{"_id":"5e4c5a318ebc3ecfbc310b9a","slug":"municipality-budget-pass-without-objection-rohtak-news-rtk5429301151","type":"story","status":"publish","title_hn":"15 दिनों की मशक्कत से तैयार नगर निगम का बजट मात्र 15 मिनट में बिना किसी विरोध के पास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
15 दिनों की मशक्कत से तैयार नगर निगम का बजट मात्र 15 मिनट में बिना किसी विरोध के पास
विज्ञापन
जिला विकास भवन में मंगलवार को नगर निगम का साल 2020-21 का बजट पास करते पार्षद और मेयर मनमोहन गोयल साथ मे?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहतक। टैक्स ब्रांच की ओर से 15 दिन की जद्दोजहद के बाद तैयार किया गया नगर निगम का 2020 - 21 का बजट मंगलवार को पार्षदों ने मात्र 15 मिनट के मंथन के बाद बिना किसी खास सवाल - जवाब के पास कर दिया। आयुक्त प्रदीप गोदारा ने पार्षदों से कहा कि सरकार की तरफ 104 करोड़ रुपये बकाया है। आधी राशि 31 मार्च तक मिलने की उम्मीद है। राशि मिल गई तो काम चल जाएगा। फिर भी जहां बेहद जरूरी काम होंगे, उनके लिए अपने स्टाफ तक का वेतन एक माह के लिए रोक दूंगा। उधर, कांग्रेस पार्षदों व पूर्व पार्षदों ने निगम के बजट को जुमलों और झूठ का पुलिंदा करार दिया है, जबकि मेयर का कहना है कि कांग्रेसियों का काम राजनीति करना है। जबकि भाजपा का काम कार्य करना है।
मंगलवार को दोपहर 11 बजे हाउस की मीटिंग में 22 में से 20 पार्षद पहुंचे। निगम के एसटीपी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय ने बजट हाउस में रखा। बताया कि निगम ने सालभर में 1 अरब की 67 करोड़ की आय का टारगेट रखा है, जबकि 1 अरब 44 करोड़ खर्च किए जाएंगे। पार्षद अनिल कुमार ने कहा कि, मात्र एक दिन पहले पार्षदों को बिना हस्ताक्षर का बजट भेजा है, जबकि पहले एक सप्ताह पहले भेजा जाता था। इस पर आयुक्त ने आगे ध्यान रखने का भरोसा दिया। आयुक्त ने बताया कि सरकार के नियम हैं कि अगर बजट में 20 प्रतिशत की ग्रोथ नहीं होगी तो ग्रांट नहीं मिलेगी। ऐसे में दोबारा बजट तैयार करना पड़ा। महिला पार्षद कंचन खुराना ने कहा कि बजट में बेवजह के खर्च नहीं किए जाएं। इसके बाद 15 मिनट में बिना किसी बहस के हाउस में बजट पास कर दिया गया। किसी पार्षद ने कोई विरोध नहीं किया।
निगम का बजट जुमलों और झूठ का पुलिंदा, जिसका यथार्थ से नहीं कोई लेना देना
कांग्रेस पार्षद गुलशन ईशु पुनियानी, कदम सिंह अहलावत, पूर्व डिप्टी मेयर अशोक भाटी, पूर्व पार्षद नरोतामल भटनागर, संजय सैनी व संजय दलाल का कहना है कि निगम का बजट यथार्थ से परे है। बजट में यूजेज चार्ज 31 मार्च 2020 तक 5 करोड़ वसूलने का टारगेट रखा गया है, जो बीते वर्ष के बजट में 10 करोड़ का था और इसे आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में भी 10 करोड़ का रखा गया है, इसी तरह स्टैंप ड्यूटी भी जो बीते वर्ष की तरह 30 करोड़ रखी गई है और उसका 36 करोड़ वसूल का टारगेट रखा गया, जबकि इस हिसाब से आगामी वित्त वर्ष लिए स्टैंप ड्यूटी 50 करोड़ रुपए के आसपास होनी चाहिए थी। इसी तरह हाउस टैक्स के आंकड़ों को भी घुमा फिराकर पेश किया गया है, जो बीते वित्त वर्ष में 48 करोड़ था और 33 करोड़ वसूल करने का टारगेट रखा गया उसे आगामी वर्ष के लिए 55 करोड़ कर दिया गया। यानी पिछला टारगेट पूरे किए बिना ही आगामी टारगेट को बढ़ा दिया गया। साफ है कि केवल अपनी नाकामियां छुपाने के लिए बजट को बढ़ा - चढ़ाकर पेश किया गया। कांग्रेस पार्षदों ने मेयर के उस बयान को भी आधारहीन बताया, जिसमें उन्होंने अधिकारियों के हवाले से फायदे के बजट में ग्रांट मिलने की बात कही, जबकि वह इस बात को भूल गए की प्रदेश के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि निगम को किसी प्रकार की ग्रांट नहीं दी जाएगी। पार्षदों ने कहा कि मेयर जनता को बताएं कि इस बात की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने झूठ क्यों बोला? इसी तरह गौशाला के नाम पर भी बीते वित्त वर्ष का बजट 1 करोड़ 80 लाख था, जिसमें से 2 करोड़ 34 लाख खर्च दिखाया गया और आगामी वित्त वर्ष में उस बजट को बढ़ाकर ढाई करोड़ कर दिया गया, जबकि गोवंश की हालत किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पूरे निगम में विकास के लिए महज 7.50 करोड़ का बजट पास किया गया है, जबकि इतने पैसे में सड़कों पर मरम्मत और नालियां बनाने का कार्य भी नहीं हो सकता। कांग्रेस पार्षदों ने आगे आरोप लगाया कि सैस के नाम पर पिछले वित्त वर्ष में 20 करोड़ का बजट पास किया गया था, लेकिन कमाल की बात है कि इस पैसे को सही जगह इस्तेमाल करने की बजाय यह रुपया घाटे में चल रहे निगम को बचाने के लिए दर्शा दिया गया, और आगामी वर्ष में इसे बढ़ाकर 22.60 करोड़ कर दिया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर रहा है।
विज्ञापन
विपक्ष का काम राजनीति करना, म्हारा विकास कराना
विपक्ष का काम राजनीति करना है, जबकि म्हारा काम विकास करना है। बजट के अंदर संभावित आंकड़े पेश किए जाते हैं। तभी केंद्र व राज्य सरकार से ग्रांट मिलती है। सीएम ने निगम को आत्मनिर्भर बनने के लिए कहा था। यह नहीं कहा था कि कोई ग्रांट नहीं मिलेगी। निगम को सरकार से 104 करोड़ रुपये लेने हैं। उनमें से स्टांप ड्यूटी और डी प्लान का पैसा 31 मार्च तक मिलने की उम्मीद है। बाकी पैसा सीएम ने प्रदेश सरकार के बजट के बाद जारी करने का भरोसा दिया है।
- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम।
विज्ञापन
मंगलवार को दोपहर 11 बजे हाउस की मीटिंग में 22 में से 20 पार्षद पहुंचे। निगम के एसटीपी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय ने बजट हाउस में रखा। बताया कि निगम ने सालभर में 1 अरब की 67 करोड़ की आय का टारगेट रखा है, जबकि 1 अरब 44 करोड़ खर्च किए जाएंगे। पार्षद अनिल कुमार ने कहा कि, मात्र एक दिन पहले पार्षदों को बिना हस्ताक्षर का बजट भेजा है, जबकि पहले एक सप्ताह पहले भेजा जाता था। इस पर आयुक्त ने आगे ध्यान रखने का भरोसा दिया। आयुक्त ने बताया कि सरकार के नियम हैं कि अगर बजट में 20 प्रतिशत की ग्रोथ नहीं होगी तो ग्रांट नहीं मिलेगी। ऐसे में दोबारा बजट तैयार करना पड़ा। महिला पार्षद कंचन खुराना ने कहा कि बजट में बेवजह के खर्च नहीं किए जाएं। इसके बाद 15 मिनट में बिना किसी बहस के हाउस में बजट पास कर दिया गया। किसी पार्षद ने कोई विरोध नहीं किया।
विज्ञापन
निगम का बजट जुमलों और झूठ का पुलिंदा, जिसका यथार्थ से नहीं कोई लेना देना
कांग्रेस पार्षद गुलशन ईशु पुनियानी, कदम सिंह अहलावत, पूर्व डिप्टी मेयर अशोक भाटी, पूर्व पार्षद नरोतामल भटनागर, संजय सैनी व संजय दलाल का कहना है कि निगम का बजट यथार्थ से परे है। बजट में यूजेज चार्ज 31 मार्च 2020 तक 5 करोड़ वसूलने का टारगेट रखा गया है, जो बीते वर्ष के बजट में 10 करोड़ का था और इसे आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में भी 10 करोड़ का रखा गया है, इसी तरह स्टैंप ड्यूटी भी जो बीते वर्ष की तरह 30 करोड़ रखी गई है और उसका 36 करोड़ वसूल का टारगेट रखा गया, जबकि इस हिसाब से आगामी वित्त वर्ष लिए स्टैंप ड्यूटी 50 करोड़ रुपए के आसपास होनी चाहिए थी। इसी तरह हाउस टैक्स के आंकड़ों को भी घुमा फिराकर पेश किया गया है, जो बीते वित्त वर्ष में 48 करोड़ था और 33 करोड़ वसूल करने का टारगेट रखा गया उसे आगामी वर्ष के लिए 55 करोड़ कर दिया गया। यानी पिछला टारगेट पूरे किए बिना ही आगामी टारगेट को बढ़ा दिया गया। साफ है कि केवल अपनी नाकामियां छुपाने के लिए बजट को बढ़ा - चढ़ाकर पेश किया गया। कांग्रेस पार्षदों ने मेयर के उस बयान को भी आधारहीन बताया, जिसमें उन्होंने अधिकारियों के हवाले से फायदे के बजट में ग्रांट मिलने की बात कही, जबकि वह इस बात को भूल गए की प्रदेश के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि निगम को किसी प्रकार की ग्रांट नहीं दी जाएगी। पार्षदों ने कहा कि मेयर जनता को बताएं कि इस बात की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने झूठ क्यों बोला? इसी तरह गौशाला के नाम पर भी बीते वित्त वर्ष का बजट 1 करोड़ 80 लाख था, जिसमें से 2 करोड़ 34 लाख खर्च दिखाया गया और आगामी वित्त वर्ष में उस बजट को बढ़ाकर ढाई करोड़ कर दिया गया, जबकि गोवंश की हालत किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पूरे निगम में विकास के लिए महज 7.50 करोड़ का बजट पास किया गया है, जबकि इतने पैसे में सड़कों पर मरम्मत और नालियां बनाने का कार्य भी नहीं हो सकता। कांग्रेस पार्षदों ने आगे आरोप लगाया कि सैस के नाम पर पिछले वित्त वर्ष में 20 करोड़ का बजट पास किया गया था, लेकिन कमाल की बात है कि इस पैसे को सही जगह इस्तेमाल करने की बजाय यह रुपया घाटे में चल रहे निगम को बचाने के लिए दर्शा दिया गया, और आगामी वर्ष में इसे बढ़ाकर 22.60 करोड़ कर दिया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर रहा है।
विज्ञापन
विपक्ष का काम राजनीति करना, म्हारा विकास कराना
विपक्ष का काम राजनीति करना है, जबकि म्हारा काम विकास करना है। बजट के अंदर संभावित आंकड़े पेश किए जाते हैं। तभी केंद्र व राज्य सरकार से ग्रांट मिलती है। सीएम ने निगम को आत्मनिर्भर बनने के लिए कहा था। यह नहीं कहा था कि कोई ग्रांट नहीं मिलेगी। निगम को सरकार से 104 करोड़ रुपये लेने हैं। उनमें से स्टांप ड्यूटी और डी प्लान का पैसा 31 मार्च तक मिलने की उम्मीद है। बाकी पैसा सीएम ने प्रदेश सरकार के बजट के बाद जारी करने का भरोसा दिया है।
- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम।