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जगदगुरु शंकराचार्य अनंत श्रीविभूषित स्वामी विश्वदेवानंद तीर्थ महाराज बोले - 1976 में गर्भपात को कानूनी दर्जा देने का संतों ने किया विरोध तक नहीं माने, अब बेटियां बचाने के लिए कर रहे जागरूक

Mon, 05 Oct 2015 02:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Mon, 05 Oct 2015 02:23 AM IST
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govenment not lession sant agitation in 1976 on abortion act, now compainign for save the girl
आचार्यस्य बलं ज्ञानं, आज्ञ सिंहासने शितु:। ज्ञान माज्ञा युगी भूय, कालं सम्परिवर्त येत॥ अर्थात आचार्य का ज्ञान और शासक की आज्ञा मिलने से विश्व का अभ्युदय होता है, यही युग परिवर्तन की युक्ति भी है। लेकिन आज समाज में संस्कारों का पतन हो रहा है, गुरु के ज्ञान पर अमल नहीं होता और शासक अपने निर्णय थोपते हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में यह विचार गुजरात के श्रीमातृगया सिद्धपुर पाटन से आए श्रीमद् जगदगुरु शंकराचार्य अनंत श्रीविभूषित स्वामी विश्वदेवानंद तीर्थ महाराज कपिल सिद्ध ने कही। वे रविवार सायं बाबा बालक पुरी डेरे में पहुंचे थे।
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उन्होंने कहा कि बेटा और बेटी समान हैं। वर्ष 1976 में सरकार ने गर्भपात को कानूनी दर्जा दिया। इसका हमने विरोध भी किया, लेकिन इसे स्वीकृति दे दी गई।

अब सरकार लोगों को अस्थिरता होने पर जागरूक कर रही है। गर्भ में हत्या साधारण जीव की नहीं होती, वह ऋषि की हत्या होती है। पेट में पल रहे गर्भ को अपने कई जन्मों का ज्ञान होता है और संत को महज तीन जन्म का ज्ञान होता है। आज सरकार और समाज चाहे तो इस समस्या से निपट सकता है। हम जो पिछले दशकों में पथ भ्रष्ट हुए इसकी सजा अभी भुगत रहे हैं, यदि स्थिति नहीं बदली तो आगे भी सजा भुगतनी पडे़गी।
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आपरेशन थियेटर की सफाई लेकिन रसोईघर में जूते पहन करते हैं भोजन
उन्होंने कहा कि गायत्री, गंगा, गीता, नारी, गौ माता, गोविंद का परित्याग कर समाज क्लब की ओर जा रहा है। इससे विनाश का द्वार खुल रहा है। वर्तमान का समाज आपरेशन थियेटर में सफाई रखता है और रसोईघर में जूते चप्पल पहन कर भोजन करता है। दूध दही का भोजन करने वाले देश में मांस भक्षण हो रहा है, नारी की दुर्दशा हो रही है।
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खाना बनाते बहुएं जलती हैं, कभी बेटियां नहीं
नारी के शरीर को नंगा कर हम सभ्य होने की बात करते हैं, लेकिन यह पतन का मार्ग है। हमें समाज को जगाना होगा। क्योंकि घर में खाना बनाते समय बहू ही जलती है, कभी सास और बेटी नहीं जलती। बेटियों को शिक्षित कर उन्हें योग्य बनाना होगा।



कलश शोभा यात्रा सुबह सात बजे
महंत कर्णपुरी की अध्यक्षता में डेरे से कलश यात्रा सुबह सात बजे निकाली जाएगी। यह लेबर चौक, डीएलएफ कॉलोनी, आर्य नगर, झज्जर रोड, रेलवे रोड, भिवानी स्टैंड, पुराना बस स्टैंड से खुशबू गार्डन पहुंचेगी। यहां सुबह नौ बजे से दो बजे तक रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। कार्यक्रम में 108 महिलाएं कलश लेकर चलेंगी और 108 ब्राह्मण भी हिस्सा लेंगे। कलश यात्रा के दौरान सभी गुरुजन रथों पर सवार होंगे।
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