{"_id":"68b739b4af512d379009424e","slug":"flood-like-situation-in-the-area-standing-crops-in-the-fields-submerged-rohtak-news-c-199-1-sroh1006-140284-2025-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात, खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात, खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न
Wed, 03 Sep 2025 12:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 03 Sep 2025 12:08 AM IST
विज्ञापन
02जेएनडी19-कपास की फसल में बारिश के बाद जलभराव। स्रोत ग्रामीण
नरवाना। पिछले दो दिनों से चल रही बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। शहर की गलियों से लेकर गांवों की सड़कों तक हर जगह पानी भर गया है। खेतों में खड़ी धान, बाजरा और कपास की फसलें पानी में डूब गई हैं जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
बारिश के लगातार चलने से सब कुछ चौपट कर दिया। किसान अब खुद को भगवान की मार और सरकार की बेरुखी के बीच फंसा हुआ मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब पानी की सख्त जरूरत होती है तब आसमान से एक बूंद नहीं गिरती और जब जरूरत नहीं होती तो पूरी फसल डूब जाती है।
मौसम विभाग ने पहले ही जींद जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। बारिश के कारण नरवाना और उचाना क्षेत्र के अधिकांश खेतों में जलभराव हो चुका है। कृषि विभाग की टीम ने भी हालात का जायजा लिया। जिन धान की फसलों पर फूल आ चुके थे उनके खराब होने की आशंका अधिक है।
विज्ञापन
केवल वे धान की फसलें जो अभी छोटी अवस्था में हैं कुछ हद तक खुद को रिकवर कर सकती हैं। बाजरे की फसल पर भी असर पड़ा है। लंबे समय तक खेतों में पानी भरा रहने से बाजरे का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा। किसानों के मुताबिक अभी तक का मेहनताना और अच्छी फसल की उम्मीदें पानी में बह गई हैं। वहीं गांव में भी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हो रही है। किसानों ने सरकार से जल्द से जल्द गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
दो हजार हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित
क्षेत्र में 105000 हेक्टेयर भूमि पर धान लगी है। इसमें करीब 12 गांवों में दो हजार हेक्टेयर में धान की फसल जलमग्न हो चुकी है। कपास 12500 हेक्टेयर में है जोकि बारिश से पूरी तरह प्रभावित है। उसमें भारी नुकसान होने की आशंका है। नरवाना क्षेत्र में करीब दो हजार हेक्टेयर भूमि पर बाजरे की फसल है जिसमें से करीब 700 हेक्टेयर में बाजरा जलभराव की चपेट में है।
वर्जन
कपास की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। बाजरे की फसल भी प्रभावित है। वहीं धान की फसलों पर भी भारी खतरा मंडरा रहा है।
-- बलजीत सिंह, कृषि अधिकारी नरवाना
विज्ञापन
बारिश के लगातार चलने से सब कुछ चौपट कर दिया। किसान अब खुद को भगवान की मार और सरकार की बेरुखी के बीच फंसा हुआ मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब पानी की सख्त जरूरत होती है तब आसमान से एक बूंद नहीं गिरती और जब जरूरत नहीं होती तो पूरी फसल डूब जाती है।
विज्ञापन
मौसम विभाग ने पहले ही जींद जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। बारिश के कारण नरवाना और उचाना क्षेत्र के अधिकांश खेतों में जलभराव हो चुका है। कृषि विभाग की टीम ने भी हालात का जायजा लिया। जिन धान की फसलों पर फूल आ चुके थे उनके खराब होने की आशंका अधिक है।
विज्ञापन
केवल वे धान की फसलें जो अभी छोटी अवस्था में हैं कुछ हद तक खुद को रिकवर कर सकती हैं। बाजरे की फसल पर भी असर पड़ा है। लंबे समय तक खेतों में पानी भरा रहने से बाजरे का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा। किसानों के मुताबिक अभी तक का मेहनताना और अच्छी फसल की उम्मीदें पानी में बह गई हैं। वहीं गांव में भी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हो रही है। किसानों ने सरकार से जल्द से जल्द गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
दो हजार हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित
क्षेत्र में 105000 हेक्टेयर भूमि पर धान लगी है। इसमें करीब 12 गांवों में दो हजार हेक्टेयर में धान की फसल जलमग्न हो चुकी है। कपास 12500 हेक्टेयर में है जोकि बारिश से पूरी तरह प्रभावित है। उसमें भारी नुकसान होने की आशंका है। नरवाना क्षेत्र में करीब दो हजार हेक्टेयर भूमि पर बाजरे की फसल है जिसमें से करीब 700 हेक्टेयर में बाजरा जलभराव की चपेट में है।
वर्जन
कपास की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। बाजरे की फसल भी प्रभावित है। वहीं धान की फसलों पर भी भारी खतरा मंडरा रहा है।