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Rohtak News: हरियाणा में गंगा नदी का पानी लाने के भेजा पत्र
Sun, 10 Aug 2025 12:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 10 Aug 2025 12:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। नदी बोर्ड अधिनियम 1956 की धारा 4 के तहत गंगा और यमुना जैसी नदियों के लिए नदी बोर्ड बनाकर हरियाणा में पानी लाने को लेकर पत्र भेजा गया है। परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने बताया कि इस धारा के तहत गंगा नदी का पानी दक्षिणी हरियाणा में लाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट की व्यवहारिकता की बहुत ही संभावनाएं है जिससे करोड़ों नागरिकों तथा जीवों का जीवन प्रभावित हो सकता है। यदि समय रहते हमने भूजल के संरक्षण पर विशेष जोर नहीं दिया तो भविष्य में गंभीर खाद्य समस्या, पेयजल संकट में विभिन्न आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि नदी बोर्ड अधिनियम 1956 की धारा 4 के तहत गंगा और यमुना जैसी अंतरराज्यीय नदियों के लिए नदी बोर्ड बनाने का प्रावधान था। नदी प्रवाह क्षेत्र वाले राज्यों के परामर्श से केंद्र सरकार सर्वसम्मति से इस बोर्ड का गठन कर सकती है। इस कानून के तहत गठित बोर्ड इतने शक्तिशाली होंगे कि उन्हें नदियों के प्रदूषण के लिए जल आपूर्ति के संबंध में नियम और दिशानिर्देश बनाने का अधिकार है।
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इसके अलावा, बोर्डों के पास नदियों के किनारे पौधे लगाने, नदी बेसिन के विकास की योजना बनाने और उनके कार्यान्वयन की निगरानी करने की शक्ति भी होगी। अभी तक किसी भी सरकार ने इस कानून को लागू कर नदी बोर्ड बनाने की जहमत नहीं उठाई।
अंतराज्यीय नदी जल का समुचित उपयोग, नियंत्रण एवं संरक्षण, सिंचाई, जलापूर्ति या जल निकासी योजनाओं का संचालन और संवर्धन, मृदा अपरदन नियंत्रण और पौध रोपण को बढ़ावा देना, नदी घाटियों और घाटियों के विकास की योजना बनाना शामिल है।
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रेवाड़ी। नदी बोर्ड अधिनियम 1956 की धारा 4 के तहत गंगा और यमुना जैसी नदियों के लिए नदी बोर्ड बनाकर हरियाणा में पानी लाने को लेकर पत्र भेजा गया है। परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने बताया कि इस धारा के तहत गंगा नदी का पानी दक्षिणी हरियाणा में लाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट की व्यवहारिकता की बहुत ही संभावनाएं है जिससे करोड़ों नागरिकों तथा जीवों का जीवन प्रभावित हो सकता है। यदि समय रहते हमने भूजल के संरक्षण पर विशेष जोर नहीं दिया तो भविष्य में गंभीर खाद्य समस्या, पेयजल संकट में विभिन्न आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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उन्होंने कहा कि नदी बोर्ड अधिनियम 1956 की धारा 4 के तहत गंगा और यमुना जैसी अंतरराज्यीय नदियों के लिए नदी बोर्ड बनाने का प्रावधान था। नदी प्रवाह क्षेत्र वाले राज्यों के परामर्श से केंद्र सरकार सर्वसम्मति से इस बोर्ड का गठन कर सकती है। इस कानून के तहत गठित बोर्ड इतने शक्तिशाली होंगे कि उन्हें नदियों के प्रदूषण के लिए जल आपूर्ति के संबंध में नियम और दिशानिर्देश बनाने का अधिकार है।
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इसके अलावा, बोर्डों के पास नदियों के किनारे पौधे लगाने, नदी बेसिन के विकास की योजना बनाने और उनके कार्यान्वयन की निगरानी करने की शक्ति भी होगी। अभी तक किसी भी सरकार ने इस कानून को लागू कर नदी बोर्ड बनाने की जहमत नहीं उठाई।
अंतराज्यीय नदी जल का समुचित उपयोग, नियंत्रण एवं संरक्षण, सिंचाई, जलापूर्ति या जल निकासी योजनाओं का संचालन और संवर्धन, मृदा अपरदन नियंत्रण और पौध रोपण को बढ़ावा देना, नदी घाटियों और घाटियों के विकास की योजना बनाना शामिल है।