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वालंटियरों को दी जा रही स्वदेशी कोवैक्सीन की लो व हाई डोज

Thu, 30 Jul 2020 11:06 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 11:06 PM IST
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Low and high doses of indigenous covaccine being given to volunteers
कोरोना वैक्सीन की रिसर्च कर रहे देशभर के 12 मेडिकल संस्थानों में शामिल पीजीआईएमएस रोहतक अपने 64 वालंटियरों को इस रिसर्च में शामिल कर चुका है। इन वालंटियरों को वैक्सीन की लो व हाई डोज दी जा रही है। रिसर्चर पता लगाने में जुटे हैं कि किस वालंटियर पर किस वैक्सीन का कैसा असर आता है। इसी आधार पर रिपोर्ट भी तैयार होगी, जोकि कोरोना वैक्सीन का भविष्य तय करेगी कि यह कितनी कारगर साबित होगी।
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स्वदेशी कोरोना वैक्सीन की रिसर्च में शामिल पीजीआईएमएस की प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर डॉ. सविता वर्मा ने बताया कि अब वालंटियरों को मिक्स डोज दी जा रही है। इसमें हम तय कर पाएंगे कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हमें लो डोज की जरूरत होगी या हाई डोज की। यदि लो डोज में शरीर अच्छी एंटी बाडी बना लेता है तो हाई डोज देने की जरूरत नहीं होगी। यह जांच दो चरणों में पूरी होगी। यदि सब सही रहता है तो इस रिसर्च को आगे भी बढ़ाया जा सकता है कि वैक्सीन का असर कितने लंबे समय तक शरीर में रहता है। इसमें यह तय किया जाएगा कि वैक्सीन की डोज कब तक शरीर में काम करती है व आगे इसके लिए बूस्टर डोज की जरूरत है या नहीं। फिलहाल संक्रमण को देखते हुए छह माह का ह्यूमन ट्रायल चल रहा है। इसमें कामयाबी मिलने पर तय हो जाएगा कि लोगों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए यह वैक्सीन लगाई जा सकती है। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस देश में पहले फेज के पार्ट वन के तहत 50 वालंटियरों के ट्रायल में 20 वालंटियर को शमिल कर अपनी भागीदारी कर चुका है। अब 325 के ह्यूमन ट्रायल में हिस्सा ले रहा है। इसके बाद दूसरे फेज में 750 वालंटियरों को रिसर्च में शामिल किया जाएगा।
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शुरुआती वालंटियरों को रिसर्चर की दूसरी डोज आज देने की तैयारी
पीजीआईएमएस आज अपने शुरुआती वालंटियरों को दो सप्ताह बीतने के बाद दूसरी डोज देने की तैयारी में है। इन वालंटियरों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग करने के बाद इनको दूसरी डोज दे दी जाएगी। अब तक संस्थान 64 वालंटियरों को कोवैक्सीन की डोज दे कर रिसर्च में शामिल कर चुका है। इन सभी वालंटियरों का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। स्वदेशी कोवैक्सीन की रिसर्च के को इंवेस्टिगेटर डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि वीरवार देर सायं तक संस्थान 64 वालंटियरों को रिसर्च की डोज दे चुका है। हमारे पास 250 के करीब वालंटियरों का पंजीकरण हुआ है।
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पहले चरण के बचे हैं करीब 45 वालंटियर
डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि हम 64 वालंटियरों को वैक्सीन की डोज दे चुके हैं। शुक्रवार को भी दस से 12 वालंटियरों को डोज देने की तैयारी है। हमारा 75 का टारगेट है, इसे हम पूरा कर लेंगे। इसके अलावा शुक्रवार को देश भर में 40 से 45 वालंटियरों को ही डोज दी जानी है। इसमें देखना है कि कौनसा संस्थान कितने वालंटियरों को वैक्सीन की डोज दे पाएगा। बाकी वालंटियरों को हम दूसरे फेज में शामिल कर लेंगे। हमारा फेज वन पूरा होने जा रहा है। शुक्रवार को यह तय हो जाएगा कि पीजीआईएमएस रिसर्च करने वाले संसथानों में किस नंबर पर है।
कोरोना वैक्सीन की रिसर्च फिलहाल सही चल रही है। अभी तक कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया है कि जिसमें किसी का स्वास्थ्य बिगड़ा हो। तीन माह के बाद तय हो जाएगा कि रिसर्च की क्या दिशा रहेगी। हालांकि यह रिसर्च फिलहाल छह माह की है। तीन माह बाद यदि सब ठीक रहा तो वैक्सीन कंपनी लोगों के लिए वैक्सीन निर्माण करना शुरू कर सकती है। इससे अधिक इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

- डॉ. एचके अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन एवं रजिस्ट्रार, पीजीआईएमएस रोहतक
कोरोना वैक्सीन से हमें बहुत उम्मीदें हैं। इस वैक्सीन की रिसर्च में वालंटियर भी उत्साहित हैँ। यही वजह है कि संस्थान के पास खासी संख्या में वालंटियर आ गए हैं। सभी वालंटियरों का सैंपल आगे आईसीएमआर के पास भेजा जाएगा, यहां पर अन्य रिसर्च सेंटरों के वालंटियरों के सैंपल भी आएंगे। इसमें जांच के बाद एंटी बाडी के लेवल को देखा जाएगा, इसके बाद खुलासा होगा कि वैक्सीन कितनी सफल रहेगी।
- डॉ. ध्रुव चौधरी, को इंवेस्टिगेटर कोवैक्सीन रिसर्च, पीजीआईएमएस
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