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किसान आंदोलन को आजादी के संघर्ष से जोड़ना जरूरी

Mon, 05 Apr 2021 02:07 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 05 Apr 2021 02:07 AM IST
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It is necessary to connect the peasant movement to the struggle for independence
किसान आंदोलन को आजादी के संघर्ष से जोड़ना अब जरूरी हो गया है। क्योंकि देश में किसानों के साथ-साथ मजदूर और अन्य वर्ग भी प्रभावित हो रहे हैं। उक्त बातें सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहीं।
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मेधा पाटकर की अगुवाई में चल रही मिट्टी सत्याग्रह यात्रा रविवार रात करीब सवा नौ बजे जाट भवन पहुंची। यह यात्रा दिल्ली में संपन्न होगी। जहां सीमाओं पर चल रहे किसानों के धरनास्थल पर शहीद स्मारक बनाए जाएंगे। जिनमें देश भर की मिट्टी का प्रयोग किया जाएगा। 1857 में आजादी के लिए अनेकों कुर्बानियां देने वाले गांव खिड़वाली के शिक्षाविदों वेद प्रकाश श्योराण, शमशेर अहलावत और एसजेएच नकवी ने वहां की मिट्टी मेधा को सौंपी। वहीं, जगमति सांगवान, डॉ. सतीश मुदगिल और राजकुमार ने उन्हें रोहतक की मिट्टी भेंट की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुुए मेधा ने कहा कि मौजूदा किसान आंदोलन को आजादी के संघर्ष से जोड़ना जरूरी है। क्योंकि मजदूरों के लिए भी खतरनाक कानून बना दिए गए हैं। उन्होंने शहीद भगत सिंह पगड़ी संभाल जट्टा मुहिम का भी जिक्र किया। साथ ही कहा कि पंजाब और हरियाणा के किसानों की वजह से यह तस्वीर बनाई जा रही है कि सारे किसान ट्रैक्टर वाले हैं। जबकि, आदिवासियों समेत किसानों का बहुत बड़ा वर्ग आज भी वंचित है। यह लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं, यह पर्यावरण और राजनीति की भी लड़ाई है। इसे सामाजिक सरोकारों के साथ देखना होगा। सामाजिक कार्यकर्ता सुनील ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर जगमति सांगवान व सीटू के विनोद भी थे। गौरतलब है कि 12 मार्च से 5-6 अप्रैल 1930 तक नमक कानूनों का विरोध करते हुए साबरमती आश्रम से दांडी तक गांधी जी की अगुवाई में पदयात्रा निकली थी। अब कृषि कानूनों के खिलाफ दांडी से मिट्टी सत्याग्रह यात्रा निकाली जा रही है। जो पांच अप्रैल को दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचेगी। फिर देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई मिट्टी से वहां शहीद स्मारक बनाए जाएंगे।
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