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Rohtak News: गेहूं के लिए किसानों ने तैयार किए खेत, डीएपी न मिलने से हो रही देरी
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सांपला। गेहूं की अगेती बिजाई का समय पीक पर है। डीएपी खाद न मिलने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान अधिकारियों से खाद के लिए गुहार लगा रहे हैं। रोजाना खाद-बीज बिक्री केंद्रों पर किसान पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
जिले में गेहूं बिजाई का लक्ष्य करीब एक लाख हेक्टेयर है, जबकि 2 हजार हेक्टेयर में जौ की खेती भी की जाती है। अब तक जिले में करीब 20 प्रतिशत गेहूं की बिजाई हुई है। 80 हजार हेक्टेयर गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी की जरूरत है। गौरतलब है कि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए और अच्छी पैदावार के लिए जमीन में डीएपी डालना जरूरी है। गेहूं की बिजाई शुरू हो गई है। यह महीने भर चलेगी। डीएपी मिल नहीं रही। दतोड़ से सीता राम, पाकस्मा निवासी कृष्ण कुमार का कहना है कि जहां पर उन्हें डीएपी मिलने की खबर मिलती है, वहीं पहुंच जाते हैं। खाद कहीं भी नहीं मिल रही है। उधर बिक्री केंद्र संचालकों का कहना कि पिछले सप्ताह कुछ डीएपी आई थी, उसे किसानों में बांट दिया गया।
एक एकड़ में एक बैग डीएपी की जरूरत
किसानों के अनुसार एक एकड़ भूमि में एक बैग डीएपी खाद की जरूरत होती है। अब तक जिले में करीब 20 प्रतिशत गेहूं की बिजाई हुई है। किसान डीएपी खाद का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कई लोगों ने तो डीएपी खाद न मिलने की वजह से सरसों की बिजाई भी नहीं की है। अब गेहूं के लिए खेत तैयार कर रहे हैं।
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किसानों को डीएपी खाद की कमी नहीं रहने दी जाएगी। पूरे नवंबर में गेहूं की बिजाई का सीजन है। आज रैक लगेगा, उसके बाद सभी सेंटर पर पहुंचा दिया जाएगा। पहले झज्जर व भिवानी में रैक लगे थे, कुछ खाद रोहतक लाई गई थी। अब रोहतक के लिए रैक लग रहा है।
-डॉ. संदीप, एसडीओ, कृषि विभाग
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जिले में गेहूं बिजाई का लक्ष्य करीब एक लाख हेक्टेयर है, जबकि 2 हजार हेक्टेयर में जौ की खेती भी की जाती है। अब तक जिले में करीब 20 प्रतिशत गेहूं की बिजाई हुई है। 80 हजार हेक्टेयर गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी की जरूरत है। गौरतलब है कि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए और अच्छी पैदावार के लिए जमीन में डीएपी डालना जरूरी है। गेहूं की बिजाई शुरू हो गई है। यह महीने भर चलेगी। डीएपी मिल नहीं रही। दतोड़ से सीता राम, पाकस्मा निवासी कृष्ण कुमार का कहना है कि जहां पर उन्हें डीएपी मिलने की खबर मिलती है, वहीं पहुंच जाते हैं। खाद कहीं भी नहीं मिल रही है। उधर बिक्री केंद्र संचालकों का कहना कि पिछले सप्ताह कुछ डीएपी आई थी, उसे किसानों में बांट दिया गया।
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एक एकड़ में एक बैग डीएपी की जरूरत
किसानों के अनुसार एक एकड़ भूमि में एक बैग डीएपी खाद की जरूरत होती है। अब तक जिले में करीब 20 प्रतिशत गेहूं की बिजाई हुई है। किसान डीएपी खाद का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कई लोगों ने तो डीएपी खाद न मिलने की वजह से सरसों की बिजाई भी नहीं की है। अब गेहूं के लिए खेत तैयार कर रहे हैं।
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किसानों को डीएपी खाद की कमी नहीं रहने दी जाएगी। पूरे नवंबर में गेहूं की बिजाई का सीजन है। आज रैक लगेगा, उसके बाद सभी सेंटर पर पहुंचा दिया जाएगा। पहले झज्जर व भिवानी में रैक लगे थे, कुछ खाद रोहतक लाई गई थी। अब रोहतक के लिए रैक लग रहा है।
-डॉ. संदीप, एसडीओ, कृषि विभाग