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उत्पीड़ित नाबालिगों को न्याय दिलाएगी फास्ट ट्रैक कोर्ट
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रोहतक। प्रदेश के यौन उत्पीड़न व अन्य आपराधिक मामलों में संलिप्त जिले के नाबालिगों का पिछले करीब तीन साल से चल रहा न्याय का इंतजार जल्द खत्म होगा। इसके लिए शुक्रवार से प्रदेश के 16 जिलों में नई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई अदालतें पोक्सो एक्ट संबंधी मामलों का निपटारा करेंगी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की ओर से इन अदालतों की सूची जारी कर दी गई है।
न्यायिक परिसर रोहतक में अब तक 16 ही अदालतें थी। इनमें से छह सेशन और दस लोअर कोर्ट शामिल हैं। नई अदालत सेशन कोर्ट को मिली है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मेनपाल की नई अदालत यहां शुरू हो रही है, जबकि पोक्सो मामले निपटाने के लिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह की अदालत का काम दूसरी अदालतों में देकर यहां केवल नाबालिगों के उत्पीड़न संबंधी केस दिए गए हैं। ऐसे में कोर्ट परिसर में दो नई अदालतें शुरू हो रही हैं।
पोक्सो एक्ट के 120 मामले हैं लंबित
रोहतक जिले में पोक्सो एक्ट के करीब 120 मामले लंबित हैं। यह आंकड़ा पिछले करीब तीन साल का है। इन केसों का निपटारा स्पेशल कोर्ट को एक वर्ष में करना है। इसकी वजह केसों की अधिकता को देखते हुए फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने एक ही साल के लिए अदालत को कार्यभार सौंपा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वयं संज्ञान
कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में एक केस सुनवाई के लिए रखा गया था। इसमें हरियाणा में पोक्सो एक्ट के कई मामले लंबित हैं। इस पर अदालत ने प्रदेश से केसों ब्योरा मांगा। केसों की संख्या देखते हुए इनके निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू कर केस निपटाने के निर्देश दिए। इसी के तहत यह नई अदालत शुरू हो रही है।
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न्यायिक परिसर रोहतक में अब तक 16 ही अदालतें थी। इनमें से छह सेशन और दस लोअर कोर्ट शामिल हैं। नई अदालत सेशन कोर्ट को मिली है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मेनपाल की नई अदालत यहां शुरू हो रही है, जबकि पोक्सो मामले निपटाने के लिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह की अदालत का काम दूसरी अदालतों में देकर यहां केवल नाबालिगों के उत्पीड़न संबंधी केस दिए गए हैं। ऐसे में कोर्ट परिसर में दो नई अदालतें शुरू हो रही हैं।
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पोक्सो एक्ट के 120 मामले हैं लंबित
रोहतक जिले में पोक्सो एक्ट के करीब 120 मामले लंबित हैं। यह आंकड़ा पिछले करीब तीन साल का है। इन केसों का निपटारा स्पेशल कोर्ट को एक वर्ष में करना है। इसकी वजह केसों की अधिकता को देखते हुए फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने एक ही साल के लिए अदालत को कार्यभार सौंपा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वयं संज्ञान
कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में एक केस सुनवाई के लिए रखा गया था। इसमें हरियाणा में पोक्सो एक्ट के कई मामले लंबित हैं। इस पर अदालत ने प्रदेश से केसों ब्योरा मांगा। केसों की संख्या देखते हुए इनके निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू कर केस निपटाने के निर्देश दिए। इसी के तहत यह नई अदालत शुरू हो रही है।