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रोहतक: सुपवा की पूर्व कुलसचिव प्रो. भारती शर्मा बोलीं- याद है लताजी का मेरे सिर पर प्यार से हाथ रखना...
Sun, 06 Feb 2022 11:52 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 06 Feb 2022 11:52 PM IST
सार
स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन पर सुपवा की पूर्व कुलसचिव प्रो. भारती शर्मा ने कहा कि बचपन में सीएम पिता के साथ पिंजौर में उनसे मुलाकात हुई थी।
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लता मंगेशकर
- फोटो : Twitter @VVSLaxman281
विस्तार
संगीत की दुनिया का नायाब हीरा अब नहीं रहा। स्वर कोकिला लता मंगेशकर से एक ही बार मिल पाई। उस समय उन्होंने मेरे सिर पर बड़े प्यार से हाथ रखा था। बोली कुछ नहीं थी। वह स्पर्श भूले नहीं भूलता है। आज वह स्पर्श रह-रह कर याद आ रहा है। यह कहना है हरियाणा के रोहतक में सुपवा की पूर्व कुलसचिव व एमडीयू के संगीत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. भारती शर्मा का। वे लता मंगेशकर से हुई मुलाकात के स्मरण बता रहीं थीं।
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संगीत शिक्षिका ने कहा कि उस समय मैं चौथी कक्षा में पढ़ती थी। पिता पंडित भगवत दयाल शर्मा प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। बाऊजी ने पिंजौर गार्डन में कुछ कलाकारों को बुलाया था। इसमें पिता के साथ गई थी। यहीं लताजी से पहली व अंतिम बार मुलाकात हुई। उन्होंने बड़े प्यार से मेरे सिर पर हाथ रखा था। बोली, कुछ नहीं। कार्यक्रम के बाद वे चली गईं। हम भी घर आए। इसके बाद कभी उनसे मुलाकात नहीं हो पाई।
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एमडीयू के संगीत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. भारती शर्मा।
हालांकि, संगीत के क्षेत्र में रहते हुए अनेक बड़े कार्यक्रम व उत्सव हुए। इनमें आना जाना रहा। इसके बावजूद उस महान कलाकार से मिलना नहीं हो सका। उनके जाने से देश को बड़ी क्षति पहुंची है। कहते हैं कि किसी के होने न से कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई काम नहीं रुकता, मगर लताजी का विकल्प नहीं है।
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उनकी जगह कोई नहीं ले सकता है। अब तक कोई उन सरीखा कलाकार दूसरा नहीं आया है। यह मुमकिन भी नहीं है। कला के प्रति उनके त्याग व समर्पण भाव ने उनकी पहचान को और बड़ा व ऊंचा बनाने का काम किया है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।