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Rohtak News: हौसले से बांटा विभाजन का दंश, सफलता की सीढ़ी चढ़ रहा परिवार

Sat, 20 Jun 2026 02:43 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 02:43 AM IST
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Facing the sting of Partition with courage, the family is now climbing the ladder of success.
22-गुरादिता मल डंग की परिवार के सदस्य। स्रोत : परिजन
रोहतक। आजादी के साथ विभाजन के दंश ने लाखों परिवारों को बेघर कर दिया था। पाकिस्तान से बड़ी संख्या में हिंदू परिवार अपनों से बिछुड़कर व पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोड़कर भारत आए और नए सिर से जीवन शुरू किया। इनमें से एक रहे गुरादिता मल डंग के परिवार की कहानी संघर्ष, पुरुषार्थ व सफलता की प्रेरक मिसाल बन गई है।
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मॉडल टाउन निवासी गुलशन डंग बताते हैं कि उन्हें शरणार्थी होने का दर्द हमेशा सालता है लेकिन इसी को उन्होंने हौसले से हरा दिया। अब यह परिवार न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध है बल्कि समाजसेवा में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। जनहित के कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
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विभाजन के दौरान गुलशन डंग के दादा लालचंद डंग का परिवार पाकिस्तान के सरगोधा में अपना सब कुछ छोड़कर यहां आया था। पहले पंजाब के लुधियाना में बसे। इसके बाद रोजगार की तलाश में रोहतक के गढ़ी माजरा में रहे।
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गांव के लोगों ने भी उस समय पूरा सहयोग किया। शुरू में घर चलाने के लिए गांव में ही ढाबा खोला था। सीमित संसाधनों व कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
गुलशन डंग ने बताया कि उनके पिता विभाजन के समय केवल 12 वर्ष के थे। जब वह विभाजन के दर्द की बातें बताते थे तो सुनकर उनकी रूह कांप जाती थीं। मां शकुंतला देवी जब पाक से यहां आई थीं, तब उनकी उम्र दो वर्ष थी।
उनके दादा लालचंद डंग समेत तीन भाई थे। एक भाई पंजाब के लुधियाना तो एक भाई यूपी के आगरा में हैं। दोनों ही परिवार अब व्यवसाय की बुलंदियों को छू रहे हैं।

गुरादिता की आज चौथी पीढ़ी कमा रही नाम
गुलशन डंग बताते हैं कि हम चार भाई-बहन हैं। भाई भारत भूषण डंग, बहन प्रेमिका व गीत माता। उन्होंने छोटे स्तर पर व्यापार शुरू किया था। इसमें परिवार के सभी सदस्यों ने सहयोग दिया। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और परिवार आर्थिक रूप से मजबूत होने लगा। उनके बच्चे अब वकालत कर रहे हैं।

22-गुरादिता मल डंग की परिवार के सदस्य। स्रोत : परिजन

22-गुरादिता मल डंग की परिवार के सदस्य। स्रोत : परिजन

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