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दोबारा डेंगू हुआ तो संभलना होगा मुश्किल

Mon, 15 Nov 2021 01:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 01:06 AM IST
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If there is a dengue again then it will be difficult
डॉ. रमेश वर्मा।
डेंगू के चार स्ट्रेन हैं, एक से ग्रस्त होने के बाद मरीज को यदि दूसरा स्ट्रेन होता है तो उसके लिए संभलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे मरीज की जान तक जोखिम में आ जाती है। इसलिए जरूरी है कि डेंगू से बचें, यदि मरीज इसका शिकार हो जाता है तो दोबारा संक्रमित होने से बचे। क्योंकि मरीज को एक के बाद एक चार अलग-अलग डेंगू के स्ट्रेन हो सकते हैं।
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डेंगू का प्रकोप लगातार जिले में बढ़ रहा है, ऐसे में बचाव जरूरी है। चार स्ट्रेन मरीज को अलग-अलग प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि डेंगू का कोई भी स्ट्रेन यदि मरीज को हो जाता है तो वह उपचार के बाद ठीक हो जाता है। मरीज में उस स्ट्रेन से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता आ जाती है। ऐसे में उस मरीज को यदि डेंगू का दूसरा कोई भी स्ट्रेन अलग से होता है तो उसके लिए मुसीबत खड़ी हो जाती है। क्योंकि मरीज का शरीर नए स्ट्रेन को झेलने के लिए तैयार नहीं होता, ऐसे में स्वास्थ्य समस्या बढ़ जाती है। यही वजह है कि डेंगू से बचना बहुत जरूरी है और यदि कोई संक्रमित हो जाता है तो दूसरे स्ट्रेन की चपेट में आने से बचना अधिक जरूरी हो जाता है।
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डेंगू की वैक्सीन नहीं है, अभी चल रहा है ट्रायल
पीजीआईएमएस में कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. रमेश वर्मा बताते हैं कि डेंगू के चार स्ट्रेन हैं। अभी इससे बचने के लिए वैक्सीन नहीं है। इसके लिए ट्रायल चल रहा है। जरूरी है कि डेंगू के संक्रमण से बचा जाए, इसके लिए अपने आसपास सफाई का ध्यान रखना होता है। इसमें ब्रेन हैमरेज तक होने की संभावना बढ़ जाती है।
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डेढ़ लाख से साढे़ चार लाख होती है प्लेटलेट्स
एक सामान्य व्यक्ति में डेढ़ लाख से साढे़ चार लाख प्लेटलेट्स होती हैं। डेंगू होने पर मरीज की प्लेटलेट्स गिरने लगती है। 50 हजार प्लेटलेट्स जाने पर मरीज को अलर्ट हो जाना होता है। उसे किसी प्रकार की चोट नहीं लगनी चाहिए। यदि उसे चोट लगती है तो रक्तस्राव हो सकता है। इसके साथ ही यदि प्लेटलेट्स 20 हजार या नीचे जाती है तो शरीर में कहीं पर अपने आप रक्तस्राव हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि 10 हजार प्लेटलेट्स आने पर मरीज को अतिरिक्त प्लेटलेट्स दिया जाना जरूरी हो जाता है। क्योंकि मरीज को दिमाग में भी रक्तस्राव हो सकता है।

600 रुपये लीटर तक बिक रहा बकरी का दूध
डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ प्लेटलेट्स की संख्या भी बढ़ रही है। शहर के आसपास गांवों में बकरी पालकों से मरीजों के परिजन दूध लेने पहुंच रहे हैं। आमजन में भ्रांति है कि बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स बढ़ जाते हैं। बकरी का दूध की मांग बढ़ने से इसकी कीमत 600 रुपये लीटर तक हो गई है। जबकि हेल्थ विशेषज्ञ बताते हैं कि बकरी का दूध तरल पदार्थ के रूप में लेना तो ठीक है, लेकिन यह प्लेटलेट्स बढ़ाती हैं ऐसा कोई शोध नहीं है।
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