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अस्थल बोहर स्थित औघड़ पीर डेरे के महंत रमेशनाथ के गुरु भाई महंत रामकुवार नाथ की कोरोना से मौत

Sat, 01 May 2021 12:49 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 01 May 2021 12:49 AM IST
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Mahant Ramkuvar Nath, the Guru's brother of Mahant Ramesh Nath of Aughd Pir Dera located in Asthal Bohar, died from Corona
अस्थल बोहर स्थित औघड़ पीर डेरे के महंत रमेशनाथ के गुरु भाई महंत रामकुवार नाथ की कोरोना से शुक्रवार सुबह निजी अस्पताल में मौत हो गई। वह चार दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। महंत रामकुवार नाथ की मौत की सूचना मिलते ही काफी संख्या में अनुयायी अस्पताल पहुंचे और बाद में रोष स्वरूप पुलिस अधीक्षक आवास का घेराव किया। जहां पर अनुयायियों ने महंत की अंतिम संस्कार विधि विधान से कराने के लिए शव की मांग की, मगर पुलिस ने बताया कि नगर निगम उसके लिए जिम्मेदार है। मौके पर पहुंचे डीएसपी गोरखपाल राणा सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने अनुयायियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अनुयायी नहीं माने और बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को 144 का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
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अनुयायियों का कहना है कि असामाजिक तत्वों द्वारा औघड़ पीर डेरे पर कब्जे करने वालों के खिलाफ बार-बार शिकायत देने के बावजूद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते महंत रामकुवार नाथ काफी तनाव में थे और इसी के चलते उनकी मौत हुई है। मिशन एकता समिति की प्रदेश अध्यक्ष कांता आलड़िया ने कहा कि डेढ़ साल से बाबा मस्तनाथ मठ में औघड़ पीर साधु संतों की समाधियों को हटाने को लेकर विवाद चल रहा है। इस बारे में कई बार औघड़ पीर डेरे के महंत रमेशनाथ व महंत रामकुवार नाथ के नेतृत्व में कई बार सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंप अवगत कराया जा चुका, लेकिन न तो मठ परिसर में औघड़ पीर साधु संतों की हटाई गई समाधियों का निर्माण हुआ और न ही समाधियों को हटाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। इस संबंध में भी पुलिस को लिखित में शिकायत दी गई।
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कांता अलाड़िया ने कहा कि एक पूर्व मंत्री के दबाव में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इन्होंने आरोप लगाया कि महंत रामकुवार नाथ की मौत के जिम्मेदार एक पूर्व मंत्री व और पुलिस ने दोषियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया तो दलित एवं पिछड़ा समाज पूरे देश में सड़कों पर उतर आएगा। इसके साथ उन्होंने महंत के शव की मांग पर अड़े रहे। पुलिस का कहना था कि वह निजी अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल प्रबंधन ने नगर निगम को सूचना दी है। तो नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह कोविड प्रोटोकाल के तहत शव का अंतिम संस्कार कराए। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं है। मौके पर महेंद्र बांगड़ी, मनजीत मोखरा, मनीषा बोहत, प्रिंस मल्होत्रा, राजपाल प्रजापति, दीपक गहलोत, आकाश सोलंकी, कबीर, संतोष देवी, पिंकी देवी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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अनुयायियों ने मृतक संत का शव विधि पूर्वक संस्कार करने के लिए मांग की थी। जिन्हें समझाया गया कि संत कोरोना संक्रमित थे। निजी अस्पताल संचालक ने इसकी सूचना उनकी मौत के तुरंत बाद नगर निगम को दी। अब उनका संस्कार निगम कोरोना प्रोटोकॉल के हिसाब से करेगा। धारा 144 की उल्लंघन करने पर अनुयायियों पर केस दर्ज किया गया है।
- गोरखपाल राणा, डीएसपी मुख्यालय
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