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जाट आंदोलन मामले में बड़ा फैसला: कैप्टन अभिमन्यु के बंगले को जलाने के 56 आरोपी बरी, तीन की हो चुकी है मौत

Fri, 27 Feb 2026 06:01 PM IST
Naveen अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा Published by: Naveen Updated Fri, 27 Feb 2026 06:01 PM IST
सार

मामला फरवरी 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में हुई हिंसा से जुड़ा है, जब भीड़ ने कैप्टन अभिमन्यू की दिल्ली बाईपास स्थित कोठी पर हमला किया और उसे आग के हवाले कर दिया था।

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Major verdict in the case of burning of Captain Abhimanyu's bungalow: 56 accused acquitted, one possible relea
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

वर्ष 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में हरियाणा के तत्कालीन वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी और तोडफ़ोड़ के मामले में शुक्रवार को पंचकूला स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में 56 आरोपी को बरी कर दिया। सीबीआई कोर्ट के फैसले पर पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं।

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मामला जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा था। आरोप था कि उग्र भीड़ दिल्ली बाईपास की ओर से आकर कैप्टन अभिमन्यु के आवास पर पहुंची और हमला किया। सीबीआई के दायर आरोपपत्र के अनुसार 2016 में कैप्टन अभिमन्यु के भतीजे रोहित के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आंदोलन के दौरान हथियारों और पेट्रोल बम से लैस भीड़ ने कोठी में जबरन प्रवेश किया और परिसर में खड़े वाहनों को आग के हवाले कर दिया। घर के भीतर तोड़फोड़ और लूटपाट की। आरोप था कि घर के अंदर मौजूद लोगों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से पेट्रोल बम फेंके गए जिससे कोठी में आग फैल गई और करोड़ों की संपत्ति जल गई।
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पहले रोहतक पुलिस ने की जांच, बाद में सीबीआई को सौंपा मामला
शुरुआत में जांच रोहतक पुलिस ने की लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद 60 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो चुकी थी जबकि एक को भगोड़ा (पीओ) घोषित किया गया। शेष 56 आरोपियों पर ट्रायल चला। मामले में कुल 127 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने वाले चार न्यायिक अधिकारियों के अलावा तत्कालीन उपायुक्त, उस समय के एसपी तथा सीबीआई एसपी ने भी अदालत में गवाही दी। मामले में तेजी लाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने साप्ताहिक सुनवाई के निर्देश दिए थे और समयसीमा भी तय की जिसे बाद में बढ़ाया गया। लंबी सुनवाई के बाद शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाया। सीबीआई अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने के कारण सभी 56 आरोपी को बरी कर दिया गया।

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