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दवा का प्रतिकूल असर दिखे तो चिकित्सकीय सलाह लें : डाॅ. ज्योति
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30सीटीके24.. पीजीआईमएस लेक्चर थियेटर वन में चिकित्सकों व विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करतीं फार
रोहतक। अगर आप किसी बीमारी की दवा का सेवन कर रहे हैं और इसके साथ ही दूसरी बीमारी के लक्षण नजर आने लगें तो समझे कुछ गड़बड़ है। तुरंत चिकित्सक से परामर्श भी लेें। इसके बाद प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (एडीआर) सेंटर के टोल फ्री नंबर 18001803024 पर भी जानकारी दे सकते हैं, ताकि इस समस्या से दूसरों को बचाया जा सके।
पीवीपीआई, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया को रोकने और प्रतिबंधित करने की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। यह बातें पीजीआईएमएस के फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डाॅ. ज्योति कौशल ने कहीं। वे सोमवार को पीजीआई में 17 से 23 सितंबर तक मनाए गए फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के समापन समारोह के दौरान लेक्चर थियेटर वन में चिकित्सकों व विद्यार्थियों को संबोधित कर रही थीं।
हर माह आ रहे एडीआर के 150 केस
डाॅ. ज्योति ने बताया कि हर माह 130 से 150 केस एडीआर के रिपोर्ट किए जा रहे हैं। यू शेयर-वी केयर के सिद्धांत पर उनके विभाग की ओर से कार्य किया जाता है। डाॅ. सविता वर्मा ने बताया कि कई बार चिकित्सक मरीज को काफी लंबे समय तक मोंटेलुकास्ट दवाई देते रहते हैं, इसके लिए एडीआर रिपोर्ट हुई है कि इससे कई मरीजों में दिमागी रूप से समस्या आ रही है।
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मोंटेलुकास्ट दवाई को जरूरी समय तक ही परामर्श करें
डाॅ. ज्योति ने चिकित्सकों से आग्रह किया कि बहुत जरूरी समय तक ही मोंटेलुकास्ट दवाई का प्रयोग करें, ताकि मरीज को इससे फायदा होने की जगह दुष्प्रभाव न झेलना पड़े।
प्रतियोगिताएं आयोजित
कार्यक्रम की आयोजन सचिव डाॅ. ज्योति खन्ना रहीं। उन्होंने बताया कि यह चौथा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह था। इसमें एमबीबीएस 2022-23 बैच के करीब 200 विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां ई-पोस्टर, निबंध लेखन और रंगोली समेत कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। साथ ही इसमें श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
डाॅ. जरनैल सिंह, डाॅ. विवेक शर्मा, डाॅ. राकेश मित्तल, डाॅ. नीति मित्तल, डाॅ. सुनील रोहिल्ला, डाॅ. रसिता, डाॅ. सविता सिंघल, डाॅ. निशा मरवाह, डाॅ. सुमिती गुप्ता व फार्माकोलॉजी विभाग के सभी एसआर और पीजी उपस्थित रहे।
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पीवीपीआई, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया को रोकने और प्रतिबंधित करने की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। यह बातें पीजीआईएमएस के फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डाॅ. ज्योति कौशल ने कहीं। वे सोमवार को पीजीआई में 17 से 23 सितंबर तक मनाए गए फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के समापन समारोह के दौरान लेक्चर थियेटर वन में चिकित्सकों व विद्यार्थियों को संबोधित कर रही थीं।
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हर माह आ रहे एडीआर के 150 केस
डाॅ. ज्योति ने बताया कि हर माह 130 से 150 केस एडीआर के रिपोर्ट किए जा रहे हैं। यू शेयर-वी केयर के सिद्धांत पर उनके विभाग की ओर से कार्य किया जाता है। डाॅ. सविता वर्मा ने बताया कि कई बार चिकित्सक मरीज को काफी लंबे समय तक मोंटेलुकास्ट दवाई देते रहते हैं, इसके लिए एडीआर रिपोर्ट हुई है कि इससे कई मरीजों में दिमागी रूप से समस्या आ रही है।
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मोंटेलुकास्ट दवाई को जरूरी समय तक ही परामर्श करें
डाॅ. ज्योति ने चिकित्सकों से आग्रह किया कि बहुत जरूरी समय तक ही मोंटेलुकास्ट दवाई का प्रयोग करें, ताकि मरीज को इससे फायदा होने की जगह दुष्प्रभाव न झेलना पड़े।
प्रतियोगिताएं आयोजित
कार्यक्रम की आयोजन सचिव डाॅ. ज्योति खन्ना रहीं। उन्होंने बताया कि यह चौथा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह था। इसमें एमबीबीएस 2022-23 बैच के करीब 200 विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां ई-पोस्टर, निबंध लेखन और रंगोली समेत कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। साथ ही इसमें श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
डाॅ. जरनैल सिंह, डाॅ. विवेक शर्मा, डाॅ. राकेश मित्तल, डाॅ. नीति मित्तल, डाॅ. सुनील रोहिल्ला, डाॅ. रसिता, डाॅ. सविता सिंघल, डाॅ. निशा मरवाह, डाॅ. सुमिती गुप्ता व फार्माकोलॉजी विभाग के सभी एसआर और पीजी उपस्थित रहे।