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हत्या के केस में अदालत ने किया डीएनए ब्रांच के निदेशक को तलब
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पांच साल पहले सदर थाने में दर्ज हत्या के मामले का अब तक फैसला नहीं हो सका है। डीएनए रिपोर्ट न मिलने के कारण एएसजे राकेश सिंह की अदालत ने एफएसएल लैब की डीएनए ब्रांच के निदेशक को अदालत में रिपोर्ट सहित 20 सितंबर को तलब किया है। इसके लिए सदर थाना प्रभारी के माध्यम से समन भेजे गए हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक रिठाल गांव निवासी राजेंद्र सिंह ने 2016 में सदर थाने में केस दर्ज कराया था कि उसका भाई जगदीश लाढ़ौत रोड स्थित क्रशर प्लांट में काम करता था। माल ढुलाई के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली लगा रखा था। घर पर सुबह प्लांट के लिए कहकर गया था, लेकिन देर रात तक नहीं लौटा। पूछताछ करने पर पता चला कि जगदीश एक महिला के घर चला गया। बाद में जगदीश का शव मिला था। पुलिस ने पहले अपहरण व फिर हत्या का केस दर्ज किया गया था। मामले में दो महिलाओं सहित चार के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। केस की जांच पड़ताल चल रही थी। इसी बीच सरकारी वकील ने अदालत में याचिका दायर की थी कि जो शव बरामद हुआ है, वह रिठाल निवासी जगदीश का है। यह पता करने के लिए शिकायतकर्ता का डीएनए टेस्ट करवाया जाए। मामले में मृतक के भाई के सैंपल लेकर लैब में भेजे गए, जिसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
हाईकोर्ट ने तय की केस की समय सीमा
हाईकोर्ट की तरफ से 25 अगस्त को आदेश दिए गए हैं कि जिला अदालत केस का निपटारा 45 दिन के अंदर करे। ऐसे में छह सितंबर को एएसजे राकेश सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट ने 14 सितंबर को डीएनए रिपोर्ट मांगी, लेकिन एफएसएल लैब की डीएनए ब्रांच के अधिकारी रिपोर्ट सहित कोर्ट में पेश नहीं हुए। ऐसे में 16 सितंबर को अदालत में फिर सुनवाई हुई, जहां सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह पेश हुए। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी कि 20 सितंबर तक कोर्ट में डीएनए रिपोर्ट दी जाए। आदेशों का पालन करवाने की जिम्मेदारी सदर थाना प्रभारी को दी गई है।
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कोर्ट की तरफ से जारी समन की गंभीरता से पालना की जा रही है। इसके लिए एफएसएल लैब की डीएनए ब्रांच को अदालत के आदेश भेज दिए गए हैं।
- इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, थाना प्रभारी, सदर
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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक रिठाल गांव निवासी राजेंद्र सिंह ने 2016 में सदर थाने में केस दर्ज कराया था कि उसका भाई जगदीश लाढ़ौत रोड स्थित क्रशर प्लांट में काम करता था। माल ढुलाई के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली लगा रखा था। घर पर सुबह प्लांट के लिए कहकर गया था, लेकिन देर रात तक नहीं लौटा। पूछताछ करने पर पता चला कि जगदीश एक महिला के घर चला गया। बाद में जगदीश का शव मिला था। पुलिस ने पहले अपहरण व फिर हत्या का केस दर्ज किया गया था। मामले में दो महिलाओं सहित चार के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। केस की जांच पड़ताल चल रही थी। इसी बीच सरकारी वकील ने अदालत में याचिका दायर की थी कि जो शव बरामद हुआ है, वह रिठाल निवासी जगदीश का है। यह पता करने के लिए शिकायतकर्ता का डीएनए टेस्ट करवाया जाए। मामले में मृतक के भाई के सैंपल लेकर लैब में भेजे गए, जिसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
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हाईकोर्ट ने तय की केस की समय सीमा
हाईकोर्ट की तरफ से 25 अगस्त को आदेश दिए गए हैं कि जिला अदालत केस का निपटारा 45 दिन के अंदर करे। ऐसे में छह सितंबर को एएसजे राकेश सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट ने 14 सितंबर को डीएनए रिपोर्ट मांगी, लेकिन एफएसएल लैब की डीएनए ब्रांच के अधिकारी रिपोर्ट सहित कोर्ट में पेश नहीं हुए। ऐसे में 16 सितंबर को अदालत में फिर सुनवाई हुई, जहां सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह पेश हुए। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी कि 20 सितंबर तक कोर्ट में डीएनए रिपोर्ट दी जाए। आदेशों का पालन करवाने की जिम्मेदारी सदर थाना प्रभारी को दी गई है।
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कोर्ट की तरफ से जारी समन की गंभीरता से पालना की जा रही है। इसके लिए एफएसएल लैब की डीएनए ब्रांच को अदालत के आदेश भेज दिए गए हैं।
- इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, थाना प्रभारी, सदर