकार की ओर से सात हजार रुपये दिए जाएंगे। जिसमें दो हजार रुपये अभी और पांच हजार फसल तैयार होने पर दिए जाएंगे। इसके साथ ही जो वैकल्पिक फसलें वे धान की जगह लगाएंगे, उनका बीमा भी सरकारी खर्च पर होगा। योजना को अपनाने वाले किसान धान के स्थान पर कपास, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जी, बागवानी लगा रहे हैं।
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कृषि व किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. रोहताश सिंह ने बताया कि जिन किसानों नेे भी अब तक मेरा पानी, मेरी विरासत योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है, उनका वैरिफिकेशन किया जा रहा है। खेतीबाड़ी और राजस्व विभागों की टीमें गांव-गांव जाकर इस बात की तसदीक कर रही हैं कि किसानों ने वाकई बताए गए रकबे में धान के बजाय दूसरी फसलें लगाई हैं। जैसे ही उनकी रिपोर्ट अपलोड हो जाएगी, किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। अन्य किसानों को भी यह योजना अपनाने को प्रेरित किया जा रहा है।
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