{"_id":"58b724cd4f1c1b965e832865","slug":"lab-digital-india-computer-government-school-computer-education-rohtak-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"डिजिटल इंडिया के दौर में सरकारी स्कूलों में बंद है कंप्यूटर की शिक्षा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डिजिटल इंडिया के दौर में सरकारी स्कूलों में बंद है कंप्यूटर की शिक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 02 Mar 2017 01:41 AM IST
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बेकार हो रहे सैकड़ों कंप्यूटर, सीबीएसई स्कूलों व कालेजों में अनिवार्य है कंप्यूटर शिक्षा
- फोटो : amar ujala
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एक ओर डिजिटल इंडिया मुहिम के तहत गांवों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए मोबाइल वैन चलाई जा रही है। ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर ई-कमार्स तक पर जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में 12 साल पहले शुरू की गई कंप्यूटर शिक्षा को ही बंद कर दिया है। सरकार की ओर से तीन-तीन कंपनियों से करार के बावजूद सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा सिरे नहीं चढ़ पाई। हालात यह हैं कि जिले के 162 हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में लाखों रुपये के कंप्यूटर के साथ-साथ महंगे उपकरण धूल फांक रहे हैं। शहर और गांवों के सरकारी स्कूलों में ज्यादातर लैब पर ताले लटके हैं। करीब डेढ़ साल से इन्हें संभालने वाला कोई नहीं है। केवल उन्हीं स्कूलों में कंप्यूटर लैब चल रही है, जिनमें व्यावसायिक कोर्स संचालित किये जा रहे हैं। इस तरह सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कंप्यूटर शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। जबकि सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में अनिवार्य रूप से कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है। ऐसे में डिजिटल इंडिया मुहिम को नुकसान तो हो ही रहा है, सवाल यह भी है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी निजी स्कूलों के विद्यार्थियों से कैसे मुकाबला करेंगे?
प्रदेश में करीब 12 साल पहले सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य किया गया था। इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट पास किया गया। पहले चरण में 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को अनिवार्य तौर पर कंप्यूटर की शिक्षा देनी तय की गई थी। इसके बाद छठी से 8वीं कक्षा के बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य की गई। जिन स्कूलाें में कंप्यूटर लैब थी, उनमें एक लैब असिस्टेंट और दो-दो कंप्यूटर शिक्षक रखे गए, लेकिन पिछले पांच-छह वर्षों से कंप्यूटर शिक्षा बंद है। लैब असिस्टेंट और कंप्यूटर शिक्षकों को नौकरी से हटा दिया गया है। शिक्षाविभाग के अधिकारियों को भी समझ में नहीं आ रहा है कि वे स्कूलों की लैब में धूल फांक रहे कंप्यूटर को कैसे बचाएं? यह हाल तब है जब चारों ओर डिजिटिलाजेशन का दौर चल रहा है।
धूल फांक रहे हैं सरकारी स्कूलों में रखे चार हजार कंप्यूटर्स
जिले के हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में तीन तरह की कंप्यूटर लैब बनाई गई है। इनमें रखे करीब चार हजार कंप्यूटर की संभाल रामभरोसे है। इसमें 12 राजकीय मॉडल स्कूलों में एवरोन कंप्यूटर लैब बनाई गई थी। इसके तहत प्रत्येक लैब में 25 कंप्यूटर की सुविधा दी गई। वहीं, कुछ स्कूलों मेें कोर कंप्यूटर लैब बनाई गई और 22-22 कंप्यूटर्स, सीपीयू और जनरेटर दिए गए। यही नहीं, 21 स्कूलों में एचसीएल की करोड़ों रुपये की लैब बनाई गई। प्रत्येक लैब में 10-10 कंप्यूटर दिए गए। इनमें से करीब 20 सरकारी स्कूलाें में कुछ वर्षों में कंप्यूटर्स चोरी हो गए हैं तो कुछ सरकारी कार्यालयों में शिफ्ट कर दिए गए हैं।
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सरकारी स्कूलों में दोबारा से कंप्यूटर शिक्षा शुरू करने के बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है। प्रदेश सरकार और निजी कंपनियों के बीच करार को लेकर कुछ समस्याएं चल रही हैं। शिक्षा निदेशालय से जैसे ही आदेश मिलेंगे, स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था करा देंगे।
- रोहतास वर्मा, डिप्टी डीईओ, रोहतक।
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प्रदेश में करीब 12 साल पहले सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य किया गया था। इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट पास किया गया। पहले चरण में 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को अनिवार्य तौर पर कंप्यूटर की शिक्षा देनी तय की गई थी। इसके बाद छठी से 8वीं कक्षा के बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य की गई। जिन स्कूलाें में कंप्यूटर लैब थी, उनमें एक लैब असिस्टेंट और दो-दो कंप्यूटर शिक्षक रखे गए, लेकिन पिछले पांच-छह वर्षों से कंप्यूटर शिक्षा बंद है। लैब असिस्टेंट और कंप्यूटर शिक्षकों को नौकरी से हटा दिया गया है। शिक्षाविभाग के अधिकारियों को भी समझ में नहीं आ रहा है कि वे स्कूलों की लैब में धूल फांक रहे कंप्यूटर को कैसे बचाएं? यह हाल तब है जब चारों ओर डिजिटिलाजेशन का दौर चल रहा है।
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धूल फांक रहे हैं सरकारी स्कूलों में रखे चार हजार कंप्यूटर्स
जिले के हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में तीन तरह की कंप्यूटर लैब बनाई गई है। इनमें रखे करीब चार हजार कंप्यूटर की संभाल रामभरोसे है। इसमें 12 राजकीय मॉडल स्कूलों में एवरोन कंप्यूटर लैब बनाई गई थी। इसके तहत प्रत्येक लैब में 25 कंप्यूटर की सुविधा दी गई। वहीं, कुछ स्कूलों मेें कोर कंप्यूटर लैब बनाई गई और 22-22 कंप्यूटर्स, सीपीयू और जनरेटर दिए गए। यही नहीं, 21 स्कूलों में एचसीएल की करोड़ों रुपये की लैब बनाई गई। प्रत्येक लैब में 10-10 कंप्यूटर दिए गए। इनमें से करीब 20 सरकारी स्कूलाें में कुछ वर्षों में कंप्यूटर्स चोरी हो गए हैं तो कुछ सरकारी कार्यालयों में शिफ्ट कर दिए गए हैं।
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सरकारी स्कूलों में दोबारा से कंप्यूटर शिक्षा शुरू करने के बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है। प्रदेश सरकार और निजी कंपनियों के बीच करार को लेकर कुछ समस्याएं चल रही हैं। शिक्षा निदेशालय से जैसे ही आदेश मिलेंगे, स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था करा देंगे।
- रोहतास वर्मा, डिप्टी डीईओ, रोहतक।