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कारगिल :: घर में चल रही थी जसवीर की शादी की तैयारी, युद्ध में शहीद होने का आया समाचार

Fri, 26 Jul 2024 05:43 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2024 05:43 AM IST
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Kargil: Preparations for Jasveer's marriage were going on at home, news came of his martyrdom in the war.
अजमेर गोयत
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महम (रोहतक)। 1999 में हुए कारगिल युद्ध में महम खंड के दो जवानों ने भी अपने प्राणों की आहुति दी थी। परिजनों का कहना है कि शहीद की आखिरी निशानी के रूप में सेना के जवानों ने तिरंगा दिया था। जब भी हम तिरंगा देखते हैं तो 25 साल पहले का वही दिन याद आ जाता है।

युद्ध के 25 साल बाद शहीदों को याद कर परिजनों के गले रुंध आए। कारगिल युद्ध के समय सैमाण गांव में जसवीर सिवाच के घर पर उनकी शादी की तैयारी चल रही थी, तभी उनके शहीद होने का परिजनों को सेना से समाचार मिला था। इससे परिजनों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा था। (संवाद)
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21 वर्ष की उम्र में कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे जसवीर सिवाच

सैमाण में बलबीर सिवाच व इंद्रावती के घर 15 जून 1978 को पैदा हुए जसवीर सिवाच उर्फ तेजवीर पहलवान 28 जून 1999 को कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों में दुश्मन को खदेड़ते हुए देश पर बलिदान हो गए थे। मात्र 21 वर्ष की उम्र में वह शहीद हो गए थे। उन्होंने गांव के स्कूल से ही 10वीं की परीक्षा पास की। पहलवानी के शौक व फौज में भर्ती होने की कसक ने 18 वर्ष की आयु में सेना ने उनको अपने बेड़े में शामिल कर लिया। मां इंद्रावती, पिता बलबीर सिवाच व बड़े भाई जगविंद्र ने बताया कि बलबीर की शादी के बारे में सोच ही रहे थे कि उनके शहीद होने की खबर मिली। सेना द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन विजय अपने अंतिम चरण में था। टाइगर हिल पर जमे बैठे आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में दुश्मन की तरफ से हुए हमले में जसवीर शहीद हो गए थे। कारगिल विजय दिवस पर शहीद पार्क में बनी उनकी प्रतिमा पर ग्रामीण श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
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13 जून को सीसर खास के जसवीर हुए थे शहीद, डेढ़ माह की गर्भवती थी पत्नी

महम खंड के गांव सीसर खास में 10 फरवरी 1972 में पैदा हुए जसवीर राठी 25 साल की उम्र में 13 जून 1999 को कारगिल के द्रास सेक्टर में पोलो लिंग टॉप पर शहीद हो गए थे। बहन राकेश, भाई वीरेंद्र, पिता सूरजमल, मां रामप्यारी और पत्नी सुनीता ने उन क्षणों को याद करते हुए बताया कि वे 26 अप्रैल 1990 को सेकंड राज राइफल में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उनकी शादी को चार साल ही हुए थे। शहादत के समय पत्नी सुनीता डेढ़ माह की गर्भवती थी, जिससे उनको बेटा अजय हुआ। बेटा अजय अब 25 साल का हो गया है। बताया कि 15 जून 1999 को जसवीर के ताऊ धूप सिंह से एक सैनिक ने आकर उनके शहीद होने की सूचना दी थी। 18 जून को शहीद का शव गांव सीसर खास में पहुंचा था। अब वहां पर उनकी प्रतिमा स्थापित है, जहां ग्रामीण हर साल शहीदी दिवस पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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