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Rohtak News: उपभोक्ता को कार की मरम्मत के लिए मजबूर नहीं कर सकती बीमा कंपनी
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उपभोक्ता को कार की मरम्मत करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चार साल पहले दायर याचिका का निपटारा करते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिए हैं कि एक माह में उपभोक्ता को 1 लाख 84 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे, साथ ही 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं।
2 फरवरी 2020 को दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी कार
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, टिटौली गांव निवासी राज सिंह ने 2020 में याचिका दायर की थी कि उसने अपनी कार का 6 मार्च 2019 से पांच मार्च 2020 तक बीमा करवाया था। 2 फरवरी 2020 को कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बीमा कंपनी ने सर्वे करवाया तो 1 लाख 84 हजार 778 रुपये के नुकसान का आकलन किया। कार मालिक ने मरम्मत करवाने से इन्कार कर दिया। दूसरी तरफ एजेंसी मालिक ने कार का मरम्मत का खर्च 5 लाख 95 हजार रुपये बताया। फोरम ने दोनों पक्षों की बहस के बाद निर्णय दिया है कि उपभोक्ता को बीमा कंपनी 1 लाख 84 हजार 778 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे।
उपभोक्ता को वाहन की मरम्मत करवाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, लेकिन इस केस में शिकायतकर्ता ऐसी कोई रिपोर्ट या फोटो नहीं दे सका, जिससे साबित हो सके कि वाहन मरम्मत योग्य नहीं है। ऐसे में सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में 1 लाख 84 हजार 778 रुपये का नुकसान बताया था। उपभोक्ता को यह राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।
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- नागेंद्र सिंह कादियान, अध्यक्ष जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग।
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2 फरवरी 2020 को दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी कार
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, टिटौली गांव निवासी राज सिंह ने 2020 में याचिका दायर की थी कि उसने अपनी कार का 6 मार्च 2019 से पांच मार्च 2020 तक बीमा करवाया था। 2 फरवरी 2020 को कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बीमा कंपनी ने सर्वे करवाया तो 1 लाख 84 हजार 778 रुपये के नुकसान का आकलन किया। कार मालिक ने मरम्मत करवाने से इन्कार कर दिया। दूसरी तरफ एजेंसी मालिक ने कार का मरम्मत का खर्च 5 लाख 95 हजार रुपये बताया। फोरम ने दोनों पक्षों की बहस के बाद निर्णय दिया है कि उपभोक्ता को बीमा कंपनी 1 लाख 84 हजार 778 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे।
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उपभोक्ता को वाहन की मरम्मत करवाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, लेकिन इस केस में शिकायतकर्ता ऐसी कोई रिपोर्ट या फोटो नहीं दे सका, जिससे साबित हो सके कि वाहन मरम्मत योग्य नहीं है। ऐसे में सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में 1 लाख 84 हजार 778 रुपये का नुकसान बताया था। उपभोक्ता को यह राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।
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- नागेंद्र सिंह कादियान, अध्यक्ष जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग।