ग्रामीण बाजार भाव में जमीन दें तो मनेठी में ही होगा एम्स निर्माण: सीएम मनोहर लाल
रेवाड़ी के मनेठी में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) के प्रस्तावित निर्माण पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ग्रामीणों को नया फार्मूला समझाया। सीएम ने कहा कि अगर ग्रामीण सरकार को बाजार भाव पर 200 एकड़ जमीन देने के लिए तैयार हैं तो एम्स का निर्माण हर हाल में मनेठी में ही कराया जाएगा।
सीएम मनोहरलाल शनिवार को जन आशीर्वाद यात्रा के तहत कुंड पहुंचे थे। यहां पर पहले तो एम्स निर्माण के लिए संघर्ष कर रही समिति ने उनका स्वागत किया, इसके बाद एम्स शिलान्यास कराने के लिए पत्र सौंपा। सीएम ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार के प्रयासों के बाद मनेठी में एम्स निर्माण की घोषणा पीएम कर चुके हैं।
बजट भी अलॉट कर दिया गया था। लेकिन वन सलाहकार समिति (एफएसी) ने प्रस्तावित स्थल को अरावली वन क्षेत्र बताकर इस पर रोक लगा दी थी। इस अड़चन को दूर करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग को मनेठी की जमीन के बदले अन्य स्थान पर जमीन देने का प्रस्ताव दिया गया है। यदि ऐसा हो गया तो एम्स का निर्माण प्रस्तावित स्थल पर ही कराया जाएगा।
जगह बदलने का नाम लेते ही विरोध
सीएम ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि यदि बदले में जमीन देने के प्रस्ताव के बाद भी वन मंत्रालय निर्माण की अनुमति नहीं देता तो किसी अन्य स्थल का चयन किया जा सकता है। इस पर ग्रामीणों ने अपना विरोध जताया। इसके बाद सीएम ने दूसरा फार्मूला बताते हुए कहा कि यदि समिति ग्रामीणों को 200 एकड़ जमीन देने के लिए तैयार करे तो सरकार इस जमीन को खरीदकर एम्स निर्माण कराने के लिए तैयार है।
इस पर ग्रामीणों ने अपनी सहमति जताई। जमीन अधिग्रहण करने के सवाल पर सीएम ने कहा कि यह एक लंबी प्रक्रिया है, ऐसे में बाजार भाव पर जमीन लेना ही सही रहेगा। सीएम ने कहा कि यदि आप लोग जमीन देने को तैयार हो तो आज ही मैं डीसी को आदेश दे देता हूं।
मनेठी में एम्स की फाइल
सीएम मनोहर लाल ने वर्ष 2015 में बावल में आयोजित जनसभा के दौरान एम्स निर्माण की घोषणा की थी। चार साल बाद मसानी बैराज पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम ने खुद ही मनेठी एम्स निर्माण की संभावनाओं पर विराम लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि इसकी घोषणा दबाव में कराई गई थी।
इसके बाद मनेठी के ग्रामीणों ने दो अक्तूबर 2018 से लगातार 127 दिन धरना दिया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में मनेठी एम्स को स्वीकृत करते हुए बजट अलॉट किया गया। प्रधानमंत्री ने भी कुरुक्षेत्र रैली से मनेठी में एम्स निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन इसके बाद वन सलाहकार समिति ने प्रस्तावित स्थल को वन आरक्षित क्षेत्र बता रोक लगा दी थी।
अरावली वन क्षेत्र है की नहीं, जांच के आदेश
जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने सीएम के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि एम्स निर्माण के लिए प्रस्तावित जमीन अरावली क्षेत्र में नहीं आती है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। सीएम ने भी ग्रामीणों की बात को मानते हुए प्रस्तावित स्थल अरावली वन क्षेत्र में आता है या नहीं इसकी जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि आप लोग जिस अफसर का नाम बताओगे, उससे ही जांच कराई जाएगी।