स्मृति शेष: ‘रोहतक के अमिर खान से प्रभावित थीं लता’ सरदारी व सुलक्षणा पंडित के सीधे संपर्क में रहीं स्वर कोकिला
वैश्य कॉलेज के प्राचार्य, संगीत कोविद एवं प्रदेश के प्रथम गिटार गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. संजय गुप्ता ने लता मंगेशकर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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गायिका लता मंगेशकर का सीधा संपर्क हरियाणा के रोहतक से नहीं रहा, लेकिन वह कलानौर के शास्त्रीय गायक अमिर खान से बहुत प्रभावित थी। लता जी के समकालीन ठुमरी गायिका झज्जर की सरदारी भी उनसे जुड़ी थीं। वहीं मूलरूप से दुजाना की रहनेवाली अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित की फिल्म दो वक्त की रोटी के लिए भी लता जी ने गीत गाया था। यह बातें वैश्य कॉलेज के प्राचार्य, संगीत कोविद एवं गिटार गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. संजय गुप्ता ने स्वर कोकिला लता मंगेशकर को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कही।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि संगीत की दुनिया में लता जी को हमेशा याद रखा जाएगा। रोहतक का भी फिल्मों व संगीत की दुनिया से सीधा संपर्क रहा है। जिले में अमिर खान साहब गायक थे, वह कलानौर से थे और लता जी उनसे बहुत प्रभावित थीं। वह अपने पिता के समकक्ष उन्हें मानती थी। अमिर खान साहब की गिनती देश के महान गायकों में होती थी।
इसके साथ ही झज्जर की रहने वाली ठुमरी गायिका सरदारी भी लता जी के साथ जुड़ी रही हैं। हालांकि वह तत्कालीन झज्जर की रहने वाली थी, जोकि पहले रोहतक में ही था। इनका परिवार बहुत पहले मुंबई चला गया था। इसके अलावा दुजाना की रहने वाली अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित की फिल्म दो वक्त की रोटी के लिए लता जी ने ‘कैसी थी वे नजर’ गीत गाया था।
रविंद्र जैन ने लता जी के संस्मरण को किया था पेश
वैश्य महिला महाविद्यालय में 2008-09 में रविंद्र जैन ने लता जी के गीतों को अपनी आवाज में गाया था। रविंद्र जैन ने रामायण में अपना संगीत दिया था। उन्होंने लता जी के संस्मरण में रोहतक में लाइव शो किया और ‘सुन साहिबा सुन’ गीत गाया, जिसे आज भी याद किया जाता है। डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि अभी परीक्षा नजदीक होने के चलते वह लता जी की याद में कार्यक्रम नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन परीक्षा होते ही वह उनकी याद में जल्द कार्यक्रम करवाएंगे।