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आज से 18 मार्च तक लगेगा होलाष्टक, नहीं होंगे मंगल कार्य
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मनोज मिश्रा।
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17 फरवरी से फाल्गुन मास की शुरुआत हो चुकी है। इस माह रंग और उमंग के कई त्योहार व व्रत आ रहे हैं। इनमें रंगों का त्योहार होली भी है। होलिका दहन पर्व 17 मार्च व रंग होली पर्व 18 मार्च शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। परंतु होली से आठ दिन पहले 18 मार्च तक होलाष्टक रहेगा। सनातन धर्म के अनुसार, होलाष्टक के समय कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
यह जानकारी दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य मनोज मिश्रा ने दी। पंडित मनोज ने बताया कि धर्म और ज्योतिष में शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए कुछ विशेष मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं। उसी प्रकार किसी भी शुभ कार्यों के लिए कुछ अशुभ समय भी बताए गए हैं। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। होलाष्टक भी इसमें से एक है। यह होलिका दहन से आठ दिन पहले शुरू होता है। होलिका दहन से आठ दिन पहले की अवधि को ही होलाष्टक कहा जाता है।
होलाष्टक 2022 का प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2022 में होलाष्टक की अवधि का प्रारंभ 10 मार्च वीरवार को अलसुबह 02:58 बजे से होगा और ये पूर्णिमा तिथि तक यानी 18 मार्च को दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। इस कारण ही होलाष्टक की अवधि भी 10 मार्च से शुरू होगी और 18 मार्च को खत्म होगी।
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इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक मान्यताओं अनुसार, पौराणिक काल में राजा हिरण्यकश्यप ने होलाष्टक के आठ दिनों के दौरान ही अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर अपने पुत्र व भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए उन्हें कई यातनाएं दी थीं। इसके लिए हिरण्यकश्यप और उनकी बहन होलिका ने आखिरी दिन प्रह्लाद को अग्नि में जलाकर मारने के लिए एक षडयंत्र रचा, जिसमें अंत में स्वयं होलिका की मौत हुई। इसलिए इन 8 दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- होलाष्टक की अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि समेत हिंदू धर्म से जुड़े 16 संस्कार करने से बचना चाहिए।
- इस अवधि में घर, वाहन, गहने, वस्त्र, फर्नीचर आदि की खरीदारी से भी परहेज करना चाहिए।
- कोई निवेश या नया काम व व्यापार शुरू करना भी इस समय अशुभ माना गया है।
- किसी भी नवविवाहित महिला को ससुराल में पहली होली देखने से भी बचना चाहिए।
- होलाष्टक के दौरान कोई भी कानूनी कोर्ट केस दायर करने से बचें।
- इन आठ दिनों में किसी परिजन की मृत्यु हो जाए तो सह परिवार उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान करना चाहिए।
- इस अवधि में अपने पूर्वजों व इष्ट देवी-देवताओं की आराधना करें।
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यह जानकारी दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य मनोज मिश्रा ने दी। पंडित मनोज ने बताया कि धर्म और ज्योतिष में शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए कुछ विशेष मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं। उसी प्रकार किसी भी शुभ कार्यों के लिए कुछ अशुभ समय भी बताए गए हैं। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। होलाष्टक भी इसमें से एक है। यह होलिका दहन से आठ दिन पहले शुरू होता है। होलिका दहन से आठ दिन पहले की अवधि को ही होलाष्टक कहा जाता है।
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होलाष्टक 2022 का प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2022 में होलाष्टक की अवधि का प्रारंभ 10 मार्च वीरवार को अलसुबह 02:58 बजे से होगा और ये पूर्णिमा तिथि तक यानी 18 मार्च को दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। इस कारण ही होलाष्टक की अवधि भी 10 मार्च से शुरू होगी और 18 मार्च को खत्म होगी।
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इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक मान्यताओं अनुसार, पौराणिक काल में राजा हिरण्यकश्यप ने होलाष्टक के आठ दिनों के दौरान ही अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर अपने पुत्र व भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए उन्हें कई यातनाएं दी थीं। इसके लिए हिरण्यकश्यप और उनकी बहन होलिका ने आखिरी दिन प्रह्लाद को अग्नि में जलाकर मारने के लिए एक षडयंत्र रचा, जिसमें अंत में स्वयं होलिका की मौत हुई। इसलिए इन 8 दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- होलाष्टक की अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि समेत हिंदू धर्म से जुड़े 16 संस्कार करने से बचना चाहिए।
- इस अवधि में घर, वाहन, गहने, वस्त्र, फर्नीचर आदि की खरीदारी से भी परहेज करना चाहिए।
- कोई निवेश या नया काम व व्यापार शुरू करना भी इस समय अशुभ माना गया है।
- किसी भी नवविवाहित महिला को ससुराल में पहली होली देखने से भी बचना चाहिए।
- होलाष्टक के दौरान कोई भी कानूनी कोर्ट केस दायर करने से बचें।
- इन आठ दिनों में किसी परिजन की मृत्यु हो जाए तो सह परिवार उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान करना चाहिए।
- इस अवधि में अपने पूर्वजों व इष्ट देवी-देवताओं की आराधना करें।