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वित्तमंत्री की कोठी में आगजनी: आरोपी को पकड़ने गए चार पुलिस वालों को ग्रामीणों ने बनाया बंधक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 26 Apr 2016 01:59 AM IST
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भड़क गए रैनकपुरा के ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ के मामले में सोमवार सुबह एक आरोपी को पकड़ने गांव रैनकपुरा पहुंचे एसआईटी के चार सदस्यों को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। आरोप है कि पुलिसकर्मी बिना नंबर वाली गाड़ी से सादी वर्दी में पहुंचे थे। पुलिस वालों ने एक कथित आरोपी के भाई को जबरन उठाने का प्रयास किया, जिससे ग्रामीण भड़क गए और चारों पुलिस कर्मियों को बंधक बना लिया।
पुलिस कर्मियों को बंधक बनाने की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एसआईटी के चारों सदस्यों को छुड़ाने के लिए गांव में अर्द्धसैनिक बल की तीन कंपनियों सहित भारी संख्या में पुलिस बल को भेजा गया। पुलिस बल को देखकर गांव वाले भड़क न जाएं इसलिए फोर्स को गांव के बाहर ही रोक दिया गया।
इस बीच करीब दो घंटे तक पुलिस को ग्रामीणों का तीखा विरोध झेलना पड़ा। इसके बाद गांव की 11 सदस्यीय कमेटी ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। तय किया गया कि ग्रामीणों की कमेटी पुलिस को शपथपत्र देगी, ताकि मामले में केवल आरोपियों के खिलाफ ही पुलिस कार्रवाई कर सके। अपनी बातें मनवाने के बाद ग्रामीणों ने करीब चार घंटे बाद चारों पुलिस कर्मियों को छोड़ा। उधर, देर शाम पुलिस ने देवेंद्र के परिवार और अन्य लोगों के खिलाफ सिटी थाने में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचने सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
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पुलिस का कहना है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 19 फरवरी को वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में हुई आगजनी के मामले में उसे गांव रैनकपुरा के देवेंद्र के खिलाफ कुछ सबूत मिले थे। एसआईटी के चार सदस्य सोमवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे सादी वर्दी में और बिना नंबर प्लेट की गाड़ी में देवेंद्र को पकड़ने चले गए। बताते हैं कि जब पुलिस वाले देवेंद्र के घर पहुंचे तो उसका भाई रविंद्र घर में कुछ काम कर रहा था। चारों पुलिस कर्मी घर में घुसे और रविंद्र से नाम पूछा। रविंद्र के नाम बातते ही पुलिस कर्मियों ने उसे उठा लिया और गाड़ी में डालने का प्रयास करने लगे। इस पर रविंद्र की मां और पत्नी वैयजंती ने शोर मचा दिया।
शोर सुनकर रविंद्र के पड़ोसी और अन्य सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठे हो गए और एसआईटी के चारों सदस्यों को घेर लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने चारों पुलिस कर्मियों को एक कमरे में बंद कर दिया। जैसे ही यह सूचना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची तो उन्होंने स्थिति संभालने के लिए गांव में अर्द्धसैनिक बल और भारी संख्या में पुलिस बल को भेज दिया। इसके बाद गांव पहुंचे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रामीणों से मामले पर बातचीत की। लेकिन ग्रामीण एसपी को बुलाने की मांग पर अड़ गए। लेकिन पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से लंबी बातचीत और बहस के बाद ग्रामीणों ने करीब साढ़े बारह बजे चारों पुलिस कर्मियों को कमरे से बाहर निकाला।
पुलिस पर रविंद्र को घर से सड़क तक घसीटने का आरोप
रैनकपुरा गांव के रविंद्र का आरोप है कि पुलिस वालों ने उसे जबरन उठाने का प्रयास कर रहे थे। जबकि वह बता रहा था कि वह देवेंद्र नहीं बल्कि उसका भाई है। लेकिन पुलिस वालों ने उसकी एक न सुनी और घर से घसीटते हुए सड़क तक ले गए। पुलिस वालों को उसे जबरन ले जाते देख उसकी पत्नी और मां ने शोर मचा दिया, जिस पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए और पुलिस वालों को घेर लिया।
पत्नी बचाने आई तो गोद से गिरा एक साल का बच्चा
ग्रामीणों का आरोप है कि रविंद्र को जब एसआईटी उठाकर ले जा रही थी तो उसकी आवाज सुनकर बच्चे को दूध पिला रही उसकी पत्नी वैयजंती दौड़कर बाहर आई। उसकी गोद में बच्चा था। पत्नी ने पुलिस कर्मियों से रविंद्र को छुड़ाने का प्रयास किया। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उसे भी धक्का दे दिया। इससे वैयजंती की गोद से बच्चा सड़क पर जा गिरा। इसके बाद आसपास के लोगों ने बच्चे को सड़क से उठाया। बताया गया कि बच्चे को ज्यादा चोट नहीं आई है।
रविंद्र की मां के साथ बदसलूकी का आरोप
ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस कर्मियों ने रविन्द्र की मां कमला के साथ भी बदसलूकी की। कमला का आरोप है कि जब रविंद्र को इन लोगों ने उठाया तो उसने छत से देख लिया। इसके बाद वह दौड़कर नीचे आई। शोर मचाते हुए उसने कहा कि उनके बेटे को उठा लिया। फिर वह पुलिस कर्मियों से रविंद्र को छुड़ाने लगी। आरोप है कि इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके साथ भी बदसलूकी की। आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों से हुई हाथापाई में उनके कपड़े तक फट गए।
ग्रामीणों ने कहा, एसआईटी का इंचार्ज बदला जाए
रैनकपुरा के ग्रामीणों ने मामले की जांच कर रही एसआईटी के इंचार्ज को बदलने की मांग की है। पहले तो ग्रामीण इंचार्ज को ही गांव में बुलाने की मांग कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विभाग ने उन्हें गांव में नहीं भेजा। ग्रामीणों का आरोप है कि एसआईटी बेवजह उनके बच्चों को परेशान कर रही है। एसआईटी ने न सिर्फ बेकसूर रविंद्र को हिरासत में लेने की कोशिश की, बल्कि महिलाओं के साथ बदतमीजी की। ग्रामीणों ने मांग की कि एसआईटी के इंचार्ज को बदला जाए, ताकि बेकसूर लोगों को इस तरह ना फंसाया जा सके।
ग्रामीणों की कमेटी देगी शपथपत्र, बेकसूर नहीं होंगे गिरफ्तार
मामले के निपटारे के लिए डीएसपी पवन कुमार और विजेंद्र सिंह ने गांव के मौजिज आदमियों से बातचीत की। इसके बाद गांव में एक 11 सदस्यीय कमेटी गठित करने पर सहमति बनी। पुलिस अब इस कमेटी की सहमति पर ही गांव में किसी को पकड़ने की कार्रवाई कर सकेगी। साथ ही गांव के जिन लोगों के नाम उपद्रव में सामने आए हैं उनके संबंध में कमेटी के सदस्य पुलिस को शपथपत्र सौंपेंगे, ताकि नाजायज गिरफ्तारी न हो।
तुरंत पहुंची पांच थानों की पुलिस और अर्द्धसैनिक बल
चार पुलिस कर्मियों को बंधक बनाने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन ने गांव में तुरंत भारी संख्या में पुलिस बल भेज दिया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर गांव में पांच थानों की पुलिस सहित अर्द्धसैनिक बल की तीन कंपनियां भेजी गईं। दो डीएसपी, तीन इंस्पेक्टर सहित अन्य पुलिस कर्मी भी गांव पहुंचे। हालांकि ग्रामीण न भड़कें इसके के लिए अर्द्धसैनिक बल को गांव के बाहरी हिस्से में ही रोका गया था। गांव के बाहर से ही फोर्स कार्रवाई का इंतजार करती रही। हालांकि बातचीत से ही चारों के छूट जाने से पुलिस ने राहत की सांस ली।
एसआईटी बोली- आगजनी का आरोपी है
एसआईटी इंचार्ज सिद्धार्थ ढांडा का कहना है कि देवेंद्र वित्तमंत्री की कोठी में आगजनी का आरोपी है। उसका चेहरा सीसीटीवी फुटेज में सामने आ रह है, जिसमें वह कोठी के आसपास नजर आ रहा है। इसलिए उसकी गिरफ्तारी जरूरी है।
पुलिस को डर : कहीं हर गांव में शुरू न हो जाए पुलिस का विरोध
तीन दिन पहले रिटौली के ग्रामीणों ने दिलावर सिंह की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कोर्ट के बाहर एसआईटी की गाड़ी को घेर लिया था। इसी दिन सैकड़ों ग्रामीणों ने अर्बन इस्टेट थाना घेरकर गिरफ्तार किये गए एक आरोपी को छुड़ा लिया था। अब रैनकपुरा गांव में आरोपी को पकड़ने गए पुलिस वालों को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन को डर सताने लगा है कि कहीं दूसरे गांवों में भी आरोपियों की गिरफ्तारी का इसी तरह से विरोध ना शुरू हो जाए। इससे किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाएगा।
किसी आरोपी को पकड़ने के लिए एसआईटी के कुछ सदस्य गांव में आए थे। ग्रामीणों और उनके बीच कुछ विवाद हो गया। इसके बाद वह कमरे में बैठा लिया गया था। हालांकि बाद में ग्रामीणों से बात करने के बाद मामला सुलझ गया। ग्रामीणों की एक कमेटी बनी है जिसकी तरफ से संबंधित आरोपी के संबंध में शपथ पत्र दिये जाएंगे। साथ ही गांव से किसी निर्दोष की गिरफ्तारी नहीं होगी।
- पवन कुमार, डीएसपी
पुलिस कर्मियों को बंधक बनाने की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एसआईटी के चारों सदस्यों को छुड़ाने के लिए गांव में अर्द्धसैनिक बल की तीन कंपनियों सहित भारी संख्या में पुलिस बल को भेजा गया। पुलिस बल को देखकर गांव वाले भड़क न जाएं इसलिए फोर्स को गांव के बाहर ही रोक दिया गया।
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इस बीच करीब दो घंटे तक पुलिस को ग्रामीणों का तीखा विरोध झेलना पड़ा। इसके बाद गांव की 11 सदस्यीय कमेटी ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। तय किया गया कि ग्रामीणों की कमेटी पुलिस को शपथपत्र देगी, ताकि मामले में केवल आरोपियों के खिलाफ ही पुलिस कार्रवाई कर सके। अपनी बातें मनवाने के बाद ग्रामीणों ने करीब चार घंटे बाद चारों पुलिस कर्मियों को छोड़ा। उधर, देर शाम पुलिस ने देवेंद्र के परिवार और अन्य लोगों के खिलाफ सिटी थाने में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचने सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
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पुलिस का कहना है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 19 फरवरी को वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में हुई आगजनी के मामले में उसे गांव रैनकपुरा के देवेंद्र के खिलाफ कुछ सबूत मिले थे। एसआईटी के चार सदस्य सोमवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे सादी वर्दी में और बिना नंबर प्लेट की गाड़ी में देवेंद्र को पकड़ने चले गए। बताते हैं कि जब पुलिस वाले देवेंद्र के घर पहुंचे तो उसका भाई रविंद्र घर में कुछ काम कर रहा था। चारों पुलिस कर्मी घर में घुसे और रविंद्र से नाम पूछा। रविंद्र के नाम बातते ही पुलिस कर्मियों ने उसे उठा लिया और गाड़ी में डालने का प्रयास करने लगे। इस पर रविंद्र की मां और पत्नी वैयजंती ने शोर मचा दिया।
शोर सुनकर रविंद्र के पड़ोसी और अन्य सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठे हो गए और एसआईटी के चारों सदस्यों को घेर लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने चारों पुलिस कर्मियों को एक कमरे में बंद कर दिया। जैसे ही यह सूचना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची तो उन्होंने स्थिति संभालने के लिए गांव में अर्द्धसैनिक बल और भारी संख्या में पुलिस बल को भेज दिया। इसके बाद गांव पहुंचे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रामीणों से मामले पर बातचीत की। लेकिन ग्रामीण एसपी को बुलाने की मांग पर अड़ गए। लेकिन पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से लंबी बातचीत और बहस के बाद ग्रामीणों ने करीब साढ़े बारह बजे चारों पुलिस कर्मियों को कमरे से बाहर निकाला।
पुलिस पर रविंद्र को घर से सड़क तक घसीटने का आरोप
रैनकपुरा गांव के रविंद्र का आरोप है कि पुलिस वालों ने उसे जबरन उठाने का प्रयास कर रहे थे। जबकि वह बता रहा था कि वह देवेंद्र नहीं बल्कि उसका भाई है। लेकिन पुलिस वालों ने उसकी एक न सुनी और घर से घसीटते हुए सड़क तक ले गए। पुलिस वालों को उसे जबरन ले जाते देख उसकी पत्नी और मां ने शोर मचा दिया, जिस पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए और पुलिस वालों को घेर लिया।
पत्नी बचाने आई तो गोद से गिरा एक साल का बच्चा
ग्रामीणों का आरोप है कि रविंद्र को जब एसआईटी उठाकर ले जा रही थी तो उसकी आवाज सुनकर बच्चे को दूध पिला रही उसकी पत्नी वैयजंती दौड़कर बाहर आई। उसकी गोद में बच्चा था। पत्नी ने पुलिस कर्मियों से रविंद्र को छुड़ाने का प्रयास किया। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उसे भी धक्का दे दिया। इससे वैयजंती की गोद से बच्चा सड़क पर जा गिरा। इसके बाद आसपास के लोगों ने बच्चे को सड़क से उठाया। बताया गया कि बच्चे को ज्यादा चोट नहीं आई है।
रविंद्र की मां के साथ बदसलूकी का आरोप
ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस कर्मियों ने रविन्द्र की मां कमला के साथ भी बदसलूकी की। कमला का आरोप है कि जब रविंद्र को इन लोगों ने उठाया तो उसने छत से देख लिया। इसके बाद वह दौड़कर नीचे आई। शोर मचाते हुए उसने कहा कि उनके बेटे को उठा लिया। फिर वह पुलिस कर्मियों से रविंद्र को छुड़ाने लगी। आरोप है कि इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके साथ भी बदसलूकी की। आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों से हुई हाथापाई में उनके कपड़े तक फट गए।
ग्रामीणों ने कहा, एसआईटी का इंचार्ज बदला जाए
रैनकपुरा के ग्रामीणों ने मामले की जांच कर रही एसआईटी के इंचार्ज को बदलने की मांग की है। पहले तो ग्रामीण इंचार्ज को ही गांव में बुलाने की मांग कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विभाग ने उन्हें गांव में नहीं भेजा। ग्रामीणों का आरोप है कि एसआईटी बेवजह उनके बच्चों को परेशान कर रही है। एसआईटी ने न सिर्फ बेकसूर रविंद्र को हिरासत में लेने की कोशिश की, बल्कि महिलाओं के साथ बदतमीजी की। ग्रामीणों ने मांग की कि एसआईटी के इंचार्ज को बदला जाए, ताकि बेकसूर लोगों को इस तरह ना फंसाया जा सके।
ग्रामीणों की कमेटी देगी शपथपत्र, बेकसूर नहीं होंगे गिरफ्तार
मामले के निपटारे के लिए डीएसपी पवन कुमार और विजेंद्र सिंह ने गांव के मौजिज आदमियों से बातचीत की। इसके बाद गांव में एक 11 सदस्यीय कमेटी गठित करने पर सहमति बनी। पुलिस अब इस कमेटी की सहमति पर ही गांव में किसी को पकड़ने की कार्रवाई कर सकेगी। साथ ही गांव के जिन लोगों के नाम उपद्रव में सामने आए हैं उनके संबंध में कमेटी के सदस्य पुलिस को शपथपत्र सौंपेंगे, ताकि नाजायज गिरफ्तारी न हो।
तुरंत पहुंची पांच थानों की पुलिस और अर्द्धसैनिक बल
चार पुलिस कर्मियों को बंधक बनाने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन ने गांव में तुरंत भारी संख्या में पुलिस बल भेज दिया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर गांव में पांच थानों की पुलिस सहित अर्द्धसैनिक बल की तीन कंपनियां भेजी गईं। दो डीएसपी, तीन इंस्पेक्टर सहित अन्य पुलिस कर्मी भी गांव पहुंचे। हालांकि ग्रामीण न भड़कें इसके के लिए अर्द्धसैनिक बल को गांव के बाहरी हिस्से में ही रोका गया था। गांव के बाहर से ही फोर्स कार्रवाई का इंतजार करती रही। हालांकि बातचीत से ही चारों के छूट जाने से पुलिस ने राहत की सांस ली।
एसआईटी बोली- आगजनी का आरोपी है
एसआईटी इंचार्ज सिद्धार्थ ढांडा का कहना है कि देवेंद्र वित्तमंत्री की कोठी में आगजनी का आरोपी है। उसका चेहरा सीसीटीवी फुटेज में सामने आ रह है, जिसमें वह कोठी के आसपास नजर आ रहा है। इसलिए उसकी गिरफ्तारी जरूरी है।
पुलिस को डर : कहीं हर गांव में शुरू न हो जाए पुलिस का विरोध
तीन दिन पहले रिटौली के ग्रामीणों ने दिलावर सिंह की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कोर्ट के बाहर एसआईटी की गाड़ी को घेर लिया था। इसी दिन सैकड़ों ग्रामीणों ने अर्बन इस्टेट थाना घेरकर गिरफ्तार किये गए एक आरोपी को छुड़ा लिया था। अब रैनकपुरा गांव में आरोपी को पकड़ने गए पुलिस वालों को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन को डर सताने लगा है कि कहीं दूसरे गांवों में भी आरोपियों की गिरफ्तारी का इसी तरह से विरोध ना शुरू हो जाए। इससे किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाएगा।
किसी आरोपी को पकड़ने के लिए एसआईटी के कुछ सदस्य गांव में आए थे। ग्रामीणों और उनके बीच कुछ विवाद हो गया। इसके बाद वह कमरे में बैठा लिया गया था। हालांकि बाद में ग्रामीणों से बात करने के बाद मामला सुलझ गया। ग्रामीणों की एक कमेटी बनी है जिसकी तरफ से संबंधित आरोपी के संबंध में शपथ पत्र दिये जाएंगे। साथ ही गांव से किसी निर्दोष की गिरफ्तारी नहीं होगी।
- पवन कुमार, डीएसपी