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Rohtak News: लोक अदालत में मौके पर फौजदारी के चार मामलों का निपटारा
Thu, 04 Apr 2024 01:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 04 Apr 2024 01:39 AM IST
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रोहतक। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के हर माह के प्रथम बुधवार के शेड्यूल के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की चेयरपर्सन व जिला व सत्र न्यायाधीश नीरजा कुलवंत कलसन के नेतृत्व में सुनारिया जेल परिसर में लोक अदालत का आयोजन किया गया। यहां जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनिल कौशिक ने फौजदारी के विभिन्न चार मुकदमों का मौके पर निपटारा करते हुए बंदियों को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए गए।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनिल कौशिक ने बंदियों को बताया कि किसी भी तरह की परिस्थिति या अज्ञानतावश विचाराधीन बंदी या सजायाफ्ता कैदी को कारागार अधिनियम का पालन करना चाहिए और अनुशासित ढंग से अच्छा आचरण रखना चाहिए, ताकि कारागार में बंदियों व कैदियों के व्यवहार को देखते हुए जेल प्रशासन की ओर से समय-समय पर दिए जाने वाले पेरोल व अन्य लाभ मिल सके।
अनिल कौशिक ने कहा कि किसी भी बंदी और कैदी की ओर से कारागार अधिनियम और जेल प्रबंधन के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रबंधन के विरुद्घ किया गया कार्य अपराध की श्रेणी में आता है। बंदियों को धारा 12 (जी) के तहत विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत अदालत की ड्यूटी है, साथ ही कोई अपराधी अदालत में पेश हो तो न्यायालय उनसे निशुल्क कानूनी सहायता की आवश्यकता के बारे में पूछता है। इसके बाद अदालत आरोपी को सरकारी खर्च पर वकील मुहैया कराती है।
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इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रोहतक के डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसलर राजबीर कश्यप, विधिक सेवा के अधिकारी संदीप कुमार, विपिन कुमार व विभिन्न केसों में बंद कैदी व बंदी उपस्थित रहे।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनिल कौशिक ने बंदियों को बताया कि किसी भी तरह की परिस्थिति या अज्ञानतावश विचाराधीन बंदी या सजायाफ्ता कैदी को कारागार अधिनियम का पालन करना चाहिए और अनुशासित ढंग से अच्छा आचरण रखना चाहिए, ताकि कारागार में बंदियों व कैदियों के व्यवहार को देखते हुए जेल प्रशासन की ओर से समय-समय पर दिए जाने वाले पेरोल व अन्य लाभ मिल सके।
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अनिल कौशिक ने कहा कि किसी भी बंदी और कैदी की ओर से कारागार अधिनियम और जेल प्रबंधन के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रबंधन के विरुद्घ किया गया कार्य अपराध की श्रेणी में आता है। बंदियों को धारा 12 (जी) के तहत विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत अदालत की ड्यूटी है, साथ ही कोई अपराधी अदालत में पेश हो तो न्यायालय उनसे निशुल्क कानूनी सहायता की आवश्यकता के बारे में पूछता है। इसके बाद अदालत आरोपी को सरकारी खर्च पर वकील मुहैया कराती है।
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इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रोहतक के डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसलर राजबीर कश्यप, विधिक सेवा के अधिकारी संदीप कुमार, विपिन कुमार व विभिन्न केसों में बंद कैदी व बंदी उपस्थित रहे।