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‘जीवन रेखा ट्रीटमेंट’ दे रहा काला पीलिया को मात
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 03 Jun 2015 02:46 AM IST
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सूबे के एकमात्र पीजीआई का ‘जीवन रेखा ट्रीटमेंट’ प्लान काला पीलिया को मात दे रहा है।
इसका लाभ हरियाणा वासियों के साथ पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश व दिल्ली के रोगियों को भी मिल रहा है। इलाज के लिए मंगलवार को लाला श्याम लाल बिल्डिंग के गेस्ट्रोएंट्रोलोजी विभाग में भीड़ लगी रही।
पिछले पांच वर्षों से काला पीलिया के मरीजों का उपचार कर रहा पीजीआई अब तक 20 हजार मरीजों की स्क्रीनिंग कर चुका है। इसमें से 2200 में बीमारी मिलने के बाद उनका उपचार किया गया जिसमें 1100 स्वस्थ हैं और 1100 का ही उपचार जारी है। गेस्ट्रोएंट्रोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा के अनुसार इस बीमारी में लीवर खराब हो जाता है। पीलिया, लीवर में सूजन, रक्त की कमी, उल्टी लगना, लीवर का कैंसर आदि इसके मुख्य लक्षण हैं। सबसे अधिक समस्या यह है कि इस बीमारी के लक्षण 75 फीसदी मरीजों में दिखाई ही नहीं देती। 25 फीसदी में पीलिया, जोड़ों में दर्द, थकान व रक्त की कमी की शिकायत आती है। इसे जागरूकता व जांच के दौरान ही पकड़ा जाता है। इसके लिए पीजीआई में आने वाली गर्भवती महिलाओं व ऑपरेशन वाले मरीजों की जांच की जाती है। जांच के बाद इलाज के लिए करीब एक करोड़ रुपये की कीमत की दवा का प्रयोग प्रति माह पीजीआई में आने वाले मरीजों पर होता है।
रतिया से बीमारी आई सामने
पीजीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार रतिया क्षेत्र में चार साल पहले इस बीमारी से काफी तादाद में लोगों की मौतें हुईं थीं इसके तहत पाइलट प्रोजेक्ट जींद, कैथल व फतेहाबाद में चलाया गया। बाद में असंध, पानीपत, समालखा व नरवाना तक उपचार का दायरा बढ़ाया गया। मरीजों की संख्या देखते हुए एक साल पहले पूरे सूबे में यह प्रोजेक्ट लागू कर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार 30 से 40 साल पहले यह बीमारी हरियाणा में आई है।
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पंजाब के साथ लगते जिलों में अधिक समस्या
पंजाब में युवाओं द्वारा नशे का अधिक प्रयोग करने के चलते यह बीमारी वहां अधिक है। इसका असर है कि पंजाब की सीमा से साथ लगते हरियाणा में भी इसका असर है।
उपचार की व्यवस्था
एससी व बीपीएल : नि:शुल्क (केवल हरियाणा के लिए)
सामान्य वर्ग : करीब 80 हजार रुपये (सभी मरीजों के लिए)
नोट : बाहर करीब दो लाख रुपये में उपलब्ध होता है उपचार।
पीजीआई में मरीजों को राहत
- पहले 24 से 48 सप्ताह खानी पड़ती थी दवा व लगता था इंजेक्शन, अब महज 12 सप्ताह का लेना होता है उपचार व इंजेक्शन
- दवा के साथ जांच किट होती है नि:शुल्क
- कोई वेटिंग लिस्ट नहीं (24 घंटे, सातों दिन)
बीमारी फैलने के कारण
- 60 फीसदी झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा ग्लूकोज, ताकत के टीके व एक सूई का बार-बार प्रयोग करने से
- 30 फीसदी करीब टैटू बनवाने से
- 6 फीसदी जैंटस व लेडिज पार्लर से
- 4 फीसदी यौन क्रिया से
- सबसे प्रभावित वर्ग 30 से 40 वर्ष के युवा (महिलाएं 60 : पुरुष 40 प्रतिशत)
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इसका लाभ हरियाणा वासियों के साथ पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश व दिल्ली के रोगियों को भी मिल रहा है। इलाज के लिए मंगलवार को लाला श्याम लाल बिल्डिंग के गेस्ट्रोएंट्रोलोजी विभाग में भीड़ लगी रही।
पिछले पांच वर्षों से काला पीलिया के मरीजों का उपचार कर रहा पीजीआई अब तक 20 हजार मरीजों की स्क्रीनिंग कर चुका है। इसमें से 2200 में बीमारी मिलने के बाद उनका उपचार किया गया जिसमें 1100 स्वस्थ हैं और 1100 का ही उपचार जारी है। गेस्ट्रोएंट्रोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा के अनुसार इस बीमारी में लीवर खराब हो जाता है। पीलिया, लीवर में सूजन, रक्त की कमी, उल्टी लगना, लीवर का कैंसर आदि इसके मुख्य लक्षण हैं। सबसे अधिक समस्या यह है कि इस बीमारी के लक्षण 75 फीसदी मरीजों में दिखाई ही नहीं देती। 25 फीसदी में पीलिया, जोड़ों में दर्द, थकान व रक्त की कमी की शिकायत आती है। इसे जागरूकता व जांच के दौरान ही पकड़ा जाता है। इसके लिए पीजीआई में आने वाली गर्भवती महिलाओं व ऑपरेशन वाले मरीजों की जांच की जाती है। जांच के बाद इलाज के लिए करीब एक करोड़ रुपये की कीमत की दवा का प्रयोग प्रति माह पीजीआई में आने वाले मरीजों पर होता है।
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रतिया से बीमारी आई सामने
पीजीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार रतिया क्षेत्र में चार साल पहले इस बीमारी से काफी तादाद में लोगों की मौतें हुईं थीं इसके तहत पाइलट प्रोजेक्ट जींद, कैथल व फतेहाबाद में चलाया गया। बाद में असंध, पानीपत, समालखा व नरवाना तक उपचार का दायरा बढ़ाया गया। मरीजों की संख्या देखते हुए एक साल पहले पूरे सूबे में यह प्रोजेक्ट लागू कर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार 30 से 40 साल पहले यह बीमारी हरियाणा में आई है।
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पंजाब के साथ लगते जिलों में अधिक समस्या
पंजाब में युवाओं द्वारा नशे का अधिक प्रयोग करने के चलते यह बीमारी वहां अधिक है। इसका असर है कि पंजाब की सीमा से साथ लगते हरियाणा में भी इसका असर है।
उपचार की व्यवस्था
एससी व बीपीएल : नि:शुल्क (केवल हरियाणा के लिए)
सामान्य वर्ग : करीब 80 हजार रुपये (सभी मरीजों के लिए)
नोट : बाहर करीब दो लाख रुपये में उपलब्ध होता है उपचार।
पीजीआई में मरीजों को राहत
- पहले 24 से 48 सप्ताह खानी पड़ती थी दवा व लगता था इंजेक्शन, अब महज 12 सप्ताह का लेना होता है उपचार व इंजेक्शन
- दवा के साथ जांच किट होती है नि:शुल्क
- कोई वेटिंग लिस्ट नहीं (24 घंटे, सातों दिन)
बीमारी फैलने के कारण
- 60 फीसदी झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा ग्लूकोज, ताकत के टीके व एक सूई का बार-बार प्रयोग करने से
- 30 फीसदी करीब टैटू बनवाने से
- 6 फीसदी जैंटस व लेडिज पार्लर से
- 4 फीसदी यौन क्रिया से
- सबसे प्रभावित वर्ग 30 से 40 वर्ष के युवा (महिलाएं 60 : पुरुष 40 प्रतिशत)