{"_id":"61ddd8ab4d04cd6f4b05adac","slug":"hcms-doctors-are-on-mass-leave-patients-remain-upset-due-to-closure-of-opd-rohtak-news-rtk6354798184","type":"story","status":"publish","title_hn":"एचसीएमएस डॉक्टर रहे सामूहिक अवकाश पर, ओपीडी बंद होने से मरीज रहे परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एचसीएमएस डॉक्टर रहे सामूहिक अवकाश पर, ओपीडी बंद होने से मरीज रहे परेशान
विज्ञापन
ओपीडी में प्रदर्शन करते चिकित्सक। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहतक। सिविल अस्पताल में मंगलवार को मरीजों को इलाज के लिए डॉक्टर नहीं मिले। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस (एचसीएमएस) एसोसिएशन के बैनर तले चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर रहे। डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रख कर सरकार के प्रति अपना रोष प्रकट किया। ओपीडी बंद रहने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पीजीआई की ओपीडी महामारी के कारण पहले ही बंद हो चुकी है। इस कारण संस्थान के आपातकालीन विभाग पर कार्यभार साफ नजर आया। एसोसिएशन ने सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनकी 13 जनवरी की शाम तक मांगें पूरी नहीं हुई तो 14 को आपातकालीन सेवाएं भी ठप कर दी जाएगी। मंगलवार को सिविल अस्पताल परिसर में ओपीडी काउंटर, रिसेप्शन, ओपीडी परिसर, लैब सब जगह सन्नाटा छाया रहा। ओपीडी कमरों में चिकित्सकों की मेज कुर्सियां खाली पड़ी रही।
अस्पताल परिसर में पहुंचे कुछ गंभीर मरीजों को डॉक्टरों ने जांच कर उपचार दिया। इनमें छोटे बच्चे व बुजुर्ग मुख्य रहे। अस्पताल परिसर में इन बीमारों को राहत के लिए डॉक्टर ने जरूरी दवाएं देते हुए अगले दिन आने की सलाह दी। इसके अलावा अवकाश के बावजूद चिकित्सक आपातकालीन सेवाओं में जुटे रहे। इसमें आपातकालीन विभाग, पोस्टमार्टम व कोर्ट ड्यूटी मुख्य रही। चिकित्सकों ने बैठक कर अपने मुद्दों पर चर्चा के साथ अगली रणनीति पर विचार किया। अब चिकित्सकों को 13 जनवरी तक समस्याओं के समाधान का इंतजार है। इस दो दिन के अल्टीमेटम के बाद 14 जनवरी को ओपीडी के साथ आपात सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।
विज्ञापन
ये हैं एसोसिएशन की मुख्य तीन मांगें
एचसीएमएस एसोसिएशन पिछले कई वर्षों से अपनी कुछ मांगों को लेकर संघर्षरत है। इसमें पीजी पॉलिसी, स्पेशल कैडर व एसएमओ की सीधी भर्ती पर रोक मुख्य है। इन मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री अन्य पदाधिकारियों से कई दौर की बात हो चुकी है। यहां से हर बार शीघ्र उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय से निकली यह फाइल अब मुख्यमंत्री के पास विचाराधीन बताई जा रही है। यहीं से फाइल पर अंतिम फैसले की मुहर लगनी है।
तीन मुख्य मांगें लंबित
एचसीएमएस अध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार ने बताया कि प्रदेश के चिकित्सकों की अरसे से तीन मुख्य मांगें लंबित हैं। इन पर सरकार को फैसला लेना है। सामूहिक अवकाश के चलते ओपीडी सेवाएं बंद रही। लेकिन गंभीर मरीजों को इलाज दिया गया है। अब भी सरकार नहीं मानी तो 14 जनवरी को आपात सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। सरकार चिकित्सकों की आवाज दबाने के लिए एस्मा ही लगा सकती है। इससे ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। चिकित्सक आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
सीएमओ ने डाला अस्पताल में डेरा
सिविल सर्जन डॉ. जेएस पुनिया मंगलवार सुबह नौ बजे ही सिविल अस्पताल परिसर पहुंच गए। यहां वे ओपीडी के समय तक मौजूद रहे। सीएमओ की देखरेख में गंभीर मरीजों का इलाज किया गया। इसके लिए दोपहर तक कुछ कंसलटेंट व डॉक्टर ड्यूटी पर रहे।
वर्जन:
अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रही। किसी तरह की समस्या सामने नहीं आई। चिकित्सकों ने सामूहिक अवकाश किया है। कुछ चिकित्सक व कंसलटेंट अस्पताल में रहे व मरीजों का इलाज किया। सीएमओ की निगरानी में ओपीडी सुचारु रूप से चली।
- डॉ. रमेशचंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल।
कोट्स-
मुझे 21 दिसंबर को बेटा हुआ है। डिलिवरी के बाद टांके लगे थे। डॉक्टर ने मंगलवार को जांच के बुलाया था। अब डॉक्टर ही नहीं हैं। यहां उनकी हड़ताल का पता लगा है। इसलिए बगैर जांच कराए ही वापस जा रहे हैं।
- गुरिस्ता, संजय नगर।
पैर में कुछ दिन से दर्द है। इसलिए इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा। यहां आने पर पता लगा कि ओपीडी बंद है। अब कल दोबारा आना होगा। जांच रिपोर्ट देखकर ही डॉक्टर इलाज बता पाएगा।
- रोहित कुमार, नेहरू कॉलोनी।
बेटे की दाईं आंख पर सूजन है। यह रसोली की तरह नजर आ रही है। उसकी परेशानी को देख अस्पताल पहुंचे। यहां कोई नजर ही नहीं आ रहा है। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की वजह से इलाज नहीं हुआ है।
- राजू, गोहाना अड्डा।
अस्पताल में अपना पैर दिखाने आई थी। पैर में दर्द है। यहां आकर भी दर्द से राहत नहीं मिली। ओपीडी बंद है। इस कारण डॉक्टर ही नहीं मिले। अब इलाज के लिए दोबारा आना पड़ेगा। तब तक दर्द की दवा लेनी पड़ेगी।
- कमलेश, चमनपुरा।
विज्ञापन
पीजीआई की ओपीडी महामारी के कारण पहले ही बंद हो चुकी है। इस कारण संस्थान के आपातकालीन विभाग पर कार्यभार साफ नजर आया। एसोसिएशन ने सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनकी 13 जनवरी की शाम तक मांगें पूरी नहीं हुई तो 14 को आपातकालीन सेवाएं भी ठप कर दी जाएगी। मंगलवार को सिविल अस्पताल परिसर में ओपीडी काउंटर, रिसेप्शन, ओपीडी परिसर, लैब सब जगह सन्नाटा छाया रहा। ओपीडी कमरों में चिकित्सकों की मेज कुर्सियां खाली पड़ी रही।
विज्ञापन
अस्पताल परिसर में पहुंचे कुछ गंभीर मरीजों को डॉक्टरों ने जांच कर उपचार दिया। इनमें छोटे बच्चे व बुजुर्ग मुख्य रहे। अस्पताल परिसर में इन बीमारों को राहत के लिए डॉक्टर ने जरूरी दवाएं देते हुए अगले दिन आने की सलाह दी। इसके अलावा अवकाश के बावजूद चिकित्सक आपातकालीन सेवाओं में जुटे रहे। इसमें आपातकालीन विभाग, पोस्टमार्टम व कोर्ट ड्यूटी मुख्य रही। चिकित्सकों ने बैठक कर अपने मुद्दों पर चर्चा के साथ अगली रणनीति पर विचार किया। अब चिकित्सकों को 13 जनवरी तक समस्याओं के समाधान का इंतजार है। इस दो दिन के अल्टीमेटम के बाद 14 जनवरी को ओपीडी के साथ आपात सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।
विज्ञापन
ये हैं एसोसिएशन की मुख्य तीन मांगें
एचसीएमएस एसोसिएशन पिछले कई वर्षों से अपनी कुछ मांगों को लेकर संघर्षरत है। इसमें पीजी पॉलिसी, स्पेशल कैडर व एसएमओ की सीधी भर्ती पर रोक मुख्य है। इन मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री अन्य पदाधिकारियों से कई दौर की बात हो चुकी है। यहां से हर बार शीघ्र उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय से निकली यह फाइल अब मुख्यमंत्री के पास विचाराधीन बताई जा रही है। यहीं से फाइल पर अंतिम फैसले की मुहर लगनी है।
तीन मुख्य मांगें लंबित
एचसीएमएस अध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार ने बताया कि प्रदेश के चिकित्सकों की अरसे से तीन मुख्य मांगें लंबित हैं। इन पर सरकार को फैसला लेना है। सामूहिक अवकाश के चलते ओपीडी सेवाएं बंद रही। लेकिन गंभीर मरीजों को इलाज दिया गया है। अब भी सरकार नहीं मानी तो 14 जनवरी को आपात सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। सरकार चिकित्सकों की आवाज दबाने के लिए एस्मा ही लगा सकती है। इससे ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। चिकित्सक आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
सीएमओ ने डाला अस्पताल में डेरा
सिविल सर्जन डॉ. जेएस पुनिया मंगलवार सुबह नौ बजे ही सिविल अस्पताल परिसर पहुंच गए। यहां वे ओपीडी के समय तक मौजूद रहे। सीएमओ की देखरेख में गंभीर मरीजों का इलाज किया गया। इसके लिए दोपहर तक कुछ कंसलटेंट व डॉक्टर ड्यूटी पर रहे।
वर्जन:
अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रही। किसी तरह की समस्या सामने नहीं आई। चिकित्सकों ने सामूहिक अवकाश किया है। कुछ चिकित्सक व कंसलटेंट अस्पताल में रहे व मरीजों का इलाज किया। सीएमओ की निगरानी में ओपीडी सुचारु रूप से चली।
- डॉ. रमेशचंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल।
कोट्स-
मुझे 21 दिसंबर को बेटा हुआ है। डिलिवरी के बाद टांके लगे थे। डॉक्टर ने मंगलवार को जांच के बुलाया था। अब डॉक्टर ही नहीं हैं। यहां उनकी हड़ताल का पता लगा है। इसलिए बगैर जांच कराए ही वापस जा रहे हैं।
- गुरिस्ता, संजय नगर।
पैर में कुछ दिन से दर्द है। इसलिए इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा। यहां आने पर पता लगा कि ओपीडी बंद है। अब कल दोबारा आना होगा। जांच रिपोर्ट देखकर ही डॉक्टर इलाज बता पाएगा।
- रोहित कुमार, नेहरू कॉलोनी।
बेटे की दाईं आंख पर सूजन है। यह रसोली की तरह नजर आ रही है। उसकी परेशानी को देख अस्पताल पहुंचे। यहां कोई नजर ही नहीं आ रहा है। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की वजह से इलाज नहीं हुआ है।
- राजू, गोहाना अड्डा।
अस्पताल में अपना पैर दिखाने आई थी। पैर में दर्द है। यहां आकर भी दर्द से राहत नहीं मिली। ओपीडी बंद है। इस कारण डॉक्टर ही नहीं मिले। अब इलाज के लिए दोबारा आना पड़ेगा। तब तक दर्द की दवा लेनी पड़ेगी।
- कमलेश, चमनपुरा।