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Rohtak News: पीजीआई में हीमोफीलिया मरीज को 15 दिन वार्ड में भर्ती रखा, नहीं किया इलाज
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24सीटीके12..पीजीआई वार्ड 12 में भर्ती हीमोफीलिया का मरीज विकास यादव। अमर उजाला
रोहतक। फैक्टर के इंजेक्शन समाप्त होने से हीमोफीलिया के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। फैक्टर-7 का इंजेक्शन देश की राजधानी में भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। फैक्टर-7 के लिए दिल्ली से रोहतक आए मरीज के तीमारदार ने शुक्रवार को अपनी परेशानी अमर उजाला से साझा की।
भिवानी जिला के गांव जमालपुर के रहने वाले मरीज के चाचा राजेंद्र कुमार ने बताया कि भतीजा विकास यादव हीमोफीलिया का मरीज है। तीन माह पूर्व विकास बेड से गिर गया। उसकी कूल्हे के पास की हड्डी टूट गई। इसकी जानकारी देर से हुई। पता चलते ही इलाज के लिए भिवानी सिविल अस्पताल में गए। वहां बात नहीं बनी तो दिल्ली एम्स गए। वहां भीड़ अधिक थी, इसके कारण भर्ती नहीं किया गया। ओपीडी से ही इलाज चलाया गया। निजी केंद्र से जांच कराई तो ब्लड की रिपोर्ट अपोजिट एनवेटर पॉजिटिव आ गई। ऐसे में इसमें फैक्टर-8 नहीं फैक्टर-7 काम में आता है। दिल्ली फैक्टर-7 खत्म होने की बात वहां डॉक्टरों ने बताई।
यहां से पीजीआई रोहतक में फैक्टर-7 होने की जानकारी संबंधित चिकित्सक से मिली। इसके बाद 29 वर्षीय विकास को 9 जनवरी को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां से वार्ड 12 में शिफ्ट कर दिया गया।
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राजेंद्र ने बताया कि हड्डी रोग विभाग ने सीधे-सीधे अनुभव न होने के बात कहकर सर्जरी में टालमटोल किया। शुक्रवार को 15 दिन बीतने के बाद रोग संबंधित चिकित्सक ने फैक्टर-7 खत्म होने की बात कहकर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। इतने दिन से कोई चिकित्सा नहीं की गई। अब फैक्टर-7 इंजेक्शन खत्म होने की बात कहकर डिस्चार्ज कर दिया है। मरीज दर्द से पिछले कई माह से परेशान है। यहां चिकित्सक स्वयं से ठीक होने की बात कर रहे हैं, जबकि पीजीआई के चिकित्सक ने फैक्टर-7 होने की बात कहकर यहां इलाज के लिए बुलाया था।
पिछले कई दिनों से हीमोफीलिया रोगियों के लिए आवश्यक फैक्टर के इंजेक्शन न होने के कारण हीमोफीलिया के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अधिकारियों को आगाह किया गया है कि यह बहुत जरूरी इंजेक्शन है। इसकी जल्द व्यवस्था की जाए।
- अजय शर्मा, अध्यक्ष, हीमोफीलिया सोसाइटी रोहतक।
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भिवानी जिला के गांव जमालपुर के रहने वाले मरीज के चाचा राजेंद्र कुमार ने बताया कि भतीजा विकास यादव हीमोफीलिया का मरीज है। तीन माह पूर्व विकास बेड से गिर गया। उसकी कूल्हे के पास की हड्डी टूट गई। इसकी जानकारी देर से हुई। पता चलते ही इलाज के लिए भिवानी सिविल अस्पताल में गए। वहां बात नहीं बनी तो दिल्ली एम्स गए। वहां भीड़ अधिक थी, इसके कारण भर्ती नहीं किया गया। ओपीडी से ही इलाज चलाया गया। निजी केंद्र से जांच कराई तो ब्लड की रिपोर्ट अपोजिट एनवेटर पॉजिटिव आ गई। ऐसे में इसमें फैक्टर-8 नहीं फैक्टर-7 काम में आता है। दिल्ली फैक्टर-7 खत्म होने की बात वहां डॉक्टरों ने बताई।
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यहां से पीजीआई रोहतक में फैक्टर-7 होने की जानकारी संबंधित चिकित्सक से मिली। इसके बाद 29 वर्षीय विकास को 9 जनवरी को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां से वार्ड 12 में शिफ्ट कर दिया गया।
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राजेंद्र ने बताया कि हड्डी रोग विभाग ने सीधे-सीधे अनुभव न होने के बात कहकर सर्जरी में टालमटोल किया। शुक्रवार को 15 दिन बीतने के बाद रोग संबंधित चिकित्सक ने फैक्टर-7 खत्म होने की बात कहकर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। इतने दिन से कोई चिकित्सा नहीं की गई। अब फैक्टर-7 इंजेक्शन खत्म होने की बात कहकर डिस्चार्ज कर दिया है। मरीज दर्द से पिछले कई माह से परेशान है। यहां चिकित्सक स्वयं से ठीक होने की बात कर रहे हैं, जबकि पीजीआई के चिकित्सक ने फैक्टर-7 होने की बात कहकर यहां इलाज के लिए बुलाया था।
पिछले कई दिनों से हीमोफीलिया रोगियों के लिए आवश्यक फैक्टर के इंजेक्शन न होने के कारण हीमोफीलिया के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अधिकारियों को आगाह किया गया है कि यह बहुत जरूरी इंजेक्शन है। इसकी जल्द व्यवस्था की जाए।
- अजय शर्मा, अध्यक्ष, हीमोफीलिया सोसाइटी रोहतक।