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मिस्र की सभ्यता से चली आ रही बीमारी नक्रोफिलिया का वर्तमान में उपचार संभव

Mon, 15 Jul 2019 02:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jul 2019 02:36 AM IST
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misra ki sbhyata
डॉ. प्रदीप
रोहतक। शव से व्यभिचार, वर्तमान में ही नहीं मिस्र की सभ्यता से चली आ रही मानसिक बीमारी है। मेडिकल साइंस में इसे नेक्रोफिलिया बीमारी कहा जाता है, इसे आईसीडी-10 व डीएसएम-4 ने भी इसे बीमारी माना है। दावा है कि यदि समय पर इसकी पहचान हो तो वर्तमान में मनोचिकित्सक इसका उपचार कर सकते हैं। यह बीमारी शून्य से पांच फीसदी लोगों में मिलती है। यह जानकारी दी है पीजीआईएमएस के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ में साइक्रेटिक सोशल वर्क यूनिट के कंसलटेंट डॉ. प्रदीप कुमार ने।
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डॉ. प्रदीप कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि शव से व्यभिचार के केस अकसर सामने आते हैं। यह कोई नई बीमारी नहीं है, यह मिस्र की सभ्यता में भी थी। द इंटरनेशनल जरनल ऑफ इंडियन साइकोलोजी 2019 में नेक्रोफिलिया एंड अंडरस्टेंडिंग में इसका वर्णन है। 1850 में बेल्जियम के जोसेफ ग्यूसलेन ने भी इसे बीमारी के रूप में एक पहचान दी। फादर ऑफ हिस्ट्री हेरोेडोटस भी मानते हैं कि प्राचीन मिस्र में एक सुंदर महिला की मौत पर उसके पति ने अपनी पत्नी को कब्र में दफन करने से पहले अपनी कामेच्छा पूरी की थी।
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इसे आईसीडी-10 (इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजिज) व डीएसएम-4 (डायग्नोस्टिक स्टेटिकल मैनूअल) ने भी इसे बीमारी माना है। इसमें मरीज की कामेच्छा बहुत अधिक होती है, लेकिन वह सामाजिक मूल्यों के अलावा जीवित महिला या पुरुष से अपनी काम संतुष्टि प्राप्त करने में डरता है। उसे लगता है कि वह कहीं कमजोर न पड़ जाए या उसे मना न कर दिया जाए। शव कभी सहमति व असहमति नहीं देता और वह अपना पक्ष भी नहीं रख सकता, इसलिए वह शव को इसका माध्यम बनाता है।
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कुछ मामलों में तो मरीज अपने साथी की हत्या करके भी अपनी कामेच्छा पूरी करने का प्रयास कर सकता है। डॉ. ए अग्रवाल ने 2016 में नेक्रोफिलिया फोरेंसिक एंड मेडिको लीगल एक्सपेक्ट में (होमोसाइडिल नारको फिलिक्स) में इसका जिक्र किया है। इसमें मरीज को गलत कार्य से बचाने के लिए उसे जागरूक करना और उसके विचार बदलना शामिल था। यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक होती है। इस केस में व्यक्ति पर आईपीसी 297 व 377 धारा लगती है।


1989 में रोशनैन व रैसनिक ने 122 पर यह स्टडी की तो इस बीमारी का शिकार आठ फीसदी महिलाएं व 92 फीसदी पुरुष इसका शिकार मिले थे। प्रदेश में व संस्थान में भी इस तरह के कुछ मामले सामने आए हैं। पुलिस भी महिलाओं की मौत पर पहले रेप से संबंधित मेडिकल कराती है।

यह होता है मुख्य कारण
- 66 प्रतिशत में पार्टनर के मना करने का डर
- 19 प्रतिशत में पार्टनर के खोने या ब्रेकअप का डर
- 15 प्रतिशत अलग थलग रहने वाले में
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