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देश के नाम लिखी थी शहादत, सर्जिकल स्ट्राइक ने रोकी रिटायरमेंट की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 23 Nov 2016 02:07 AM IST
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सर्जिकल स्ट्राइक के बाद लगातार बमबारी की वजह से नहीं दी थी एप्लीकेशन
- फोटो : amar ujala
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शहीद राय सिंह का जीवन देश के नाम ही लिखा था। उनकी किस्मत में ही था कि वह देश की रक्षा करते हुए शहीद होंगे। कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी रिटायरमेंट की तैयारी कर ली थी। इस संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों को अवगत भी करा दिया था, लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद लगातार हो रही सीमा पार की बमबारी के कारण वह एप्लीकेशन नहीं दे सके। आखिरकार देश के लिए शहीद हो गये।
करीब दो महीने पहले राय सिंह ने रिटायरमेंट लेने की बात अपने उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई थी। एसआई गुरनाम सिंह ने बताया कि राय सिंह ने कहा था कि वह वीआरएस लेना चाहते हैं, ताकि बच्चों के साथ रह सकें। उनका कहना था कि रिटायरमेंट के बाद गांव जाकर खेती बाड़ी करेंगे। गुरनाम ने बताया कि राय सिंह रिटायरमेंट के लिए एप्लीकेशन देने वाले थे, लेकिन दुश्मनों की तरफ से सीमा पर अचानक गतिविधियां तेज हो गईं। इस कारण वह एप्लीकेशन नहीं दे सके। हालांकि, राय सिंह ने इसका जिक्र अभी तक परिवार में नहीं किया था।
नोटबंदी से टूटी आतंकवादियों की कमर
नोटबंदी के कारण भले ही आमजन को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन इससे आतंकवादियों की कमर टूट चुकी है। विशेष कर बीएसएफ और सेना को तो इसका फायदा मिल रहा है। बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि 500 और 1000 के नोट बंद होने से अब उनकी गाड़ियों पर पथराव की घटना न के बराबर हो रही है। उन्होंने बताया कि आतंकवादी राह भटके युवाओं को 500 और 1000 का नोट देकर जवानों की गाड़ियों पर पथराव करवाते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद आतंकवादियों के पास मौजूद काला पैसा रद्दी हो गया है। इस कारण सेना को थोड़ी राहत मिली है।
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पाकिस्तानी सेना के साथ आतंकवादी भी बमबारी में शामिल
बीएसएफ अधिकारियों की मानें तो सीमा पर लगातार हो रही बमबारी में जितना हाथ पाकिस्तानी सेना का है, उतना ही रोल सीमा पार के आतंकवादी निभा रहे हैं। आतंकवादी चुपके से जवानों पर हमले करने की साजिश रचते हैं। इसमें कुछ स्थानीय लोग भी उनका साथ देते हैं। एसआई गुरनाम ने बताया कि जहां पर राय सिंह शहीद हुए ठीक इसी जगह पर कुछ दिन पहले बीएसएफ का एक और जवान शहीद हो गया था। मगर बीएसएफ बेहतर रणनीति के तहत काम कर रही है।
यूं बनाया जाता है जवानों को निशाना
बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि खुलकर सामने आना तो पाकिस्तान के जवानों के वश की बात नहीं है। लेकिन चुपके से घात करने में पीछे नहीं रहते हैं। वह साजिश के तहत भारतीय जवानों को आघात पहुंचाने की कोशिश करते रहते हैं। इसके लिए वह तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कभी हमारे बंकरों के पास आईडी सेल लगा देते हैं तो कभी माइन टेप। कभी छोटा बम लगा देते हैं, ताकि जवान गश्त पर आएं तो निशाना बनाया जा सके। यही नहीं, सीमा से सटे पेड़ों पर बैठकर बंकरों में तैनात जवानों को निशाना बनाते हैं।
माता बोलीं, शहादत पर गर्व, बच्चों का भविष्य सुधारे सरकार
बेटे की शहादत पर गर्व महसूस करने वाली राय सिंह की माता चंद्रो देवी को अब अपने तीनों पोतों के भविष्य की चिंता है। उनका कहना है कि राय सिंह की शहादत पर परिवार को गर्व है। राय सिंह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए देश के लिए शहीद हो गए। अब सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, ताकि राय सिंह के तीनों बेटों का भविष्य अच्छा हो सके। उन्हें बेहतर शिक्षा मिल सके।
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करीब दो महीने पहले राय सिंह ने रिटायरमेंट लेने की बात अपने उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई थी। एसआई गुरनाम सिंह ने बताया कि राय सिंह ने कहा था कि वह वीआरएस लेना चाहते हैं, ताकि बच्चों के साथ रह सकें। उनका कहना था कि रिटायरमेंट के बाद गांव जाकर खेती बाड़ी करेंगे। गुरनाम ने बताया कि राय सिंह रिटायरमेंट के लिए एप्लीकेशन देने वाले थे, लेकिन दुश्मनों की तरफ से सीमा पर अचानक गतिविधियां तेज हो गईं। इस कारण वह एप्लीकेशन नहीं दे सके। हालांकि, राय सिंह ने इसका जिक्र अभी तक परिवार में नहीं किया था।
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नोटबंदी से टूटी आतंकवादियों की कमर
नोटबंदी के कारण भले ही आमजन को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन इससे आतंकवादियों की कमर टूट चुकी है। विशेष कर बीएसएफ और सेना को तो इसका फायदा मिल रहा है। बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि 500 और 1000 के नोट बंद होने से अब उनकी गाड़ियों पर पथराव की घटना न के बराबर हो रही है। उन्होंने बताया कि आतंकवादी राह भटके युवाओं को 500 और 1000 का नोट देकर जवानों की गाड़ियों पर पथराव करवाते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद आतंकवादियों के पास मौजूद काला पैसा रद्दी हो गया है। इस कारण सेना को थोड़ी राहत मिली है।
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पाकिस्तानी सेना के साथ आतंकवादी भी बमबारी में शामिल
बीएसएफ अधिकारियों की मानें तो सीमा पर लगातार हो रही बमबारी में जितना हाथ पाकिस्तानी सेना का है, उतना ही रोल सीमा पार के आतंकवादी निभा रहे हैं। आतंकवादी चुपके से जवानों पर हमले करने की साजिश रचते हैं। इसमें कुछ स्थानीय लोग भी उनका साथ देते हैं। एसआई गुरनाम ने बताया कि जहां पर राय सिंह शहीद हुए ठीक इसी जगह पर कुछ दिन पहले बीएसएफ का एक और जवान शहीद हो गया था। मगर बीएसएफ बेहतर रणनीति के तहत काम कर रही है।
यूं बनाया जाता है जवानों को निशाना
बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि खुलकर सामने आना तो पाकिस्तान के जवानों के वश की बात नहीं है। लेकिन चुपके से घात करने में पीछे नहीं रहते हैं। वह साजिश के तहत भारतीय जवानों को आघात पहुंचाने की कोशिश करते रहते हैं। इसके लिए वह तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कभी हमारे बंकरों के पास आईडी सेल लगा देते हैं तो कभी माइन टेप। कभी छोटा बम लगा देते हैं, ताकि जवान गश्त पर आएं तो निशाना बनाया जा सके। यही नहीं, सीमा से सटे पेड़ों पर बैठकर बंकरों में तैनात जवानों को निशाना बनाते हैं।
माता बोलीं, शहादत पर गर्व, बच्चों का भविष्य सुधारे सरकार
बेटे की शहादत पर गर्व महसूस करने वाली राय सिंह की माता चंद्रो देवी को अब अपने तीनों पोतों के भविष्य की चिंता है। उनका कहना है कि राय सिंह की शहादत पर परिवार को गर्व है। राय सिंह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए देश के लिए शहीद हो गए। अब सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, ताकि राय सिंह के तीनों बेटों का भविष्य अच्छा हो सके। उन्हें बेहतर शिक्षा मिल सके।