{"_id":"5834a91d4f1c1b262413b9e6","slug":"funeral-of-martyr-rai-singh-at-sampla-haryana-bsf-defense-haryana-rohtak","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएसएफ की विशेष यूनिट है एफडीएल, 24 घंटे दुश्मनों से लोहा लेने को रहती है तैयार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएसएफ की विशेष यूनिट है एफडीएल, 24 घंटे दुश्मनों से लोहा लेने को रहती है तैयार
शनि शर्मा/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 23 Nov 2016 01:52 AM IST
विज्ञापन
शहीद राय सिंह के बंकर के द्वार पर ही गिरा था 120 मोर्टार, मौके पर ही हो गये थे शहीद
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में 21 साल तक सेवा देने वाले शहीद राय सिंह अपनी काबिलियत और शिक्षा के दम पर बीएसएफ की फेडरल डिफेंडर लोकेलिटी (एफडीएल) यूनिट के जांबाज सिपाही थे। 24 घंटे दुश्मनों से लोहा लेने को तैयार रहने वाली एफडीएल के सदस्य सीमा से बिल्कुल सटे (एलओसी) क्षेत्र में बने बंकरों में रहकर देश की रक्षा करते हैं। शहादत के समय भी हेड कांस्टेबल राय सिंह इसी यूनिट से जुड़कर देश की सेवा कर रहे थे।
दिल्ली, पंजाब और अन्य जगहों पर देश सेवा करने वाले राय सिंह करीब डेढ़ साल से एफडीएल का हिस्सा थे। बीएसएफ के एसआई गुरनाम सिंह ने बताया कि एफडीएल के सदस्य ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (एलओसी) पर बने बंकरों में ड्यूटी करते हैं। दुश्मनों को सबसे पहले सबक एफडीएल के जवान ही सिखाते हैं। इसके बाद बीएसफ के अन्य जवानों की टुकड़ियां तैनात रहती हैं। उन्होंने बताया कि राय सिंह को हथियारों की अच्छी समझ थी। बेहतर शिक्षा के चलते उन्हें एफडीएल में तैनात किया गया था।
शहीद राय सिंह सहित बीएसएफ के एएसआई सोहनलाल, अमित राणा और गोविंद राज एलओसी पर बने बंकर में तैनात थे। एसआई गुरनाम ने बताया कि रात करीब साढ़े दस बजे दुश्मनों ने सीज फायर का उल्लंघन किया। इसमें दुश्मनों की तरफ से मोर्टार 120 चलाया गया जो कि सीधा राय सिंह के बंकर के द्वार पर आकर फटा। इस कारण राय सिंह मौके पर ही शहीद हो गये, जबकि सोहनलाल, अमित, गोविंद राज व चौथे जवान गंभीर रूप से घायल हो गये। बाद में उपचार के दौरान जवान गोविंद के सीधे पैर को काटना पड़ा, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
विज्ञापन
पोस्ट पहुंचे ही थे कि फिर हुई बमबारी....
सीमा पर पाकिस्तान की करतूत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीएसएफ के जवान शहीद राय सिंह और अन्य घायल जवानों को लेकर पोस्ट तक पहुंचे ही थे कि दुश्मनों ने फिर से बमबारी शुरू कर दी। तभी जवानों ने हेड क्वार्टर को भारी बमबारी की सूचना दी। एसआई गुरनाम ने बताया कि हालांकि इस बार बीएसएफ के जवानों ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। बमबारी में अपना कोई जवान घायल नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि राय सिंह की शहादत के दिन भी पांच छह बार सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन किया गया।
खुद को रोने से नहीं रोक सके डीआईजी
अपने व्यवहार और काम करने की लगन की वजह से शहीद राय सिंह अपनी बटालियन में सबके चहेते थे। जब उनका शव पोस्ट पर लाया गया तो वहां मौजूद बीएसएफ के डीआईजी एमएस सिंह भी खुद को रोने से नहीं रोक सके। शव देखकर वह बिलखने लगे। बताया जा रहा है कि राय सिंह की शिक्षा अच्छी होने के कारण वह ऑफिस का कामकाज भी देखते थे।
विज्ञापन
दिल्ली, पंजाब और अन्य जगहों पर देश सेवा करने वाले राय सिंह करीब डेढ़ साल से एफडीएल का हिस्सा थे। बीएसएफ के एसआई गुरनाम सिंह ने बताया कि एफडीएल के सदस्य ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (एलओसी) पर बने बंकरों में ड्यूटी करते हैं। दुश्मनों को सबसे पहले सबक एफडीएल के जवान ही सिखाते हैं। इसके बाद बीएसफ के अन्य जवानों की टुकड़ियां तैनात रहती हैं। उन्होंने बताया कि राय सिंह को हथियारों की अच्छी समझ थी। बेहतर शिक्षा के चलते उन्हें एफडीएल में तैनात किया गया था।
विज्ञापन
शहीद राय सिंह सहित बीएसएफ के एएसआई सोहनलाल, अमित राणा और गोविंद राज एलओसी पर बने बंकर में तैनात थे। एसआई गुरनाम ने बताया कि रात करीब साढ़े दस बजे दुश्मनों ने सीज फायर का उल्लंघन किया। इसमें दुश्मनों की तरफ से मोर्टार 120 चलाया गया जो कि सीधा राय सिंह के बंकर के द्वार पर आकर फटा। इस कारण राय सिंह मौके पर ही शहीद हो गये, जबकि सोहनलाल, अमित, गोविंद राज व चौथे जवान गंभीर रूप से घायल हो गये। बाद में उपचार के दौरान जवान गोविंद के सीधे पैर को काटना पड़ा, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
विज्ञापन
पोस्ट पहुंचे ही थे कि फिर हुई बमबारी....
सीमा पर पाकिस्तान की करतूत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीएसएफ के जवान शहीद राय सिंह और अन्य घायल जवानों को लेकर पोस्ट तक पहुंचे ही थे कि दुश्मनों ने फिर से बमबारी शुरू कर दी। तभी जवानों ने हेड क्वार्टर को भारी बमबारी की सूचना दी। एसआई गुरनाम ने बताया कि हालांकि इस बार बीएसएफ के जवानों ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। बमबारी में अपना कोई जवान घायल नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि राय सिंह की शहादत के दिन भी पांच छह बार सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन किया गया।
खुद को रोने से नहीं रोक सके डीआईजी
अपने व्यवहार और काम करने की लगन की वजह से शहीद राय सिंह अपनी बटालियन में सबके चहेते थे। जब उनका शव पोस्ट पर लाया गया तो वहां मौजूद बीएसएफ के डीआईजी एमएस सिंह भी खुद को रोने से नहीं रोक सके। शव देखकर वह बिलखने लगे। बताया जा रहा है कि राय सिंह की शिक्षा अच्छी होने के कारण वह ऑफिस का कामकाज भी देखते थे।