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Rohtak News: बीमा कंपनी को 30 दिन में 9 प्रतिशत ब्याज सहित मुआवजा राशि देना का आदेश

Mon, 06 Jan 2025 01:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2025 01:08 AM IST
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Insurance company ordered to pay compensation amount with 9 percent interest in 30 days
रोहतक।
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बीमा कंपनी पॉलिसीधारक को नौ प्रतिशत ब्याज समेत मुआवजा राशि देगी। इसके अलावा पांच हजार रुपये जुर्माना व पांच हजार रुपये केस खर्च के लिए देने होंगे। इस राशि का भुगतान 30 दिन में करना होगा। ये निर्देश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादियान ने दिया। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान आंखों की रोशनी गंवाने वाले व्यक्ति की शिकायत पर सुनवाई के बाद अध्यक्ष ने यह फैसला सुनाया है।
सुखपुरा चौक निवासी सत नारायण ने 28 जनवरी 2005 को एक बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी की बीमित राशि पांच लाख रुपये थी। 28 जनवरी 2026 को पॉलिसी पूरी होनी है। पॉलिसी जारी करने से पूर्व विपक्षी पक्ष (बीमा कंपनी) के पैनल में शामिल चिकित्सकों ने शिकायतकर्ता की जांच की व शिकायतकर्ता को स्वस्थ पाया। फरवरी, 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान शिकायतकर्ता के घर व दुकान में आग लगा दी गई। आग में घिरने की वजह से वह भाग नहीं सका। इस कारण शिकायतकर्ता की आंखों में समस्या हो गई। पीजीआईएमएस से उपचार कराया, लेकिन वह अपनी दोनों आंखें खो बैठा।
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शिकायतकर्ता व उनकी पत्नी लगाते रहे कंपनी के चक्कर
शिकायतकर्ता ने बीमा दावे के लिए आवेदन किया लेकिन कंपनी ने छह मार्च 2018 को पत्र जारी कर कहा कि, दावा उनके लिए देय नहीं था। यह पत्र अवैध है और प्रतिवादी की ओर से यह कृत्य अन्यायपूर्ण है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। यह सेवा में कोताही के बराबर है। शिकायतकर्ता व उनकी पत्नी दुर्घटना और विकलांगता लाभ प्राप्त करने के लिए प्रतिवादियों के कार्यालय का चक्कर लगाते रहे लेकिन सब व्यर्थ रहा। इसलिए आयोग को शिकायत की गई। इसमें कहा गया है कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी अनुसार बीमा राशि का भुगतान नहीं किया है।
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इस मामले में आयोग ने सुनवाई करते हुए तथ्यों पर गौर किया व शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला दिया। इसके तहत बीमा कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार प्रीमियम राशि के रूप में 62592 रुपये व ऋण राशि के रूप में 72000 रुपये की कटौती करने के बाद नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित भुगतान करे। विपक्षी पक्षों को सेवा में कमी के कारण मुआवजे के रूप में 5000 व मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 5000 रुपये का भुगतान करे। निर्णय तिथि से एक महीने के भीतर आदेश का अनुपालन किया जाए।
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