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महम कांडः अदालत में डेढ़ घंटे चली बहस, फैसला सुरक्षित

Fri, 22 Jan 2021 11:47 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2021 11:47 PM IST
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Maham scandal: debate lasted for one and a half hours in court, verdict secured
रोहतक। बहुचर्चित महम कांड को लेकर शुक्रवार को एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में डेढ़ घंटा दोनों पक्षों में बहस चली। अदालत ने बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अब सोमवार को अदालत तय करेगी कि 1990 में महम उप चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़े हत्या के मामले में अभय चौटाला, करनाल के पूर्व एएसपी सुरेश चंद्र, एचएयू हिसार के चीफ इंजीनियर भूपेंद्र सिंह उर्फ भूप्पी, हिसार के दौलतपुर निवासी सुरेंद्र उर्फ पप्पू व फतेहाबाद के गिल्लाखेड़ा निवासी अजीत सिंह के खिलाफ केस चलाया जाए या नहीं। मामले में दो अन्य आरोपी हरियाणा पुलिस के पूर्व डीआईजी शमशेर सिंह व भिवानी के पूर्व डीएसपी सुखदेव राज राणा की मौत हो चुकी है।
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शुक्रवार को एडीजे कोर्ट में महम कांड को लेकर बहस हुई। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि अदालत को यह बताया जाए कि 27 साल तक कोर्ट में आने के लिए क्यों इंतजार किया गया। अगर पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की तो पहले भी कोर्ट में आ सकते थे। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, केस की कई एजेंसी ने जांच की। अब तक पुलिस ने केस को बंद नहीं किया है, बल्कि अनट्रेस माना गया है। पुलिस से न्याय नहीं मिला तो अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। साथ ही याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में सीआरपीसी की धारा 291 के तहत अर्जी दाखिल कर आग्रह किया कि उसे पुलिस ने अब तक केस की जो जांच की है, उसकी रिपोर्ट दिलाई जाए। अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली, जिस पर सोमवार को ही निर्णय होगा।
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वकील बोले, हिंसा के समय नहीं थे अभय चौटाला
वहीं, अभय चौटाला के वकील ने अदालत को बताया कि दर्ज एफआईआर महम से कांग्रेस के पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी के भाई धर्मपाल के बयान पर हुई है। विधायक के भाई ने एफआईआर में बताया है कि हिंसा के समय मौके पर मदीना गांव का अजीत सिंह भी था। वकील ने अदालत को अजीत सिंह के उस समय पुलिस को दिए गए बयानों की कॉपी दी। वकील का दावा है कि अजीत सिंह ने बयान दिया था कि उसने अभय चौटाला को नहीं देेखा। एफआईआर तो प्राथमिक शिकायत है, कोई सुबूत नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
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अदालत में अहम सवाल उठाए गए हैं। खुद अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा है कि 27 साल तक अदालत में आने का इंतजार क्यों किया गया। मामले में कोई ठोस तथ्य नहीं हैं। केवल एफआईआर के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। अभय सिंह चौटाला उस समय वहां नहीं थे। जानबूझकर अब राजनीतिक कारणों के चलते याचिका दायर की गई है। अब अदालत सोमवार को मामले में निर्णय लेगी।
-एडवोकेट विनोद अहलावत, वकील अभय चौटाला
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1990 की हिंसा के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन सही तरीके से जांच नहीं हुई। अब तक केस को अनट्रेस मानकर छोड़ दिया गया। किसी जांच एजेंसी ने केस को बंद नहीं किया है। अदालत से सीआरपीसी की धारा 291 के तहत मांग की है कि उनको केस की जांच रिपोर्ट दिलवाई जाए। अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली है, जिस पर सोमवार को ही निर्णय होगा।

एडवोकेट जितेंद्र हुड्डा, वकील याचिकाकर्ता
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ये है मामला
जब ताऊ देवीलाल केंद्र में उप प्रधानमंत्री बने। प्रदेश में उनकी जगह ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बनाया गया। चौटाला ने फरवरी 1990 में महम उप चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल किया। दूसरी तरफ कभी ताऊ देवीलाल के करीबी रहे आनंद सिंह दांगी ने नामांकन दाखिल किया। उप चुनाव के दौरान हिंसा हुई। इसमें खरक गांव निवासी हरिसिंह की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन आज तक मामला अनट्रेस है। 2015 में सब इंस्पेक्टर के पद से रिटायर होने के बाद हरिसिंह के भाई रामफल ने सबसे पहले रोहतक एससी को नवंबर 2016 में शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की। जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो रामफल ने महम अदालत में मार्च 2017 में याचिका दायर कर अभय चौटाला सहित सात लोगों के खिलाफ केस चलाने की मांग की। महम अदालत ने याचिका को जून 2018 में खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट में रिवीजन पिटीशन याचिका दायर की, जिस पर शुक्रवार को बहस हुई। बहस के बाद अदालत ने सोमवार तक फैसला सुरक्षित रख लिया। अब अदालत तय करेगी कि मामले में आरोपियों के खिलाफ आगे केस चलना चाहिये या नहीं।
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