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दो साल बाद बच्ची के पेट से निकाला थर्मामीटर का सैल
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 20 Sep 2016 02:42 AM IST
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फेफड़ों में फंसने के बाद लीक हो गया था सैल का केमिकल
- फोटो : amar ujala
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पीजीआईएमएस के ईएनटी विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान के डाक्टरों ने न केवल नौ वर्षीय बच्ची के पेट से दो साल बाद थर्मामीटर का सैल निकाला, बल्कि उसे नया जीवन भी दिया। डाक्टरों ने दूरबीन के माध्यम से फेफड़ों में सैल के लीक हो चुके केमिकल को साफ किया और दूरबीन से ही सैल को बाहर निकाला।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. रमन वढेरा ने बताया कि सोनीपत की रहने वाली नौ वर्षीय काजल दस सितंबर को संस्थान में दिखाने आई थी। जांच के दौरान पता चला कि काजल ने दो वर्ष पहले खेलते हुए डिजिटल थर्मामीटर का सैल निगल लिया था। परिजनों ने इस बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने सोचा कि छोटा सा सैल है खाने की नली से पेट में चला गया होगा और मल के साथ बाहर आ जाएगा। करीब एक साल से बच्ची को अचानक खांसी और बुखार होना शुरू हो गया। स्थानीय डाक्टर से उपचार कराने के बाद कोई लाभ नहीं मिला। इस पर बच्ची को पीजीआईएमएस में लाया गया। डॉ. रमन ने बताया कि एक्सरे जांच में सामने आया कि बच्ची के फेफड़ों में सैल फंसा हुआ है, जिससे संक्रमण होकर उसे बार-बार बुखार आ रहा है। इसके बाद डॉ. रमन और निश्चेतन विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. एसके सिंघल की टीम ने दूरबीन के माध्यम से फेफड़ों में सैल के लीक हो चुके केमिकल को साफ किया और दूरबीन से ही सैल को बाहर निकाला। फिलहाल बच्ची की हालत में सुधार है। डॉ. रमन ने बताया कि सैल में प्रयोग होने वाला रसायन बहुत खतरनाक होता है, जिसके प्रभाव से मरीज क ी मौत भी हो सकती है। आमतौर पर देखा जाता है कि घर में माता-पिता अपने बच्चों को बैटरी से चलने वाले चाईनीज खिलौने देते हैं। ऐसे में बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. एसपीएस यादव ने टीम को सफल ऑपरेशन करने पर बधाई दी।
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ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. रमन वढेरा ने बताया कि सोनीपत की रहने वाली नौ वर्षीय काजल दस सितंबर को संस्थान में दिखाने आई थी। जांच के दौरान पता चला कि काजल ने दो वर्ष पहले खेलते हुए डिजिटल थर्मामीटर का सैल निगल लिया था। परिजनों ने इस बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने सोचा कि छोटा सा सैल है खाने की नली से पेट में चला गया होगा और मल के साथ बाहर आ जाएगा। करीब एक साल से बच्ची को अचानक खांसी और बुखार होना शुरू हो गया। स्थानीय डाक्टर से उपचार कराने के बाद कोई लाभ नहीं मिला। इस पर बच्ची को पीजीआईएमएस में लाया गया। डॉ. रमन ने बताया कि एक्सरे जांच में सामने आया कि बच्ची के फेफड़ों में सैल फंसा हुआ है, जिससे संक्रमण होकर उसे बार-बार बुखार आ रहा है। इसके बाद डॉ. रमन और निश्चेतन विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. एसके सिंघल की टीम ने दूरबीन के माध्यम से फेफड़ों में सैल के लीक हो चुके केमिकल को साफ किया और दूरबीन से ही सैल को बाहर निकाला। फिलहाल बच्ची की हालत में सुधार है। डॉ. रमन ने बताया कि सैल में प्रयोग होने वाला रसायन बहुत खतरनाक होता है, जिसके प्रभाव से मरीज क ी मौत भी हो सकती है। आमतौर पर देखा जाता है कि घर में माता-पिता अपने बच्चों को बैटरी से चलने वाले चाईनीज खिलौने देते हैं। ऐसे में बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. एसपीएस यादव ने टीम को सफल ऑपरेशन करने पर बधाई दी।
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