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टेलर, प्लंबर और मजदूरों में बांट दिए प्लास्टिक क्रेट, मिलनी चाहिए थी गरीब किसानों को
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 04 May 2016 02:43 AM IST
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धोखा
- फोटो : demo pic
केंद्र सरकार की ओर से बागवानी प्रोत्साहन के लिए जारी की गई स्पेशल कंपोनेंट प्लान स्कीम (एससीएसपी) सवालों के घेरे में आ गई है है। गरीब अनुसूचित जाति के किसान परिवारों के लिए उपलब्ध कराए गए प्लास्टिक क्रेट भी सरकारी तंत्र डकार गया। सूत्रों का दावा है कि 3911 प्लास्टिक क्रेट महज कागजों में ही बांटे गए हैं। ये क्रेट उन लोगों के नाम जारी दिखाए गए हैं, जिनका खेती से कोई वास्ता तक नहीं है। चिड़ी गांव के टेलर, प्लंबर, मजदूरों और विद्यार्थियाें को ये क्रेट बांटी दिखाई गई हैं। सबसे अधिक मामले गांव चिड़ी के सामने आए हैं। यदि जांच हो तो प्रदेश स्तर पर बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।
क्या है योजना
केंद्र सरकार की ओर से गरीब अनुसूचित जाति के किसान परिवारों के लिए एससीएसपी स्कीम के तहत बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान दिया जाता है। इसका लाभ उठाने के लिए तीन सबसे बड़ी शर्तें हैं कि लाभार्थी अनुसूचित जाति से संबंधित हो, गरीबी रेखा से नीचे हो और बागवानी का काम करता हो। ऐसे लोगों को सरकार 80 फीसदी अनुदान देकर 25 प्लास्टिक क्रेट मुहैया कराती है। ताकि लाभार्थी अपने बागवानी उत्पादों को मंडी तक आसानी से ले जा सकता हैऔर उसका उत्पाद खराब होने से बच जाए। हरियाणा में प्रत्येक जिले के हॉर्टिकल्चर विभाग की तरफ से हर साल गरीब अनुसूचित जाति के लोगों को इस योजना का लाभ दिलाया जाता है। ताकि प्रदेश में स्वरोजगार कर लोग आत्मनिर्भर बन सकें।
ये है मामला
उद्यान विभाग की तरफ से साल 2014-15 में जिले के 157 लाभार्थियों को 3911 प्लास्टिक क्रेट मुहैया कराई गई। योजना का सबसे ज्यादा लाभ गांव सैमाण, चिड़ी और समर गोपालपुर गांव में पहुंचाया गया। तीनों गांवों में तकरीबन 2,500 प्लास्टिक क्रेट दी गई। शिकायत के बाद सामने आया है कि ये क्रेट इन गांवों में ऐसे लोगों के नाम दिए गए दिखाए गए हैं, जिनका खेती से कोई वास्ता ही नहीं है।
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मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराएंगे, जो भी इसमें दोषी होगा उस पर विभागीय कार्रवाई होगी।
- डॉ. रघबीर सिंह, डीएचओ
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क्या है योजना
केंद्र सरकार की ओर से गरीब अनुसूचित जाति के किसान परिवारों के लिए एससीएसपी स्कीम के तहत बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान दिया जाता है। इसका लाभ उठाने के लिए तीन सबसे बड़ी शर्तें हैं कि लाभार्थी अनुसूचित जाति से संबंधित हो, गरीबी रेखा से नीचे हो और बागवानी का काम करता हो। ऐसे लोगों को सरकार 80 फीसदी अनुदान देकर 25 प्लास्टिक क्रेट मुहैया कराती है। ताकि लाभार्थी अपने बागवानी उत्पादों को मंडी तक आसानी से ले जा सकता हैऔर उसका उत्पाद खराब होने से बच जाए। हरियाणा में प्रत्येक जिले के हॉर्टिकल्चर विभाग की तरफ से हर साल गरीब अनुसूचित जाति के लोगों को इस योजना का लाभ दिलाया जाता है। ताकि प्रदेश में स्वरोजगार कर लोग आत्मनिर्भर बन सकें।
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ये है मामला
उद्यान विभाग की तरफ से साल 2014-15 में जिले के 157 लाभार्थियों को 3911 प्लास्टिक क्रेट मुहैया कराई गई। योजना का सबसे ज्यादा लाभ गांव सैमाण, चिड़ी और समर गोपालपुर गांव में पहुंचाया गया। तीनों गांवों में तकरीबन 2,500 प्लास्टिक क्रेट दी गई। शिकायत के बाद सामने आया है कि ये क्रेट इन गांवों में ऐसे लोगों के नाम दिए गए दिखाए गए हैं, जिनका खेती से कोई वास्ता ही नहीं है।
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मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराएंगे, जो भी इसमें दोषी होगा उस पर विभागीय कार्रवाई होगी।
- डॉ. रघबीर सिंह, डीएचओ