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सेना भर्ती के नियमों में बदलाव हो सकता है, तैयारी कर रहे हैं तो खबर जरूर पढ़ें और रहें सावधान
Fri, 21 Feb 2020 03:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक(हरियाणा)
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Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2020 03:04 PM IST
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भारतीय सेना में जवानों की भर्ती प्रक्रिया बदल सकती है। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो उम्मीदवार पहले लिखित परीक्षा देंगे। इसके बाद पास उम्मीदवारों का ही शारीरिक परीक्षण लिया जाएगा। यह मामला केंद्र सरकार और सेना के आला अधिकारियों के बीच विचाराधीन है।
सेना भर्ती के एक अधिकारी ने बताया कि उम्मीदवारों की शारीरिक परीक्षा सेना भर्ती का अहम हिस्सा है। इसमें काफी समय और ऊर्जा लगती है। भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की भीड़ का फिलहाल पहले शारीरिक परीक्षण होता है। इसमें दौड़, लंबी कूद, कद, सीना मापने सरीखी कठिन व अनिवार्य प्रक्रियाओं से उम्मीदवारों को दौड़ना पड़ता है। इसके बाद उन्हें लिखित परीक्षा में बैठने का मौका मिलता है।
शारीरिक परीक्षा से तीन से चार हजार उम्मीदवार होते हैं, जबकि लिखित परीक्षा में यह आंकड़ा सैकड़े तक सिमट कर रह जाता है। इस लिखित परीक्षा में भी ज्यादातर उम्मीदवार रह जाते हैं। ऐसे में यदि पहले लिखित परीक्षा हो जाए तो शारीरिक मापदंड को लेकर अधिक ऊर्जा व समय नहीं लगाना होगा। लिखित परीक्षा में पास उम्मीदवार को ही शारीरिक परीक्षा देनी होगी। सभी को दौड़ना नहीं पड़ेगा।
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सेना भर्ती के एक अधिकारी ने बताया कि उम्मीदवारों की शारीरिक परीक्षा सेना भर्ती का अहम हिस्सा है। इसमें काफी समय और ऊर्जा लगती है। भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की भीड़ का फिलहाल पहले शारीरिक परीक्षण होता है। इसमें दौड़, लंबी कूद, कद, सीना मापने सरीखी कठिन व अनिवार्य प्रक्रियाओं से उम्मीदवारों को दौड़ना पड़ता है। इसके बाद उन्हें लिखित परीक्षा में बैठने का मौका मिलता है।
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शारीरिक परीक्षा से तीन से चार हजार उम्मीदवार होते हैं, जबकि लिखित परीक्षा में यह आंकड़ा सैकड़े तक सिमट कर रह जाता है। इस लिखित परीक्षा में भी ज्यादातर उम्मीदवार रह जाते हैं। ऐसे में यदि पहले लिखित परीक्षा हो जाए तो शारीरिक मापदंड को लेकर अधिक ऊर्जा व समय नहीं लगाना होगा। लिखित परीक्षा में पास उम्मीदवार को ही शारीरिक परीक्षा देनी होगी। सभी को दौड़ना नहीं पड़ेगा।
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परीक्षा के लिए पड़ेगी लैब की जरूरत
सेना भर्ती के लिए पहले लिखित परीक्षा की तैयारी है। इसे शुरू करने से पहले परीक्षा को लेकर व्यवस्था बनाने पर काम किया जा रहा है। इसके तहत एक बड़ी लैब की जरूरत होगी। लैब में सैकड़ों विद्यार्थी एक साथ परीक्षा दे सकें, इसकी व्यवस्था होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया में बदलाव संभव है।
प्रदेश की आबादी तय करती है सीटें
सेना भर्ती में कितने जवान किस राज्य से लिए जाएंगे, यह मुख्यालय तय करता है। इसके लिए जनसंख्या को आधार बनाया जाता है। प्रदेश की जनसंख्या का दस प्रतिशत भर्ती लायक आबादी मानी जाती है। इसी आधार पर प्रदेश की सीटें जारी होती हैं। इन पर भर्ती नियमों के तहत उम्मीदवारों का परीक्षण होता है।
आदेश के आधार पर होगी भर्ती
मुख्यालय से सेना भर्ती की जिम्मेदारी मिलती है। वहां से मिलने वाले निर्देशों व नियमों के तहत भर्ती की जाती है। फिलहाल शारीरिक परीक्षा के बाद लिखित परीक्षा होती है। भविष्य में इसमें बदलाव होता है तो उसी हिसाब से भर्ती प्रक्रिया की जाएगी। इस बारे में सरकार व उच्च अधिकारियों को फैसला लेना है। हमें जैसे निर्देश मिलेंगे, उसकी पालना की जाएगी।
- कर्नल रतनदीप खान, निदेशक, सेना भर्ती कार्यालय
प्रदेश की आबादी तय करती है सीटें
सेना भर्ती में कितने जवान किस राज्य से लिए जाएंगे, यह मुख्यालय तय करता है। इसके लिए जनसंख्या को आधार बनाया जाता है। प्रदेश की जनसंख्या का दस प्रतिशत भर्ती लायक आबादी मानी जाती है। इसी आधार पर प्रदेश की सीटें जारी होती हैं। इन पर भर्ती नियमों के तहत उम्मीदवारों का परीक्षण होता है।
आदेश के आधार पर होगी भर्ती
मुख्यालय से सेना भर्ती की जिम्मेदारी मिलती है। वहां से मिलने वाले निर्देशों व नियमों के तहत भर्ती की जाती है। फिलहाल शारीरिक परीक्षा के बाद लिखित परीक्षा होती है। भविष्य में इसमें बदलाव होता है तो उसी हिसाब से भर्ती प्रक्रिया की जाएगी। इस बारे में सरकार व उच्च अधिकारियों को फैसला लेना है। हमें जैसे निर्देश मिलेंगे, उसकी पालना की जाएगी।
- कर्नल रतनदीप खान, निदेशक, सेना भर्ती कार्यालय