रोहतक। विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति वरदान है। खासकर, जरूरतमंद विद्यार्थी के लिए यह संजीवनी सरीखी है। कक्षा आठवीं में 81 प्रतिशत अंक आने पर मुझे भी बोर्ड से छात्रवृत्ति मिली थी। इसका दो साल तक लाभ मिला। विद्यार्थियों को इस तरह के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। यह कहना है जिला शिक्षा अधिकारी मनजीत मलिक का। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने अपनी मेधावी छात्रवृत्ति की जानकारी साझा की।
मूलरूप से सोनीपत हाल जसबीर काॅलोनी निवासी डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) मनजीत मलिक ने कहा कि उनके पिता रिछपाल सिंह पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग में थे। यहां से एसडीओ सेवानिवृत्त हुए। हमें पिता के तबादले के बाद उनके साथ ही रहने का अवसर मिला। इस कारण पढ़ाई अलग-अलग जगहों पर हुई। अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर किया है। वर्ष 1986 में दसवीं की पढ़ाई पूरी की। आठवीं कक्षा में 81 प्रतिशत अंक आने पर मेधावी छात्रवृत्ति की हकदार बनी। बोर्ड से दो साल तक यह छात्रवृत्ति मिलती रही। कक्षा 10वीं में दस्तावेज समय पर जमा नहीं होने के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रहना पड़ा। छात्रवृत्ति विद्यार्थी के लिए आर्थिक मदद ही नहीं, प्रोत्साहन भी है। इससे जहां जरूरतमंद विद्यार्थियों को पढ़ाई सुचारु रखने में मदद मिलती है, वहीं दूसरे विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। सरकार ऐसी अनेक तरह की छात्रवृत्ति दे रही है। विद्यार्थियों को इनका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि एचपीएसई पास कर प्राचार्य बनीं। प्राचार्य से पदोन्न्त होकर जिला शिक्षा अधिकारी बनीं। अब सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा व शैक्षणिक माहौल देने के लिए प्रयासरत हूं। इसके लिए कार्यालय में अतिरिक्त समय भी दे रही हूं।