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पांच साल बाद भी चंडीगढ़ से नहीं लौटी किला मोहल्ले के 232 मकानों की फाइल

Sat, 30 May 2020 01:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2020 01:15 AM IST
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File of 232 houses of Ekkila mohalla not returned from Chandigarh even after five years
रोहतक। प्रदेश की सियासी राजधानी रोहतक की धरती तीन साल बाद फिर शुक्रवार के दिन 4.6 की तीव्रता वाले भूकंप से कांप उठी। अजीब संयोग कहें या प्रकृति की कमाल, 2 जून 2017 को उस दिन भी शुक्रवार था। हालांकि समय तड़के के 4 बजकर 23 मिनट था। अब रात को नौ बजे के बाद भूकंप आया है।
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नगर निगम के पूर्व पार्षद नरोतामल भटनागर ने बताया कि भूकंप के हिसाब से रोहतक डेंजर जोन में आता है। इस कारण पुराना शहर भूकंप के हिसाब से ज्यादा संवेदनशील है। क्योंकि पुराने शहर का ज्यादातर हिस्सा बिना पिलर से बना है, जो भूकंप की दृष्टि से उचित नहीं है। ऊपर से नगर निगम बेपरवाह बना हुआ है। 2015 में आए भूकंप में किला मोहल्ले के पांच मकानों में दरार आ गई थी। निगम ने विशेष सर्वे करवाया था, जिसमें 232 मकानों रिपोर्ट तैयार की गई। जो बाद में चंडीगढ़ भेजी गई, लेकिन उस फाइल पर आज भी धूल जमीं है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में शांतमई चौक से गोहाना अड्डे तक किला बनाया गया था। बाद में समय के साथ किला जर्जर हो गया। मुगलकाल में किले के आसपास समुदाय विशेष के लोग आकर बस गए। किला रोड पर आज भी लाल मस्जिद है। आजादी के समय बंटवारे के बाद समुदाय विशेष के लोग यहां से चले गए।यहां की जमीन विस्थापित परिवारों को दे दी गई। बाद में आसपास के गांवों से आए लोग किला मोहल्ले में बस गए। 2015 में भूकंप के बाद किला मोहल्ले के मकानों का सर्वे हुआ। 300 में से 232 मकानों को डेंजर श्रेणी में रखा गया।
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यहां-यहां हुआ था नुकसान
तीन साल पहले भूकंप से प्रेम नगर के एक मकान के पिलर में दरार आ गई थी। जबकि इंदिरा कालोनी में एक मकान के सभी कमरों में दरार आई थी। काठमंडी में मकान का छज्जा गिर गया था। कंसाला गांव में भी परचून व्यापारी सुशील कुमार के मकान में दरार आई थी। हालांकि अब तीन साल बाद किसी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
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