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कुश्ती संघ पर लगे आरोपों की तत्काल जांच कराए सरकार : हुड्डा

Tue, 25 Apr 2023 12:26 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 25 Apr 2023 12:26 AM IST
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Government should immediately investigate the allegations against wrestling association: Hooda
नई अनाज मंडी में दौरा करते पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा साथ में विधायक बीबी बतरा व अन्य । स
रोहतक। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि केंद्र सरकार को कुश्ती संघ पर लगे आरोपों की तत्काल निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। ये खिलाड़ी देश की शान हैं। उनको समर्थन देने वे मंगलवार को जंतर-मंतर पर जाएंगे। हुड्डा सोमवार को रोहतक व सांपला अनाज मंडी का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धरना दे रहे कुश्ती खिलाड़ियों ने हर बार देश के परचम को पूरी दुनिया में लहराया है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को रोड पर आकर धरने पर बैठना पड़े, यह बड़ी शर्मनाक बात है। खिलाड़ियों को न्याय मिलना चाहिए। क्योंकि उनकी मांग जायज है। ऐसे में वे खुद राजनीति से ऊपर उठकर लगातार खिलाड़ियों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री इससे पहले सांपला अनाजमंडी में पहुंचे और किसानों से बात की। करीब 10 बजे उन्होंने रोहतक अनाज मंडी का दौरा किया। साथ ही किसानों से बातचीत की। हुड्डा ने बताया कि मंडियों में गेहूं का उठान और भुगतान नहीं होने के कारण किसान, मजदूर और आढ़ती परेशान हैं। उठान नहीं होने के कारण मंडियों में गेहूं रखने के लिए जगह कम पड़ रही है। किसान मंडी के बाहर सड़कों, यहां तक कि श्मशान घाट में अपनी फसल रखने के लिए मजबूर हैं।
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25 से 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा व 500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा दे सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बेमौसम बारिश से किसानों को काफी नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार मुआवजा देना तो दूर अब तक सरकार पूरी फसल की गिरदावरी तक नहीं करवा पाई। बहुत सारे किसानों ने तो गिरदावरी के इंतजार में अपनी फसल भी काट ली। इसलिए सरकार को गिरदावरी व मुआवजा भुगतान में तेजी लानी चाहिए। किसानों के नुकसान भी भरपाई के लिए उन्हें 25000 से लेकर 50000 रुपये तक प्रति एकड़ किसानों को मुआवजा व 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना चाहिए। समय पर मंडियों से गेहूं का उठान नहीं हो रहा है। क्योंकि सरकार ने उठान के लिए समय पर ट्रांसपोर्टर्स को टेंडर ही नहीं दिया। बाद में ऐसे लोगों को टेंडर दिया गया, जिनके पास पर्याप्त गाड़ियां भी नहीं हैं। जब तक उठान नहीं होगा और गेहूं गोदाम में नहीं पहुंचेगा, तब तक किसानों को फसल का भुगतान नहीं किया जाएगा। सरकार द्वारा 72 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान करने का वादा खोखला साबित हुआ है।
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