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Rohtak News: आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा साझा मोर्चा
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रोहतक। रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा 8 मार्च को शहर में राज्यस्तरीय सम्मेलन करके आंदोलन की रूप रेखा तैयार करेगा। राज्य मोर्चा सदस्य सरदार निशान सिंह, जयबीर घनघस व सुरेश नहरा ने बताया कि विभाग के अधिकारियों की ओर से कर्मचारियों की मांगों को जायज मानकर समय समय पर लागू करने का समझौता किया जाता रहा है। लेकिन, मांगों को धरातल पर लागू नहीं किया जा है।
इससे कर्मियों को आर्थिक व मानसिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चालक, परिचालकों व कर्मशाला के कर्मचारियों के देय अवकाश लगभग 150 कम कर दिए हैं, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा हैं। रात्रि ठहराव एक महीने में 30 से घटाकर 10 करके मनमर्जी से रात्रि ठहराव करवाए जा रहे हैं और भुगतान भी मनमर्जी से किया जा रहा है।
कर्मचारियों से जोखिम कार्य लिए जा रहा है। लेकिन, जोखिम अलाउंस नहीं दिया जा रहा है। सभी प्रकार की पूर्ण प्रक्रिया के तहत भर्ती 2016 के चालकों को न्यूनतम वेतन पर इस महंगाई में नौकरी करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्ष 2002 में भर्ती हुए चालकों को नियुक्ति तिथि से पक्का नहीं किया जा रहा है, जबकि, अनेक डिपो के चालक कोर्ट से केस जीत चुके हैं।
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बसों का मरम्मत कार्य करने के लिए वर्कशॉप में कर्मचारियों की लंबे समय से भर्ती नहीं की जा रही है। अनेक पद खाली पड़े हैं। बिना किसी जनता व कर्मचारियों की मांग के स्टेज कैरिज पॉलिसी 2016 के तहत 362 रूट पर 3658 प्राइवेट परमिट देने की योजना बनाई जा रही है।
वर्तमान में महंगी दरों पर ठेके पर ली गईं इलेक्ट्रिक बसों का ठेका रद्द करके इन इलेक्ट्रिक बसों को रोडवेज बेड़े में शामिल किया जाए, ताकि सरकार द्वारा दी जाने वाली फ्री व रियायती दरों से जनता को सुविधा मिल सके।
प्रदेश की जनसंख्या के अनुसार विभाग में सरकारी नई बसें खरीद कर बेड़े में शामिल किया जाए। 2006 के बाद भर्ती सभी कर्मचारियों पर एनपीएस के बजाय पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए।
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इससे कर्मियों को आर्थिक व मानसिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चालक, परिचालकों व कर्मशाला के कर्मचारियों के देय अवकाश लगभग 150 कम कर दिए हैं, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा हैं। रात्रि ठहराव एक महीने में 30 से घटाकर 10 करके मनमर्जी से रात्रि ठहराव करवाए जा रहे हैं और भुगतान भी मनमर्जी से किया जा रहा है।
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कर्मचारियों से जोखिम कार्य लिए जा रहा है। लेकिन, जोखिम अलाउंस नहीं दिया जा रहा है। सभी प्रकार की पूर्ण प्रक्रिया के तहत भर्ती 2016 के चालकों को न्यूनतम वेतन पर इस महंगाई में नौकरी करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्ष 2002 में भर्ती हुए चालकों को नियुक्ति तिथि से पक्का नहीं किया जा रहा है, जबकि, अनेक डिपो के चालक कोर्ट से केस जीत चुके हैं।
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बसों का मरम्मत कार्य करने के लिए वर्कशॉप में कर्मचारियों की लंबे समय से भर्ती नहीं की जा रही है। अनेक पद खाली पड़े हैं। बिना किसी जनता व कर्मचारियों की मांग के स्टेज कैरिज पॉलिसी 2016 के तहत 362 रूट पर 3658 प्राइवेट परमिट देने की योजना बनाई जा रही है।
वर्तमान में महंगी दरों पर ठेके पर ली गईं इलेक्ट्रिक बसों का ठेका रद्द करके इन इलेक्ट्रिक बसों को रोडवेज बेड़े में शामिल किया जाए, ताकि सरकार द्वारा दी जाने वाली फ्री व रियायती दरों से जनता को सुविधा मिल सके।
प्रदेश की जनसंख्या के अनुसार विभाग में सरकारी नई बसें खरीद कर बेड़े में शामिल किया जाए। 2006 के बाद भर्ती सभी कर्मचारियों पर एनपीएस के बजाय पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए।