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Ghevar Sweet on Rakhi: हरियाणा में घेवर बढ़ा देता है त्योहार की मिठास, बहनें कराती हैं भाइयों का मुंह मीठा

Tue, 29 Aug 2023 06:13 PM IST
भूपेंद्र सिंह संजय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
संजय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 29 Aug 2023 06:13 PM IST
सार

रक्षाबंधन पर भाइयों का मुंह मीठा करवाने के लिए व कोथली में दिया जाने वाला घेवर अब शुगर फ्री ही नहीं बल्कि देशी खांड में भी तैयार किए जा रहा है। जिसकी मांग प्रदेश व देश में ही नहीं विदेश तक भी है। प्रदेश में अधिकतर स्थानों पर रक्षाबंधन पर भाइयों का मुंह मीठा कराने के लिए बहनें घेवर खिलातीं हैं।

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Ghevar Sweet: Sisters sweeten their brothers with Ghevar on Raksha Bandhan
रोहतक में घेवर बनाते कारीगर - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार बहन-बेटियों को दी जाने वाली कोथली व रक्षाबंधन पर प्रमुख मिठाई घेवर आधुनिकता के युग में भी अपनी जगह बनाए हैं। हरियाणा के अनेक शहरों में घेवर काफी प्रसिद्ध है। प्रदेशभर में रक्षाबंधन पर बहनें राखी बांधने के साथ ही भाई का घेवर से मुंह मीठा करातीं हैं। यह रक्षाबंधन त्योहार के मिठास को और बढ़ा देता है। समय के साथ इसकी गुणवत्ता और स्वाद को और भी बेहतर बनाया जा रहा है। लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए पहले यह शुगर फ्री हुआ और अब यह देशी खांड में बनने लगा है। हर वर्ग की पहुंच में रहे, इसके लिए यह वनस्पति घी से लेकर देशी घी में भी तैयार होता है। इसकी मांग प्रदेश ही नहीं देश के कोने-कोने के अलावा विदेशों में भी है। वहीं रोहतक शहर की बात करें तो प्रतिदिन लाखों रुपये का इसका कारोबार होता है।

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मिष्ठान भंडारों में मानसून सीजन में सबसे अधिक होती बिक्री, रक्षाबंधन तक बिकता है अधिक
मिष्ठान भंडारों में मानसून सीजन में सबसे अधिक बिक्री घेवर की होती है। यह ज्यादातर रक्षाबंधन तक बिकता है। हरियाणा प्रदेश में रोहतक के घेवर की भी काफी प्रसिद्धि है। मई से ही कारीगर लगे हैं। मांग को पूरा करने के लिए जब हरियाणा के कारीगर कम पड़ते हैं तो उत्तर प्रदेश से कारीगर बुलाए जाते हैं। रोहतक जिले से गुजरात, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, दिल्ली नियमित घेवर की सप्लाई होती है। यह कूरियर से भेजा जाता है। इसकी ऑनलाइन बुकिंग आती है। इसके अलावा रोहतक का घेवर कनाड़ा सहित कई देशों में भी जाता है। विदेश से आने वाले भी अपने साथ घेवर खरीदकर ले जाते हैं। जब मौसम में नमी होती है तब घेवर का असली स्वाद आता है।
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हजारों किलो घेवर रोज तैयार कर रहे हरियाणा व उत्तर प्रदेश के कारीगर
रोहतक जिले में प्रतिदिन 1000 किलो से अधिक की खपत है। इसमें 200 से 300 किलो राज्य के बाहर जाता है। इसमें पैकिंग व कूरियर का खर्च मंगाने वाले से लिया जाता है। साधारण व दूध वाला घेवर एक सप्ताह चल जाता है। देश में तीन दिन में कूरियर से पहुंचता है। इसके लिए कूरियर कंपनी 120 रुपये प्रति किलो का चार्ज लेती हैं। बाजार की बात करें तो छोटे-बडे़ 200 से अधिक व्यवसायी घेवर बनाते हैं और जिले में रोजाना की बिक्री 10 लाख रुपये से अधिक का अनुमान है।

हमारे यहां सालों से घेवर बन रहा है। अब चीनी का प्रयोग बंद कर दिया है क्योंकि स्वास्थ्य के चलते जनता इसे पसंद नहीं कर रही है। अब देशी खांड में ही हम घेवर तैयार करवा रहे हैं। 15 मई से इसे बनाने का काम शुरू है और 8 अगस्त तक चलेगा। यदि मौसम में नमी आगे भी रहती है तो काम जारी रहेगा। इसमें जब तक स्वाद रहता है तब तक लोग इसे खरीदते हैं। - वीरेंद्र राठी, प्रधान, दुर्गा कॉलोनी ट्रेडर एसोसिएशन।

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