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Rohtak News: म्हारा खरा सोना... नेशनल पैरा गेम्स में रिंकू ने छठी बार गोल्ड जीता
Sat, 13 Jan 2024 02:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 13 Jan 2024 02:37 AM IST
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रोहतक। हौसले व हिम्मत के बूते सफलता की इबारत लिखने वाले बिरले ही होते हैं। विपरीत परिस्थितियों से जूझते हुए अपनी अलग पहचान बनाने वाले धामड़ निवासी रिंकू हुड्डा कुछ ऐसी ही शख्सियत हैं। खेत में हुए एक हादसे में अपना बायां हाथ गंवाने के बाद नए सिरे से जीवन जीने की ठानी और दाएं हाथ से अपनी किस्मत लिखना शुरू किया। पैरा खेलों से जुड़ कर जैवलिन थ्रो में 65 मीटर भाला फेंककर रिंकू ने राष्ट्रीय पैरा खेलों में लगातार छठा स्वर्ण पदक जीता। अमर उजाला से हुई बातचीत में इस जुझारू खिलाड़ी ने अपनी जीत की खुशी साझा की।
धामड़ निवासी रिंकू ने कहा कि यह स्पर्धा गोवा में चल रही है। जीत का श्रेय बड़े भाई अनुज के योगदान को जाता है। पिता रोहताश व मां सरोज ने भी लगातार प्रोत्साहित किया। सपना पैरालंपिक में भी पदक जीतना है। अनुज ने बताया कि वर्ष 2003 में खेत में काम करने के बाद रात को रिंकू वहीं सो गया था। खेत में लगा धान से भूसा अलग करने वाला पंखा उनके बाएं हाथ पर गिर गया। हाथ पंखुड़ियों में फंसकर शरीर से अलग हो गया। जब उसे पैरा खेलों की जानकारी देकर नए सिर से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया तो उसने हौसले से कदम बढ़ाया। हाथ गंवाने से पहले वह क्रिकेट खेलते थे। वर्ष 2013 में पैरा खेलों से जुड़ा।
रिंकू ने बताया कि वर्ष 2014 में पहली स्पर्धा राज्य स्तर पर पंचकूला में खेली। वर्ष 2015 में गांधी नगर गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों में कांस्य पदक जीता। अपनी 16 वर्ष की आयु में पहला 2016 के पैरालंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाला खिलाड़ी बना। यहां पांचवां स्थान रहा। वर्ष 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप लंदन में चौथा स्थान, 2018 के एशियन पैरा गेम्स इंडोएशियाई में रजत पदक व नेशनल में कांस्य पदक जीता। इस संघर्ष की यात्रा में बड़े भाई अनुज का परछाई की तरह हर कदम पर साथ व सहयोग रहा। कोच धर्मेंद्र ने भी हर संभव सहयोग दिया। वर्ष 2021 से वे खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर पद पर हैं। रेवाड़ी, झज्जर और गुरुग्राम जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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ये हैं रिंकू हुड्डा की उपलब्धि
वर्ष 2019 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता
वर्ल्ड चैंपियनशिप दुबई में चौथा स्थान रहा।
वर्ष 2020 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
वर्ष 2021 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
2022 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
2023 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
2023 एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
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धामड़ निवासी रिंकू ने कहा कि यह स्पर्धा गोवा में चल रही है। जीत का श्रेय बड़े भाई अनुज के योगदान को जाता है। पिता रोहताश व मां सरोज ने भी लगातार प्रोत्साहित किया। सपना पैरालंपिक में भी पदक जीतना है। अनुज ने बताया कि वर्ष 2003 में खेत में काम करने के बाद रात को रिंकू वहीं सो गया था। खेत में लगा धान से भूसा अलग करने वाला पंखा उनके बाएं हाथ पर गिर गया। हाथ पंखुड़ियों में फंसकर शरीर से अलग हो गया। जब उसे पैरा खेलों की जानकारी देकर नए सिर से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया तो उसने हौसले से कदम बढ़ाया। हाथ गंवाने से पहले वह क्रिकेट खेलते थे। वर्ष 2013 में पैरा खेलों से जुड़ा।
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रिंकू ने बताया कि वर्ष 2014 में पहली स्पर्धा राज्य स्तर पर पंचकूला में खेली। वर्ष 2015 में गांधी नगर गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों में कांस्य पदक जीता। अपनी 16 वर्ष की आयु में पहला 2016 के पैरालंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाला खिलाड़ी बना। यहां पांचवां स्थान रहा। वर्ष 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप लंदन में चौथा स्थान, 2018 के एशियन पैरा गेम्स इंडोएशियाई में रजत पदक व नेशनल में कांस्य पदक जीता। इस संघर्ष की यात्रा में बड़े भाई अनुज का परछाई की तरह हर कदम पर साथ व सहयोग रहा। कोच धर्मेंद्र ने भी हर संभव सहयोग दिया। वर्ष 2021 से वे खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर पद पर हैं। रेवाड़ी, झज्जर और गुरुग्राम जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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ये हैं रिंकू हुड्डा की उपलब्धि
वर्ष 2019 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता
वर्ल्ड चैंपियनशिप दुबई में चौथा स्थान रहा।
वर्ष 2020 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
वर्ष 2021 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
2022 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
2023 नेशनल पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
2023 एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।