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Rohtak News: दहेज उत्पीड़न केस में महेंद्रगढ़ निवासी आरोपी को राहत नहीं, रिवीजन याचिका खारिज
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रोहतक। दहेज उत्पीड़न केस में एएसजे संदीप दुग्गल की अदालत ने रिवीजन याचिका यह कहकर खारिज कर दी कि आरोप तय करते समय प्रथम दृष्टया मामला देखा जाना होता है। निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट ने बरकरार रखा है।
कोर्ट के निर्णय में बताया गया है कि महेंद्रगढ़ जिले के गांव दुलौठ निवासी सुखबीर सिंह ने अदालत में रिवीजन याचिका दायर की थी। बताया था कि निचली अदालत ने दहेज उत्पीड़न केस में आरोप तय कर दिए हैं जबकि उनका पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि केस में 10 व्यक्तियों के नाम शामिल किए गए थे। उनमें से आठ को क्लीन चिट दे दी गई। सुखबीर सिंह की भूमिका उन आठ व्यक्तियों के समान ही है। ऐसे में रिवीजन को स्वीकार कर निचली अदालत के आदेश को रद्द किया जाए।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा है कि आरोप तय करते समय केवल प्रथम दृष्टया मामला ही देखा जाना होता है। पीड़िता के लगाए गए आरोपों का संदर्भ शिकायत में और शिकायतकर्ता की ओर से बाद में दिए गए बयानों में मौजूद है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर निचली अदालत दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को निर्दोष पाता है तो बरी कर सकती है।
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कोर्ट के निर्णय में बताया गया है कि महेंद्रगढ़ जिले के गांव दुलौठ निवासी सुखबीर सिंह ने अदालत में रिवीजन याचिका दायर की थी। बताया था कि निचली अदालत ने दहेज उत्पीड़न केस में आरोप तय कर दिए हैं जबकि उनका पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
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याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि केस में 10 व्यक्तियों के नाम शामिल किए गए थे। उनमें से आठ को क्लीन चिट दे दी गई। सुखबीर सिंह की भूमिका उन आठ व्यक्तियों के समान ही है। ऐसे में रिवीजन को स्वीकार कर निचली अदालत के आदेश को रद्द किया जाए।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा है कि आरोप तय करते समय केवल प्रथम दृष्टया मामला ही देखा जाना होता है। पीड़िता के लगाए गए आरोपों का संदर्भ शिकायत में और शिकायतकर्ता की ओर से बाद में दिए गए बयानों में मौजूद है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर निचली अदालत दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को निर्दोष पाता है तो बरी कर सकती है।