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पुरानी रसीद नहीं तो भरना होगा दोबारा विकास शुल्क, 1995 के बाद का पूरा रिकॉर्ड अपडेट नहीं

Fri, 05 Mar 2021 01:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 01:10 AM IST
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If not the old receipt, then the development fee will have to be repaid, the entire record after 1995 is not updated.
नगर निगम कार्यालय में काउंटर पर पूछताछ करते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
अगर आपके पास 1995 से पहले जमा कराए गए विकास शुल्क की रसीद या दूसरे सुबूत नहीं है तो निगम आपसे 120 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क लेगा। क्योंकि सूत्रों का कहना है कि निगम के पास भी पुराना अपडेट रिकॉर्ड नहीं है। इसके अलावा निगम 2013 में वैध हुई कॉलोनियों में विकास शुल्क की दर 360 रुपये प्रति वर्ग मीटर वसूल रहा है। जबकि 2018 में वैध हुई कॉलोनियों में निगम 360 रुपये प्रति वर्ग मीटर या एरिया के कलेक्टर रेट के 5 प्रतिशत में जो ज्यादा वह राशि ले रहा है।
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22 जुलाई 2020 को प्रदेश सरकार ने अचानक पूरे प्रदेश में रजिस्ट्री पंजीकरण पर रोक लगा दी थी, जिसे 17 अगस्त को खोला गया। इसके लिए मुख्यालय से नया सॉफ्टवेयर लागू किया गया। इसमें प्रावधान किया गया कि शहरी एरिया में नगर निगम की एनओसी के बगैर किसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्री के लिए पंजीकरण नहीं होगा। इससे नगर निगम ने प्रॉपर्टी से संबंधित प्रॉपर्टी टैक्स के साथ बकाया विकास शुल्क लेना भी शुरू कर दिया। नगर निगम प्रदेश सरकार की ओर से समय-समय पर जारी विकास शुल्क के आधार पर विकास शुल्क आम लोगों से वसूल कर रहा है।
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2004 से पहले का विकास शुल्क 120 रुपये प्रति वर्ग मीटर ले रहा निगम
रोहतक शहर 139 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसमें वर्तमान में पौने 6 लाख के करीब जनसंख्या निवासी करते हैं। इसमें पुराने शहर में 40 प्रतिशत के करीब जनसंख्या है। यह एरिया बिना प्लानिंग के बसा हुआ है, जहां तंग गलियां भी हैं। कई गलियों में तो स्कूटी तक को निकालना मुश्किल होता है। नियमों के तहत बिल्डिंग अगर 2004 से पुरानी है तो निगम उस बिल्डिंग का 120 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से विकास शुल्क तय कर रहा है। जबकि 2004 के बाद 2013 व 2018 में विकास शुल्क की दर सरकार की ओर से अपडेट की गई हैं।
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पूरी प्रक्रिया से फाइल गुजरने के बाद तय होता है विकास शुल्क
नगर निगम में एक पूरी प्रक्रिया के तहत गुजरने के बाद विकास शुल्क तय होता है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले फाइल टैक्स ब्रांच में जाती है। वहां से फाइल ऑनलाइन बिल्डिंग ब्रांच में आती है। बिल्डिंग ब्रांच ने ऑनलाइन हर एरिया का विकास शुल्क तय दर के आधार पर तय किया हुआ है। अगर बिल्डिंग 2004 से पहले की है तो 120 रुपये प्रति वर्ग मीटर विकास शुल्क लगेगा।
2013 में पास हुई कॉलोनियों में लगेगा 360 रुपये प्रति वर्ग मीटर विकास शुल्क
प्रदेश सरकार ने 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले 2013 में शहर की 34 कॉलोनियों को वैध किया था, जिसमें इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, हरकी देवी कॉलोनी, ऋषि नगर लाढ़ौत रोड, शास्त्री नगर, बंसत विहार, सूर्या नगर पुराना रोड, प्रवेश नगर गोहाना अड्डा, राजीव नगर व कच्चा चमारिया रोड, शिव कॉलोनी व जींद रेलवे फाटक, सूर्या नगर, आईडीसी एरिया, कुताना बस्ती, शेर विहार कॉलोनी, सुनारिया रोड स्थित रामनगर, कुंज विहार, गोकुल कॉलोनी, अजीत कॉलोनी, अमृत कॉलोनी, न्यू विजय नगर, शीतल नगर, आनंद नगर, तिलक नगर, सोनीपत रोड स्थित बसंत विहार एक्सटेंशन, कबीर कॉलोनी, विशाल नगर एक्सटेंशन, उत्तम विहार नियर आजादगढ़ एक्सटेंशन, नेहरू कॉलोनी एक्सटेंशन, संजय कॉलोनी नियर इंदिरा कॉलोनी एक्सटेंशन, रूप नगर नियर गौड़ कॉलेज एक्सटेंशन, न्यू जनता कॉलोनी व शुगर मिल कॉलोनी एक्सटेंशन, न्यू अग्रसेन कॉलोनी, अस्थल बोहर कॉलोनी व गढ़ी माजरा का शामिल है। उक्त कॉलोनियों में विकास शुल्क निगम 360 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से ले रहा है।
2018 में 99 कॉलोनी हुई थी वैध, विकास शुल्क 360 रुपये प्रति वर्ग मीटर या कलेक्टर रेट का 5 प्रतिशत
प्रदेश सरकार ने 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले 2018 में शहर की 99 कॉलोनियों को वैध किया था। तय हुआ था कि कॉलोनी में विकास शुल्क 360 रुपये प्रति वर्ग गज या 5 प्रतिशत क्लेक्टर रेट लिया जाएगा। इसमें विकास शुल्क की राशि जिसमें ज्यादा होगी, वहीं निगम लेगा। वैध होनी वाली कॉलोनियों में अजीत नगर एक्सटेंशन, अमृत कॉलोनी एक्सटेंशन, अस्थल बोहर एक्सटेंशन, आजादगढ़ एक्सटेंशन, बलियाना 1,2,3 बाहरी एरिया, बर्सी नगर 1,2,3,4 एक्सटेंशन, बसंत विहार एक्सटेंशन, कुताना बस्ती एक्सटेंशन 1 व 2, बोहर आउटर 4,5,6, फ्रेंड्स कॉलोनी बाहरी, गढ़ी बोहर पार्ट 2, हरकी देवी कॉलोनी एक्सटेंशन, इंद्र नगर 1, इंदर नगर 1, जसबीर कॉलोनी, कन्हेली पार्ट 1,2,3, कबीर कॉलोनी एक्सटेंशन 1,2,3, माजरा कॉलोनी 1, न्यू जनता कॉलोनी एक्सटेंशन 1,2, न्यू विजय नगर 1, न्यू अग्रसेन कॉलोनी 1,2, पंचवटी कॉलोनी, प्रवेश नगर1 व आउटर पार्ट 2, राजेंद्रा कॉलोनी 1, राजेंद्रा कॉलोनी 2, राजीव नगर 1 व 2, राजेंद्र नगर गोहाना रोड, रामनगर 1,2,3, ऋषि नगर पार्ट 1 व एक्टेंशन 2 व 3, शीतल नगर एक्सटेंशन 2व 3, शेर विहार एक्सटेंशन 1,2,3,4, शिव नगर एक्सटेंशन 1,2,3, सुनारिया कलां आउटर 1,2,3,4,5,6,7, सुनारिया खुर्द आउटर 1 व 3, सूर्या नगर एक्सटेंशन 1 व 2, ताऊ नगर एक्सटेंशन, विकाश नगर एक्सटेंशन 1 व 2, डेयरी कॉम्प्लेक्स पार्ट 1 व 2, अस्थल बोहर बाहरी 5, बोहर बाहरी 1,2,3, फ्रेंड्स कॉलोनी एक्सटेंशन 2ए व 2बी, गढ़ी बोहर पार्ट 1ए, 1बी, 1सी, 1डी व 1ई, कन्हेली 2ए, 2बी, कन्हेली 2ए, 2बी, खेड़ी साध 1ए,1बी, 1सी, 2,3,4ए, 4बी, शीतल नगर एक्सटेंशन 1ए व 1बी, सुनारिया खुर्द पार्ट 2, 2ए व 2बी शामिल रहा।
ऑनलाइन फाइल जब टैक्स ब्रांच में आती है तो उसे विकास शुल्क तय करने के लिए बिल्डिंग ब्रांच के पास भेजा जाता है। बिल्डिंग ब्रांच की ओर से विकास शुल्क तय किया जाता है।
- जगदीश चंद्र, जोनल टैक्स ऑफिसर
निगम की तरफ से पूरे शहर के वैध एरिया का विकास शुल्क तय है। इसमें 2013 से पहले विकास शुल्क की दर 120 रुपये वर्ग मीटर, 2013 में वैध हुई कॉलोनियों का विकास शुल्क 360 रुपये वर्ग मीटर है। जबकि 2018 में वैध हुई 99 कॉलोनियों में विकास शुल्क दर 360 रुपये प्रति वर्ग मीटर या एरिया के कलेक्टर रेट का 5 प्रतिशत में जो राशि अधिक बनती है, वह निगम लेता है। अगर किसी ने पहले विकास शुल्क भर रखा है तो उसे रसीद या कोई सबूत देना होगा। नहीं तो दोबारा विकास शुल्क जमा कराना पड़ेगा।
टीपी, नगर निगम
निगम के पास 1995 के बाद का रिकॉर्ड अपडेट है या नहीं, यह मेरी जानकारी में नहीं है। मामले में संबंधित ब्रांच से रिपोर्ट मांगी जाएगी। अगर किसी ने पहले विकास शुल्क जमा करवा रखा है तो उसे रसीद दिखानी ही होगी।

- प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम
वीरवार को चंडीगढ़ में गृहमंत्री एवं स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के साथ मीटिंग की। मीटिंग में पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर व पूर्व निकाय मंत्री कविता जैन के पति राजीव जैन भी मौजूद रहे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की मौजूदगी में मांग रखी गई कि पुराने शहर में 100-100 गज के मकानों का भी विकास शुल्क मांगा जा रहा है, जो नहीं लेना चाहिए। हालांकि इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हो सका।
- मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम
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