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मूल्यांकन से नहीं, लड़ कर जुटाए अंकों से मिलेंगे पदक : अमित पंघाल
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रोहतक। एशियन चैंपियनशिप में चयन के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई गई है। यह किसी को समझ नहीं आ रही है। चैंपियनशिप में मूल्यांकन से पदक नहीं मिलेंगे। वहां लड़कर जुटाए गए अंकों से ही पदक मिलेगा। कहीं न कहीं कोचों ने अपने चहेतों को चैंपियनशिप में भेजने का काम किया है। इससे वर्तमान खिलाड़ियों को तो नुकसान होगा ही, साथ में भावी खिलाड़ियों के लिए भी नुकसानदायक होगा। इसीलिए न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह कहना है दुनिया के नंबर एक बॉक्सर अमित पंघाल का। वह शनिवार को सनसिटी हाइट्स में अपने फ्लैट पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
पंघाल ने कहा कि हम तीन भार वर्ग के खिलाड़ी आगे हैं। भार वर्ग 51 किलोग्राम में मैं खुद हूं। भार वर्ग 57 किलोग्राम में रोहित मोर व भार वर्ग 92 किलोग्राम से अधिक में सागर अहलावत शामिल है। हम तीनों ने ट्रायल की मांग की है। मूल्यांकन प्रक्रिया को हटाया जाए। मेरी जगह दीपक को भेजा जा रहा है। इसे पहले भी हराता रहा हूं। एशियन गेम्स में स्वर्ण व रजत पदक प्राप्त करने वाले को ओलंपिक का कोटा हासिल कर पाएगा। ऐसा नहीं होने पर हम अपनी प्रतिभा को आगे नहीं ले जा पाएंगे। हमने बीएफआई (बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया), साई (स्पोर्ट्स एथोरिटी ऑफ इंडिया) सबसे से बात की है। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो आखिर में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मुझे खुशी होगी ट्रायल में कोई बॉक्सर मुझे हराकर आगे जाएगा तो मैं खुद उसे एयरपोर्ट तक छोड़ने जाऊंगा।
तगड़ा हमेश तगड़ा ही होता है...
उन्होंने कहा कि ट्रायल सभी का अधिकार है। विनेश और बजरंग आगे आकर खुद ट्रायल की मांग करते हैं तो यह सभी के लिए अच्छा रहेगा। तगड़ा हमेश तगड़ा ही होता है। उसे खुद को नंबर वन साबित करने के लिए बार-बार मुकाबला करना पड़े तो करना चाहिए। इससे खिलाड़ी का हौसला भी बढ़ता है।
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पंघाल ने कहा कि हम तीन भार वर्ग के खिलाड़ी आगे हैं। भार वर्ग 51 किलोग्राम में मैं खुद हूं। भार वर्ग 57 किलोग्राम में रोहित मोर व भार वर्ग 92 किलोग्राम से अधिक में सागर अहलावत शामिल है। हम तीनों ने ट्रायल की मांग की है। मूल्यांकन प्रक्रिया को हटाया जाए। मेरी जगह दीपक को भेजा जा रहा है। इसे पहले भी हराता रहा हूं। एशियन गेम्स में स्वर्ण व रजत पदक प्राप्त करने वाले को ओलंपिक का कोटा हासिल कर पाएगा। ऐसा नहीं होने पर हम अपनी प्रतिभा को आगे नहीं ले जा पाएंगे। हमने बीएफआई (बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया), साई (स्पोर्ट्स एथोरिटी ऑफ इंडिया) सबसे से बात की है। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो आखिर में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मुझे खुशी होगी ट्रायल में कोई बॉक्सर मुझे हराकर आगे जाएगा तो मैं खुद उसे एयरपोर्ट तक छोड़ने जाऊंगा।
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तगड़ा हमेश तगड़ा ही होता है...
उन्होंने कहा कि ट्रायल सभी का अधिकार है। विनेश और बजरंग आगे आकर खुद ट्रायल की मांग करते हैं तो यह सभी के लिए अच्छा रहेगा। तगड़ा हमेश तगड़ा ही होता है। उसे खुद को नंबर वन साबित करने के लिए बार-बार मुकाबला करना पड़े तो करना चाहिए। इससे खिलाड़ी का हौसला भी बढ़ता है।
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