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जाट संस्था में प्रत्याशियों को झटका, अब 31 मार्च को होगी सुनवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 22 Nov 2016 01:17 AM IST
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जाट संस्था के चुनावी मैदान में उतरे लोगों को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है। करीब चार माह बाद हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में भी चुनाव से स्टे नहीं हटा। हाईकोर्ट ने अब अगली सुनवाई के लिए 31 मार्च का समय दिया है।
बता दें कि जाट संस्था के चुनाव को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। 10 जुलाई को चुनाव का शेड्यूल निर्धारित था, लेकिन संस्था के एक आजीवन सदस्य ने चुनाव को नियमों के विरुद्ध कराने का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। हाईकोर्ट ने चुनाव पर स्टे लगा दिया था। करीब चार माह बाद सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें सभी को उम्मीद थी कि चुनाव को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। अब सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 31 मार्च का समय दे दिया। दरअसल, इस बार संस्था का चुनाव कड़ी टक्कर वाला माना जा रहा है, क्योंकि पिछली गवर्निंग बॉडी को कार्यकाल पूरा होने से चंद दिन पहले ही भंग कर दिया गया था। संस्था की कुर्सी पाने के लिए इस बार कई लोग कतार में हैं।
नहीं पेश हुए सरकार के वकील
हाईकोर्ट में याचिका का जवाब दायर कर चुनाव की मांग करने वाले चंचल नांदल का कहना है कि सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अपना पुरजोर पक्ष रखा, लेकिन सरकार के अधिवक्ता पेश नहीं होने के कारण सुनवाई के लिए अगली तारीख दे दी गई।
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बता दें कि जाट संस्था के चुनाव को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। 10 जुलाई को चुनाव का शेड्यूल निर्धारित था, लेकिन संस्था के एक आजीवन सदस्य ने चुनाव को नियमों के विरुद्ध कराने का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। हाईकोर्ट ने चुनाव पर स्टे लगा दिया था। करीब चार माह बाद सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें सभी को उम्मीद थी कि चुनाव को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। अब सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 31 मार्च का समय दे दिया। दरअसल, इस बार संस्था का चुनाव कड़ी टक्कर वाला माना जा रहा है, क्योंकि पिछली गवर्निंग बॉडी को कार्यकाल पूरा होने से चंद दिन पहले ही भंग कर दिया गया था। संस्था की कुर्सी पाने के लिए इस बार कई लोग कतार में हैं।
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नहीं पेश हुए सरकार के वकील
हाईकोर्ट में याचिका का जवाब दायर कर चुनाव की मांग करने वाले चंचल नांदल का कहना है कि सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अपना पुरजोर पक्ष रखा, लेकिन सरकार के अधिवक्ता पेश नहीं होने के कारण सुनवाई के लिए अगली तारीख दे दी गई।
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