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Rohtak News: एफडीडीआई बनाएगा पैर के हिसाब से आरामदायक जूता

Tue, 06 Jun 2023 02:11 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jun 2023 02:11 AM IST
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FDDI will make comfortable shoes according to the feet
एफडीडीआई की लेब में आई नई मशीन ।
रोहतक। आपका जूता टेढ़ा हो गया। यह एक ओर से घिस गया है। आप लड़खड़ा कर चल रहे हैं या अन्य समस्या है तो घबराएं नहीं। आप भी दूसरों की तरह जूता पहन कर आरामदायक स्थिति में चल फिर या दौड़ सकेंगे। चौंकिए मत। सच यही है। एफडीडीआई (फुटवियर डिजाइन एंड डवलपमेंट इंस्टीट्यूट) आपके के लिए आपके पैर के हिसाब से आरामदायक जूता बनाएगा। इसके लिए संस्थान के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में फॉर स्पोर्ट्स शूज (नॉन लेदर) में अंतरराष्ट्रीय स्तर की बायो मैकेनिक लैब स्थापित की गई है। यहां पैरों में आने वाली दिक्कतों को लेकर शोध भी होगा। लैब के विशेषज्ञ व्यक्ति विशेष को भी पैर स्कैन कर सही व आरामदायक जूते तैयार करके देंगे। इसके लिए उन्हें शुल्क देना होगा। फिलहाल शुल्क की दरें तय नहीं हुई हैं। इस बारे में जल्द ही फैसला लिया जाएगा। वहीं विद्यार्थियों को भी इस बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी।
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बायो मैकेनिक लैब में आए 5 करोड़ के उपकरण
एफडीडीआई के एक्सीलेंस सेंटर की बायो मैकेनिक लैब में जर्मनी से पांच करोड़ रुपये की लागत से उपकरण लगाए गए हैं। इसमें फुट स्कैनर, मोशन कैप्चर कैमरा, प्रेशर प्लेट समेत अन्य उपकरण शामिल हैं। मोशन कैप्चर कैमरा अकेला 50 लाख रुपये का है। ऐसे 8 कैमरे शख्स को आठ दिशाओं से मोशन कैप्चर करेंगे। इससे उसके चलने का ढंग व परेशानी काे बेहतर समझा जा सकेगा। विशेषज्ञ उपकरणों की मदद से जूते पर शरीर के दबाव, दिशा व कोण को समझ कर उसी हिसाब से जूता बना सकेंगे। इससे न केवल जूता ज्यादा चलेगा, बल्कि पहनने वाले को आराम भी मिलेगा। संस्थान का दावा है कि इस लैब ने एक्सीलेंस सेंटर को देश का पहला व विश्व में 6वें नंबर पर ला खड़ा किया है।
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पैर की बीमारी का लैब में कर सकेंगे पता
बायो मैकेनिक लैब जूता निर्माण में ही नहीं, पैर की बीमारी में भी बेहतर भूमिका निभाएगी। पैर की स्कैनिंग व मोशन कैप्शन कैमरों के जरिए पैर की बीमारी को पकड़ना आसान रहेगा। इसमें पैर चपटा होने से सेना में भर्ती से वंचित युवाओं, एडी में दर्द से परेशान मरीज व अन्य लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। यही नहीं, पीजीआईएमएस या एम्स सरीखे संस्थान के चिकित्सकों के परामर्श पर उनके मरीजों के लिए बेहतर जूता बनाया जा सकेगा। इसके फ्रेक्चर केस, पैर की हड्डी टूटने, छोटी होने या अन्य मामले हो सकते हैं।
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संस्थान के एक्सीलेंस सेंटर की बायो मैकेनिक लैब जूता उद्योग व उपभोक्ता दोनों को लाभान्वित करेगी। इससे जहां बेहतर उत्पाद तैयार होगा, वहीं ग्राहक या उपभोक्ता को बेहतर व आरामदायक उत्पाद मिल सकेंगे। लैब में जल्द ही विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। फिलहाल संस्थान के दो फैकल्टी सदस्य लैब की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। लैब में पैर स्कैन कर असामान्यता जांची जाएगी। मोशन स्टडी से व्यक्ति विशेष के चलने का ढंग व शरीर का जूते पर दबाव परखा जा सकेगा। खिलाड़ी, श्रमिक, बच्चे, युवा, आम आदमी व अन्य लोगों पर किए गए परीक्षण के आंकड़ों से शोध कार्य भी संभव होगा।
-श्याम कटियार, प्रभारी, एफडीडीआई।
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