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Rohtak News: फाइटर संग्राम सिंह 2 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की श्रृंखला में उतरेंगे
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39 संग्राम सिंह
रोहतक। जिले के मशहूर रेसलर और एमएमए फाइटर संग्राम सिंह एक बार फिर इतिहास रचने के लिए तैयार हैं। वे यूरोप की प्रमुख एमएमए प्रोमोशन लेवल्स फाइट लीग में अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की श्रृंखला में उतरेंगे। एलएफएल के बैनर तले उनका पहला मुकाबला 2 नवंबर को एम्स्टर्डम नीदरलैंड्स में होगा।
संग्राम सिंह रोहतक के गांव मदीना के निवासी है। 93 किलोग्राम भार वर्ग में मुकाबला करने वाले संग्राम सिंह इससे पहले 83 किलोग्राम डिवीजन में खेल चुके हैं। वे लगातार सीमाओं को तोड़ते हुए उम्र की परिभाषाओं को चुनौती दे रहे हैं।
संग्राम न केवल पहले भारतीय रेसलर हैं जिन्होंने एमएमए में कदम रखा है बल्कि 40 साल की उम्र में प्रोफेशनल रेसलर से एमएमए फाइटर बनने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी भी हैं। संग्राम का इसमें उतरना अंतरराष्ट्रीय एमएमए परिदृश्य में भारत की मौजूदगी को और मजबूत करेगा और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगा।
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उन्होंने कहा कि उनके लिए यह सिर्फ एक फाइट नहीं है, यह भारत को वैश्विक मंच पर प्रतिनिधित्व देने का अवसर है। 40 साल की उम्र में साबित करना चाहता हैं कि अगर आपके पास अनुशासन, जुनून और आगे बढ़ने की इच्छा है तो उम्र केवल एक संख्या है। दुनिया की सबसे बेहतरीन एमएमए लीग्स में खेलना उनके लिए सम्मान की बात है।
बचपन से ही रूमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित संग्राम ने अपने जीवन के लगभग आठ साल व्हीलचेयर पर बिताए। कड़ी मेहनत, रिहेबिलिटेशन और अनुशासन के बल पर उन्होंने यह मुश्किलें पार कीं और राष्ट्रीय रेसलिंग चैंपियन से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोफेशनल रेसलर और अब कॉम्बैट स्पोर्ट्स एथलीट बने।
मोटिवेशनल स्पीकर व अभिनेता हैं संग्राम सिंह
संग्राम सिंह जन्म का नाम संजीत कुमार, 21 जुलाई 1985 को हुआ। वे प्रोफेशनल रेसलर, मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट, मोटिवेशनल स्पीकर व अभिनेता हैं। वे दो बार कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैंपियन रह चुके हैं और 2012 में वर्ल्ड रेसलिंग प्रोफेशनल्स (दक्षिण अफ्रीका) की ओर से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रोफेशनल रेसलर के रूप में सम्मानित किए गए। उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व रेसलिंग और एमएमए दोनों प्लेटफॉर्म्स पर किया है। व्हीलचेयर से वर्ल्ड क्लास एथलीट बनने तक की उनकी कहानी आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।
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संग्राम सिंह रोहतक के गांव मदीना के निवासी है। 93 किलोग्राम भार वर्ग में मुकाबला करने वाले संग्राम सिंह इससे पहले 83 किलोग्राम डिवीजन में खेल चुके हैं। वे लगातार सीमाओं को तोड़ते हुए उम्र की परिभाषाओं को चुनौती दे रहे हैं।
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संग्राम न केवल पहले भारतीय रेसलर हैं जिन्होंने एमएमए में कदम रखा है बल्कि 40 साल की उम्र में प्रोफेशनल रेसलर से एमएमए फाइटर बनने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी भी हैं। संग्राम का इसमें उतरना अंतरराष्ट्रीय एमएमए परिदृश्य में भारत की मौजूदगी को और मजबूत करेगा और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगा।
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उन्होंने कहा कि उनके लिए यह सिर्फ एक फाइट नहीं है, यह भारत को वैश्विक मंच पर प्रतिनिधित्व देने का अवसर है। 40 साल की उम्र में साबित करना चाहता हैं कि अगर आपके पास अनुशासन, जुनून और आगे बढ़ने की इच्छा है तो उम्र केवल एक संख्या है। दुनिया की सबसे बेहतरीन एमएमए लीग्स में खेलना उनके लिए सम्मान की बात है।
बचपन से ही रूमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित संग्राम ने अपने जीवन के लगभग आठ साल व्हीलचेयर पर बिताए। कड़ी मेहनत, रिहेबिलिटेशन और अनुशासन के बल पर उन्होंने यह मुश्किलें पार कीं और राष्ट्रीय रेसलिंग चैंपियन से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोफेशनल रेसलर और अब कॉम्बैट स्पोर्ट्स एथलीट बने।
मोटिवेशनल स्पीकर व अभिनेता हैं संग्राम सिंह
संग्राम सिंह जन्म का नाम संजीत कुमार, 21 जुलाई 1985 को हुआ। वे प्रोफेशनल रेसलर, मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट, मोटिवेशनल स्पीकर व अभिनेता हैं। वे दो बार कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैंपियन रह चुके हैं और 2012 में वर्ल्ड रेसलिंग प्रोफेशनल्स (दक्षिण अफ्रीका) की ओर से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रोफेशनल रेसलर के रूप में सम्मानित किए गए। उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व रेसलिंग और एमएमए दोनों प्लेटफॉर्म्स पर किया है। व्हीलचेयर से वर्ल्ड क्लास एथलीट बनने तक की उनकी कहानी आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।